ग्रंथ परिचय (Book Introduction)
श्रीमद्भागवत पुराण अट्ठारह महापुराणों में सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली ग्रंथ है। इसे "भागवत" के नाम से जाना जाता है। यह बारह स्कंधों में विभक्त है और इसमें भगवान कृष्ण की लीलाओं का अत्यंत मनोहारी वर्णन है। भागवत की रचना महर्षि व्यास ने की थी, जब उन्हें भागवत धर्म के प्रचार के लिए प्रेरणा मिली।
प्रथम स्कंध में परीक्षित के श्राप की कथा और शुकदेव द्वारा भागवत सुनाने की भूमिका है। द्वितीय से पंचम स्कंध तक सृष्टि की रचना, ब्रह्मा का जन्म, प्रजापतियों की वंशावली, पृथ्वी का वर्णन, और भगवान के विभिन्न अवतारों का विवरण है। षष्ठ स्कंध में अजामिल की प्रसिद्ध कथा और भक्ति का महत्व बताया गया है। सप्तम स्कंध में प्रह्लाद की भक्ति और नृसिंह अवतार की कथा है। अष्टम स्कंध में गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन और वामन अवतार का वर्णन है। नवम स्कंध में राजाओं की वंशावली और भगवान के अवतारों की कथाएँ हैं।
दशम स्कंध भागवत का हृदय है – इसमें भगवान कृष्ण की बाल लीलाएँ, गोकुल की मनोहर घटनाएँ, रासलीला, कंस वध, मथुरा प्रस्थान और द्वारका स्थापना का अद्भुत वर्णन है। एकादश स्कंध में उद्धव को दिया गया ज्ञान (उद्धव गीता) और भक्तियोग का उपदेश है। द्वादश स्कंध में कलियुग के लक्षण, प्रलय और भागवत की महिमा बताई गई है।
श्रीमद्भागवत में भक्ति को सभी साधनों से श्रेष्ठ बताया गया है। यह ग्रंथ भारतीय संस्कृति का अमूल्य रत्न है। प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल श्लोकों के साथ सरल व्याख्या दी गई है, जिससे पाठक आसानी से भावों को समझ सकें।