ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
छान्दोग्योपनिषद् सामवेद से संबद्ध एक विशाल उपनिषद् है, जिसमें आठ अध्याय हैं। यह उपनिषद् उपदेशों, संवादों और दृष्टांतों के माध्यम से ब्रह्मविद्या का विवेचन करती है। इसमें "तत्त्वमसि" (तू वह है) का महावाक्य आता है, जो श्वेतकेतु और उद्दालक ऋषि के संवाद में प्रतिपादित है।
छान्दोग्योपनिषद् में ओंकार की उपासना, प्राण की महिमा, और सृष्टि के रहस्यों का वर्णन है। छठे अध्याय में उद्दालक ऋषि अपने पुत्र श्वेतकेतु को सत् (ब्रह्म) का ज्ञान देते हैं। आठवें अध्याय में "दहर विद्या" (हृदयाकाश में स्थित ब्रह्म) का उपदेश है।
यह उपनिषद् संज्ञा और संज्ञान के माध्यम से ब्रह्म को समझाने का प्रयास करती है। इसमें गायत्री विद्या, संवर्ग विद्या, और शांडिल्य विद्या जैसी महत्वपूर्ण विद्याएँ हैं। छान्दोग्योपनिषद् वेदांत दर्शन का एक आधार ग्रंथ है।
प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत मंत्रों के साथ सरल भाषा में अर्थ, पदच्छेद और विस्तृत व्याख्या दी गई है। यह संस्करण वेदांत के अध्ययन, आध्यात्मिक साधना और शोध के लिए अत्यंत उपयोगी है।