मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रम् (Sri Gayatri Sahasranama Stotram Lyrics in Hindi) -
॥ श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥
॥ ध्यानम् ॥
मुक्ताविद्रुमहेमनीलधवलच्छायैर्मुखैस्त्रीक्षणैः
युक्तामिन्दुनिबद्धरत्नमकुटां तत्त्वार्थवर्णात्मिकाम्
गायत्रीं वरदाऽभयाङ्कुशकशाः शुभ्रं कपालं गदां
शङ्खं चक्रमथारविन्दयुगलं हस्तैर्वहन्तीं भजे ॥
॥ अथ स्तोत्रं ॥
तत्काररूपा तत्त्वज्ञा तत्पदार्थस्वरूपिणी
तपस्स्व्याध्यायनिरता तपस्विजनसन्नुता ॥ १ ॥
तत्कीर्तिगुणसम्पन्ना तथ्यवाक्च तपोनिधिः
तत्त्वोपदेशसम्बन्धा तपोलोकनिवासिनी ॥ २ ॥
तरुणादित्यसङ्काशा तप्तकाञ्चनभूषणा
तमोऽपहारिणी तन्त्री तारिणी ताररूपिणी ॥ ३ ॥
तलादिभुवनान्तःस्था तर्कशास्त्रविधायिनी
तन्त्रसारा तन्त्रमाता तन्त्रमार्गप्रदर्शिनी ॥ ४ ॥
तत्त्वा तन्त्रविधानज्ञा तन्त्रस्था तन्त्रसाक्षिणी
तदेकध्याननिरता तत्त्वज्ञानप्रबोधिनी ॥ ५ ॥
तन्नाममन्त्रसुप्रीता तपस्विजनसेविता
सकाररूपा सावित्री सर्वरूपा सनातनी ॥ ६ ॥
संसारदुःखशमनी सर्वयागफलप्रदा
सकला सत्यसङ्कल्पा सत्यासत्यप्रदायिनी ॥ ७ ॥
सन्तोषजननी सारा सत्यलोकनिवासिनी
समुद्रतनयाराध्या सामगानप्रिया सती ॥ ८ ॥
समाना सामदेवी च समस्तसुरसेविता
सर्वसम्पत्तिजननी सद्गुणा सकलेष्टदा ॥ ९ ॥
सनकादिमुनिध्येया समानाधिकवर्जिता
साध्या सिद्धा सुधावासा सिद्धिः साध्यप्रदायिनी ॥ १० ॥
सद्युगाराध्यनिलया समुत्तीर्णा सदाशिवा
सर्ववेदान्तनिलया सर्वशास्त्रार्थगोचरा ॥ ११ ॥
सहस्रदलपद्मस्था सर्वज्ञा सर्वतोमुखी
समया समयाचारा सदसद्ग्रन्थिभेदिनी ॥ १२ ॥
सप्तकोटिमहामन्त्रमाता सर्वप्रदायिनी
सगुणा सम्भ्रमा साक्षी सर्वचैतन्यरूपिणी ॥ १३ ॥
सत्कीर्तिः सात्त्विकी साध्वी सच्चिदानन्दरूपिणी
सङ्कल्परूपिणी सन्ध्या सालग्रामनिवासिनी ॥ १४ ॥
सर्वोपाधिविनिर्मुक्ता सत्यज्ञानप्रबोधिनी
विकाररूपा विप्रश्रीर्विप्राराधनतत्परा ॥ १५ ॥
विप्रप्रीर्विप्रकल्याणी विप्रवाक्यस्वरूपिणी
विप्रमन्दिरमध्यस्था विप्रवादविनोदिनी ॥ १६ ॥
विप्रोपाधिविनिर्भेत्री विप्रहत्याविमोचनी
विप्रत्रात्री विप्रगोत्रा विप्रगोत्रविवर्धिनी ॥ १७ ॥
विप्रभोजनसन्तुष्टा विष्णुरूपा विनोदिनी
विष्णुमाया विष्णुवन्द्या विष्णुगर्भा विचित्रिणी ॥ १८ ॥
वैष्णवी विष्णुभगिनी विष्णुमायाविलासिनी
विकाररहिता विश्वविज्ञानघनरूपिणी ॥ १९ ॥
विबुधा विष्णुसङ्कल्पा विश्वामित्रप्रसादिनी
