सनातन आरती मंजूषा · सम्पूर्ण सूची 222+ पावन आरतियाँ संदर्भ-आधारित समीक्षा

सम्पूर्ण देवी-देवता आरती संग्रह सूची

सनातन धर्म के समस्त पूजनीय देवी-देवताओं की लोकप्रिय आरतियाँ, नित्य स्तुति पाठ, राग-ताल, भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत संकलन।

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समस्त देवी-देवता आरती संग्रह परिचय

सनातन संस्कृति में आरती को पूजा-अर्चना का सर्वोत्कृष्ट मंगल अंग माना गया है। भगवान की स्तुति, धूप-दीप और पावन भाव से की गई आरती भक्त के समस्त कष्टों का निवारण कर आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है।

भक्तिलोक के संपादकीय मंडल द्वारा इस संग्रह की प्रत्येक आरती को शुद्धता, व्याकरणिक स्पष्टता, राग, ताल और भावार्थ के साथ संकलित किया गया है।

समस्त आरतियाँ (222)

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श्री भगवान शिव
35 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के त्रैलोक्यनाथ स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव की संपूर्ण आरती, सरल हिंदी भावार्थ, और वैदिक पूजा विधि के साथ आध्यात्मिक लाभ जानें।

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श्री भगवान गणेश
35 पाठ

भगवान श्री गणेश जी की आरती - जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा सम्पूर्ण बोल

सनातन संस्कृति में प्रथम आराध्य भगवान श्री गणेश जी की सर्वप्रसिद्ध आरती 'जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा' के सम्पूर्ण प्रामाणिक बोल, विस्तृत भावार्थ, इतिहास और पूजन विधान का संपूर्ण संग्रह।

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श्री भगवान कुबेर
32 पाठ

श्री कुबेर देव की पावन आरती - ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष कुबेर हरे: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान कुबेर धन के अधिपति और यक्षों के राजा हैं। उनकी आरती करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और ऐश्वर्य का वास होता है। इस लेख में कुबेर आरती का संपूर्ण पाठ और विधि दी गई है।

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श्री श्री गणेश
32 पाठ

श्री वरद विनायक की पावन आरती - ॐ जय वरद विनायक, स्वामी जय वरद विनायक: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री वरद विनायक की पावन आरती भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक को समर्पित है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में आरती के संपूर्ण बोल, भावार्थ, और पूजा विधि का वर्णन है।

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श्री भगवान परशुराम
32 पाठ

श्री परशुराम जी की आरती - ॐ जय भृगु नंदन देवा, प्रभु जय भृगु नंदन देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान परशुराम, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, उनकी आरती का गायन करने से साहस, तेज और धर्म की रक्षा का बल प्राप्त होता है। इस लेख में आरती के संपूर्ण बोल और विधि का वर्णन है।

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श्री माँ गंगा
32 पाठ

Har Har Gange Mata Ki Aarti

माँ गंगा की पावन आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पौराणिक इतिहास और पूजन विधि का प्रामाणिक मार्गदर्शिका।

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श्री श्री बालगोपाल
31 पाठ

श्री बालगोपाल जी की पावन आरती - यशोदा नंदन गोपाल, तेरी आरती गाऊं: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री बालगोपाल जी की पावन आरती (यशोदा नंदन गोपाल, तेरी आरती गाऊं) के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से जानें।

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श्री माँ वैष्णो देवी
31 पाठ

माता वैष्णो देवी जी की आरती - जय वैष्णवी माता मैया जय वैष्णवी माता हाथ जोड़ तेरे आगे आरती मैं गाता

माँ वैष्णो देवी की पवित्र आरती 'जय वैष्णवी माता' के संपूर्ण बोल, पद-दर-पद भावार्थ, शास्त्रीय पृष्ठभूमि और पूजन विधि की विस्तृत जानकारी।

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श्री श्री गणेश
30 पाठ

श्री वरदविनायक जी की आरती - ॐ जय वरदविनायक देवा, स्वामी जय वरदविनायक देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री वरदविनायक जी की पावन आरती 'ॐ जय वरदविनायक देवा' के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके अलौकिक आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी।

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श्री श्री चित्रगुप्त भगवान
30 पाठ

श्री चित्रगुप्त भगवान की पावन संध्या आरती - ॐ जय चित्रगुप्त देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सनातन धर्म में न्याय और कर्म के अधिपति भगवान श्री चित्रगुप्त जी की पावन संध्या आरती, संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ और विधि-विधान के साथ यहाँ पढ़ें।

