ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
एकाक्षरोपनिषद् ओंकार के रहस्य पर केंद्रित है, जिसमें उसके तीन मात्राओं और तुरीय का विवेचन है।
एकाक्षरोपनिषद् ओंकार साधना का आधार है।
एकाक्षरोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से संबद्ध है। यह लघु उपनिषद् एक अक्षर – ओंकार – के रहस्य पर केंद्रित है। इसमें ओंकार के तीन मात्राओं (अ, उ, म) और उनके अर्थों का विवेचन है।
उपनिषद् के अनुसार, ओंकार ही सर्वोच्च ब्रह्म है। इसके प्रत्येक अक्षर का अपना महत्व है – "अ" से सृष्टि, "उ" से स्थिति, "म" से संहार, और मात्रारहित ओंकार से तुरीय अवस्था। जो इस एकाक्षर को जान लेता है, वह मुक्त हो जाता है।
एकाक्षरोपनिषद् विशेष रूप से ओंकार साधना, ध्यान, और उपासना के लिए महत्वपूर्ण है। यह उपनिषद् वेदांत का सार है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
एकाक्षरोपनिषद् (Ekakshara Upanishad) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
एकाक्षरोपनिषद्
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Ekakshara Upanishad
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
45 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
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