विष्णुचैतन्यनिलया विष्णुस्वा विश्वसाक्षिणी ॥ २० ॥
विवेकिनी वियद्रूपा विजया विश्वमोहिनी
विद्याधरी विधानज्ञा वेदतत्त्वार्थरूपिणी ॥ २१ ॥
विरूपाक्षी विराड्रूपा विक्रमा विश्वमङ्गला
विश्वम्भरासमाराध्या विश्वभ्रमणकारिणी ॥ २२ ॥
विनायकी विनोदस्था वीरगोष्ठीविवर्धिनी
विवाहरहिता विन्ध्या विन्ध्याचलनिवासिनी ॥ २३ ॥
विद्याविद्याकरी विद्या विद्याविद्याप्रबोधिनी
विमला विभवा वेद्या विश्वस्था विविधोज्ज्वला ॥ २४ ॥
वीरमध्या वरारोहा वितन्त्रा विश्वनायिका
वीरहत्याप्रशमनी विनम्रजनपालिनी ॥ २५ ॥
वीरधीर्विविधाकारा विरोधिजननाशिनी
तुकाररूपा तुर्यश्रीस्तुलसीवनवासिनी ॥ २६ ॥
तुरङ्गी तुरगारूढा तुलादानफलप्रदा
तुलामाघस्नानतुष्टा तुष्टिपुष्टिप्रदायिनी ॥ २७ ॥
तुरङ्गमप्रसन्तुष्टा तुलिता तुल्यमध्यगा
तुङ्गोत्तुङ्गा तुङ्गकुचा तुहिनाचलसंस्थिता ॥ २८ ॥
तुम्बुरादिस्तुतिप्रीता तुषारशिखरीश्वरी
तुष्टा च तुष्टिजननी तुष्टलोकनिवासिनी ॥ २९ ॥
तुलाधारा तुलामध्या तुलास्था तुर्यरूपिणी
तुरीयगुणगम्भीरा तुर्यनादस्वरूपिणी ॥ ३० ॥
तुर्यविद्यालास्यतुष्टा तुर्यशास्त्रार्थवादिनी
तुरीयशास्त्रतत्त्वज्ञा तुर्यवादविनोदिनी ॥ ३१ ॥
तुर्यनादान्तनिलया तुर्यानन्दस्वरूपिणी
तुरीयभक्तिजननी तुर्यमार्गप्रदर्शिनी ॥ ३२ ॥
र्वकाररूपा वागीशी वरेण्या वरसंविधा
वरा वरिष्ठा वैदेही वेदशास्त्रप्रदर्शिनी ॥ ३३ ॥
विकल्पशमनी वाणी वाञ्छितार्थफलप्रदा
वयःस्था च वयोमध्या वयोऽवस्थाविवर्जिता ॥ ३४ ॥
वन्दिनी वादिनी वर्या वाङ्मयी वीरवन्दिता
वानप्रस्थाश्रमस्था च वनदुर्गा वनालया ॥ ३५ ॥
वनजाक्षी वनचरी वनिता विश्वमोहिनी
वसिष्ठवामदेवादिवन्द्या वन्द्यस्वरूपिणी ॥ ३६ ॥
वैद्या वैद्यचिकित्सा च वषट्कारी वसुन्धरा
वसुमाता वसुत्राता वसुजन्मविमोचनी ॥ ३७ ॥
वसुप्रदा वासुदेवी वासुदेवमनोहरी
वासवार्चितपादश्रीर्वासवारिविनाशिनी ॥ ३८ ॥
वागीशी वाङ्मनःस्थायी वशिनी वनवासभूः
वामदेवी वरारोहा वाद्यघोषणतत्परा ॥ ३९ ॥
वाचस्पतिसमाराध्या वेदमाता विनोदिनी
रेकाररूपा रेवा च रेवातीरनिवासिनी ॥ ४० ॥
राजीवलोचना रामा रागिणी रतिवन्दिता
रमणी रामजप्ता च राज्यपा रजताद्रिगा ॥ ४१ ॥
राकिणी रेवती रक्षा रुद्रजन्मा रजस्वला
रेणुका रमणी रम्या रतिवृद्धा रता रतिः ॥ ४२ ॥
रावणानन्दसन्धायी राजश्री राजशेखरी
रणमध्या रथारूढा रविकोटिसमप्रभा ॥ ४३ ॥
रविमण्डलमध्यस्था रजनी रविलोचना
रथाङ्गपाणी रक्षोघ्नी रागिणी रावणार्चिता ॥ ४४ ॥
रम्भादिकन्यकाराध्या राज्यदा राज्यवर्धिनी
