ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
बृहज्जातक वराहमिहिर का प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ है, जो फलित ज्योतिष, योग, दशा और गोचर का विवेचन करता है।
बृहज्जातक में जातक के सभी पक्षों का विस्तृत वर्णन है।
बृहज्जातक आचार्य वराहमिहिर द्वारा रचित ज्योतिष का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ माना जाता है। यह फलित ज्योतिष का आधार ग्रंथ है, जिसमें ग्रहों के फल, योग, दशा, गोचर, अष्टकवर्ग, और जातक के सभी पक्षों का सूक्ष्म विवेचन है।
इस ग्रंथ की 28 अध्यायों में विभाजित रचना आज भी ज्योतिष विद्या का मूल स्तंभ है। हर ज्योतिषी के लिए यह पुस्तक अनिवार्य मानी जाती है।
सर्वाधिक पढ़े जाने वाले लोकप्रिय अध्याय (Top 20 Chapters)
लोकप्रिय अध्यायों की सूची उपलब्ध नहीं है।
ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)
मूल शीर्षक (Original Title)
बृहज्जातक (Brihat Jataka) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
बृहज्जातक
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Brihat Jataka
श्रेणी (Category)
ज्योतिष
पृष्ठ संख्या (Pages)
520 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
10 August 2026
सभी अध्याय सूची (All Chapters Directory)
अध्याय अभी संकलित किए जा रहे हैं।