ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
ब्रह्म वैवर्त पुराण अट्ठारह महापुराणों में से एक है। यह पुराण चार खंडों में विभक्त है – ब्रह्मखंड, प्रकृतिखंड, गणपतिखंड और श्रीकृष्णजन्मखंड। इसमें भगवान कृष्ण को सर्वोच्च ब्रह्म मानकर उनकी लीलाओं, भक्ति और राधा-कृष्ण के प्रेम का अद्भुत वर्णन है।
ब्रह्मखंड में सृष्टि की उत्पत्ति, देवताओं की उत्पत्ति और धर्म का वर्णन है। प्रकृतिखंड में देवी (प्रकृति) की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है। गणपतिखंड में गणेश जी की उत्पत्ति, उनकी पूजा और महिमा बताई गई है। श्रीकृष्णजन्मखंड सबसे महत्वपूर्ण है – इसमें श्रीकृष्ण का जन्म, बाल लीलाएँ, राधा के साथ प्रेम, गोलोक धाम का वर्णन और कृष्ण की सर्वोच्चता स्थापित की गई है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण में भक्ति को सभी साधनों से श्रेष्ठ बताया गया है। यह ग्रंथ विशेष रूप से राधा-कृष्ण उपासकों के लिए आधार ग्रंथ है। इसमें कलियुग के लक्षण और भागवत धर्म के प्रचार का भी उल्लेख है।
हमारा हिंदी संस्करण सभी चार खंडों का सरल अनुवाद प्रस्तुत करता है, जिसमें मूल श्लोकों के साथ भावार्थ दिया गया है।