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श्री श्री गणेश
30 पाठ

श्री वरद विनायक जी की आरती - ॐ जय वरद विनायक: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री वरद विनायक जी की आरती (ॐ जय वरद विनायक) के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी भावार्थ, अष्टविनायक महत्व और शास्त्रीय पूजा विधि का विस्तृत मार्गदर्शन।

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श्री भगवान परशुराम
29 पाठ

श्री भगवान परशुराम जी की आरती - ॐ जय परशुराम देवा, स्वामी जय परशुराम देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान परशुराम जी की दिव्य आरती, संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ, विस्तृत पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व के साथ। Bhaktilok.in पर पढ़ें।

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श्री भगवान शिव
29 पाठ

श्री बालगंगाधर एवं बटेश्वर महादेव आरती - ॐ जय बटेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के पावन और जागृत स्वरूप श्री बालगंगाधर एवं बटेश्वर महादेव की संपूर्ण आरती, हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत मार्गदर्शन।

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श्री भगवान बद्रीनाथ / भगवान विष्णु
28 पाठ

श्री बद्रीनाथ जी की पावन आरती - ॐ जय बद्री विशाल, स्वामी जय बद्री विशाल: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान बद्रीनाथ के चरणों में समर्पित 'ॐ जय बद्री विशाल' आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और धार्मिक महत्व को जानें Bhaktilok.in के इस विशेष गाइड में।

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श्री भगवान शिव
28 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के पावन और जागृत स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव जी की आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व का संपूर्ण मार्गदर्शिका।

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श्री श्री चित्रगुप्त भगवान
28 पाठ

श्री चित्रगुप्त भगवान की विशेष संध्या आरती - ॐ जय चित्रगुप्त देवा, स्वामी जय चित्रगुप्त देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान श्री चित्रगुप्त न्याय के देवता और मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले दिव्य महाशक्ति हैं। उनकी विशेष संध्या आरती 'ॐ जय चित्रगुप्त देवा' के माध्यम से साधਕ को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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श्री भगवान शिव और माता पार्वती
26 पाठ

श्री अर्धनारीश्वर भगवान की पावन आरती - ॐ जय अर्धनारीश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव और माता शक्ति के अद्वितीय और अविभाज्य स्वरूप श्री अर्धनारीश्वर की पावन आरती, संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ और विधि-विधान के साथ पढ़ें।

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श्री श्री बालगोपाल
26 पाठ

श्री हरि बालगोपाल भगवान की पावन आरती - यशोदा नंदन गोपाल, तेरी आरती गाऊं: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री हरि बालगोपाल भगवान की पावन आरती (यशोदा नंदन गोपाल, तेरी आरती गाऊं) के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ पढ़ें।

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श्री माँ दुर्गा
25 पाठ

श्री दुर्गा माता की पावन आरती - जय अम्बे गौरी, मैया जय अम्बे गौरी: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

माँ दुर्गा की पावन आरती 'जय अम्बे गौरी' के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और आध्यात्मिक महत्व का सबसे विस्तृत और प्रामाणिक गाइड।

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श्री श्री बांके बिहारी / श्री राधा कृष्ण
25 पाठ

श्री बांके बिहारी जी की पावन आरती - आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधारी की: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री बांके बिहारी जी की पावन आरती 'आरती कुंज बिहारी की' के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत मार्गदर्शन।

आरती संग्रह से जुड़े मुख्य प्रश्न (FAQs)

शास्त्रों के अनुसार, पूजा-पाठ में यदि कोई विधि-विधान की कमी या मंत्रोच्चारण में त्रुटि रह गई हो, तो अंत में श्रद्धापूर्वक आरती कर लेने से पूजा पूर्ण और फलदायी मानी जाती है।

आरती हमेशा दोनों हाथों से थाली पकड़कर सीधे खड़े होकर करनी चाहिए। शांत चित्त से देव मंत्र या आरती गान करते हुए विनम्र भाव से थाली घुमानी चाहिए।

कपूर को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है क्योंकि यह बिना कोई अवशेष छोड़े पूर्णतः जल जाता है (अहंकार शून्यता का प्रतीक)। गाय के शुद्ध घी की बत्ती से भी आरती समान रूप से शुभ मानी जाती है।
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