भक्तिलोक ग्रंथालय
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ध्वन्यालोक (Dhvanyaloka) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
काव्यशास्त्र

ध्वन्यालोक

Dhvanyaloka
0 कुल अध्याय
57 पठन
hi भाषा
380 पृष्ठ

काव्यशास्त्र का आधारभूत ग्रंथ।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

ध्वन्यालोक काव्यशास्त्र का मूल ग्रंथ है जिसमें ध्वनि सिद्धांत और व्यंजना का विवेचन है।
ध्वन्यालोक में व्यंजना और रस का सूक्ष्म विश्लेषण है।

ध्वन्यालोक आनन्दवर्धन द्वारा रचित काव्यशास्त्र का महान ग्रंथ है। इसमें "ध्वनि" सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है, जो काव्य की आत्मा माना जाता है। यह ग्रंथ अलंकार, रस, और व्यंजना के संबंधों को स्पष्ट करता है।

अभिनवगुप्त ने इस पर "लोचन" नामक टीका लिखी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
ध्वन्यालोक (Dhvanyaloka) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
ध्वन्यालोक
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Dhvanyaloka
श्रेणी (Category)
काव्यशास्त्र
पृष्ठ संख्या (Pages)
380 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
24 September 2026

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