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ऐतरेयभाष्य (शंकराचार्य) – हिंदी अनुवाद
आध्यात्मिक ज्ञानपुंज
उपनिषद्

ऐतरेयभाष्य

Aitareya Bhashya
0 कुल अध्याय
48 पठन
hi भाषा
160 पृष्ठ

प्रज्ञानम ब्रह्म – चेतना ही ब्रह्म है।

ग्रंथ परिचय (Book Introduction)

ऐतरेयोपनिषद् पर शंकराचार्य का भाष्य, जिसमें सृष्टि-रहस्य और "प्रज्ञानम ब्रह्म" महावाक्य की व्याख्या है।
ऐतरेयोपनिषद् का शंकराचार्य का अद्वैत भाष्य।

ऐतरेयोपनिषद् भाष्य शंकराचार्य द्वारा रचित है। यह उपनिषद् ऋग्वेद की ऐतरेय आरण्यक का भाग है और इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, आत्मा के स्वरूप, और प्रज्ञानम ब्रह्म (प्रज्ञान ही ब्रह्म है) का प्रतिपादन है।

शंकराचार्य ने भाष्य में जगत् की उत्पत्ति, स्थिति और लय का आत्म-दृष्टि से विवेचन किया है। यह उपनिषद् अद्वैत के आधारभूत सिद्धांतों को समझने हेतु महत्वपूर्ण है।

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ग्रंथ की संपूर्ण जानकारी (Book Specifications)

मूल शीर्षक (Original Title)
ऐतरेयभाष्य (शंकराचार्य) – हिंदी अनुवाद
हिंदी शीर्षक (Hindi Title)
ऐतरेयभाष्य
अंग्रेजी शीर्षक (English Title)
Aitareya Bhashya
श्रेणी (Category)
उपनिषद्
पृष्ठ संख्या (Pages)
160 पृष्ठ
अंतिम अद्यतन (Updated)
25 September 2026

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