ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
गरुड़ पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के संवाद के रूप में है। यह पुराण विशेष रूप से मृत्यु, पुनर्जन्म, नरकों के वर्णन, और प्रेतकर्म (अंत्येष्टि संस्कार) के लिए प्रसिद्ध है। यह दो भागों में विभक्त है – पूर्वखंड और प्रेतकल्प (उत्तरखंड)।
पूर्वखंड में सृष्टि, व्रत, तीर्थ, दान, और आयुर्वेद का वर्णन है। प्रेतकल्प में मृत्यु के बाद की यात्रा, यमदूत, नरकों के कष्ट, और प्रेतों को मुक्ति देने के लिए श्राद्ध, पिंडदान, और गयाश्राद्ध की विधियाँ विस्तार से दी गई हैं। इस पुराण में "गरुड़ पुराण सार" भी है जो मृत्यु के बाद की प्रक्रियाओं का सारांश देता है।
गरुड़ पुराण को मृत्यु के बाद दसवें दिन पढ़ने की परंपरा है। यह ग्रंथ जीवन की अनित्यता, कर्मफल और मोक्ष का उपदेश देता है।
हमारा हिंदी संस्करण मूल श्लोकों के साथ सरल अनुवाद प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ उन सभी के लिए उपयोगी है जो मृत्यु संस्कार, श्राद्ध और आध्यात्मिक मुक्ति के विषय में जानना चाहते हैं।