भक्तिलोक ग्रंथालय
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अष्टांगहृदय (Ashtanga Hridaya) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
आयुर्वेद

अष्टांगहृदय

Ashtanga Hridaya
0 कुल अध्याय
67 पठन
hi भाषा
780 पृष्ठ

वाग्भट ने इसे सरलता और व्यावहारिकता पर केंद्रित किया है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

अष्टांगहृदय वाग्भट रचित आयुर्वेद का प्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें आयुर्वेद के आठ अंगों का संक्षिप्त एवं प्रयोगप्रधान वर्णन है।
अष्टांगहृदय आयुर्वेद का सर्वाधिक प्रयुक्त ग्रंथ है।

अष्टांगहृदय आयुर्वेद का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है, जिसकी रचना वाग्भटाचार्य ने की थी। यह ग्रंथ आयुर्वेद के आठ अंगों (अष्टांग) – कायचिकित्सा, बालरोग, ग्रहचिकित्सा, ऊर्ध्वांगरोग, शल्य, दंष्ट्रारोग, जराचिकित्सा, और वाजीकरण – का संक्षिप्त एवं सारगर्भित विवरण देता है। अष्टांगहृदय में छह स्थान हैं – सूत्रस्थान, शारीरस्थान, निदानस्थान, चिकित्सास्थान, कल्पस्थान, और उत्तरस्थान। कुल १२० अध्यायों में रोग-निदान, चिकित्सा, औषधि-योग, और स्वस्थवृत्त का सुव्यवस्थित वर्णन है।

वाग्भट ने अपने ग्रंथ को सरल, संक्षिप्त और प्रयोग-प्रधान बनाया है। अष्टांगहृदय की विशेषता है – दोष-प्रकोप के अनुसार चिकित्सा का वर्गीकरण, पंचकर्म की सरल विधियाँ, और सामान्य रोगों के लिए प्रभावी औषधि-योग। यह ग्रंथ आयुर्वेद के व्यावहारिक पक्ष को सामने रखता है और आज भी चिकित्सकों द्वारा सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है।

प्रस्तुत हिंदी अनुवाद में मूल संस्कृत श्लोकों के साथ सरल भाषा में अर्थ और व्याख्या दी गई है। यह पुस्तक आयुर्वेद के छात्रों, चिकित्सकों और सामान्य जन के लिए समान रूप से उपयोगी है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
अष्टांगहृदय (Ashtanga Hridaya) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
अष्टांगहृदय
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Ashtanga Hridaya
श्रेणी (Category)
आयुर्वेद
पृष्ठ संख्या (Pages)
780 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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