रजताद्रीशसक्थिस्था रम्या राजीवलोचना ॥ ४५ ॥
रम्यवाणी रमाराध्या राज्यधात्री रतोत्सवा
रेवती च रतोत्साहा राजहृद्रोगहारिणी ॥ ४६ ॥
रङ्गप्रवृद्धमधुरा रङ्गमण्डपमध्यगा
रञ्जिता राजजननी रम्या राकेन्दुमध्यगा ॥ ४७ ॥
राविणी रागिणी रञ्ज्या राजराजेश्वरार्चिता
राजन्वती राजनीती रजताचलवासिनी ॥ ४८ ॥
राघवार्चितपादश्रीः राघवी राघवप्रिया
रत्ननूपुरमध्याढ्या रत्नद्वीपनिवासिनी ॥ ४९ ॥
रत्नप्राकारमध्यस्था रत्नमण्डपमध्यगा
रत्नाभिषेकसन्तुष्टा रत्नाङ्गी रत्नदायिनी ॥ ५० ॥
णिकाररूपिणी नित्या नित्यतृप्ता निरञ्जना
निद्रात्ययविशेषज्ञा नीलजीमूतसन्निभा ॥ ५१ ॥
नीवारशूकवत्तन्वी नित्यकल्याणरूपिणी
नित्योत्सवा नित्यपूज्या नित्यानन्दस्वरूपिणी ॥ ५२ ॥
निर्विकल्पा निर्गुणस्था निश्चिन्ता निरुपद्रवा
निस्संशया निरीहा च निर्लोभा नीलमूर्धजा ॥ ५३ ॥
निखिलागममध्यस्था निखिलागमसंस्थिता
नित्योपाधिविनिर्मुक्ता नित्यकर्मफलप्रदा ॥ ५४ ॥
नीलग्रीवा निराहारा निरञ्जनवरप्रदा
नवनीतप्रिया नारी नरकार्णवतारिणी ॥ ५५ ॥
नारायणी निरीहा च निर्मला निर्गुणप्रिया
निश्चिन्ता निगमाचारनिखिलागमवेदिनी ॥ ५६ ॥
निमेषानिमिषोत्पन्ना निमेषाण्डविधायिनी
निवातदीपमध्यस्था निर्विघ्ना नीचनाशिनी ॥ ५७ ॥
नीलवेणी नीलखण्डा निर्विषा निष्कशोभिता
नीलांशुकपरीधाना निन्दाघ्नी च निरीश्वरी ॥ ५८ ॥
निश्वासोच्छ्वासमध्यस्था नित्ययानविलासिनी
यङ्काररूपा यन्त्रेशी यन्त्री यन्त्रयशस्विनी ॥ ५९ ॥
यन्त्राराधनसन्तुष्टा यजमानस्वरूपिणी
योगिपूज्या यकारस्था यूपस्तम्भनिवासिनी ॥ ६० ॥
यमघ्नी यमकल्पा च यशःकामा यतीश्वरी
यमादियोगनिरता यतिदुःखापहारिणी ॥ ६१ ॥
यज्ञा यज्वा यजुर्गेया यज्ञेश्वरपतिव्रता
यज्ञसूत्रप्रदा यष्ट्री यज्ञकर्मफलप्रदा ॥ ६२ ॥
यवाङ्कुरप्रिया यन्त्री यवदघ्नी यवार्चिता
यज्ञकर्ती यज्ञभोक्त्री यज्ञाङ्गी यज्ञवाहिनी ॥ ६३ ॥
यज्ञसाक्षी यज्ञमुखी यजुषी यज्ञरक्षणी
भकाररूपा भद्रेशी भद्रकल्याणदायिनी ॥ ६४ ॥
भक्तप्रिया भक्तसखी भक्ताभीष्टस्वरूपिणी
भगिनी भक्तसुलभा भक्तिदा भक्तवत्सला ॥ ६५ ॥
भक्तचैतन्यनिलया भक्तबन्धविमोचनी
भक्तस्वरूपिणी भाग्या भक्तारोग्यप्रदायिनी ॥ ६६ ॥
भक्तमाता भक्तगम्या भक्ताभीष्टप्रदायिनी
भास्करी भैरवी भोग्या भवानी भयनाशिनी ॥ ६७ ॥
भद्रात्मिका भद्रदायी भद्रकाली भयङ्करी
भगनिष्यन्दिनी भूम्नी भवबन्धविमोचनी ॥ ६८ ॥
भीमा भवसखी भङ्गी भङ्गुरा भीमदर्शिनी
भल्ली भल्लीधरा भीरुर्भेरुण्डा भीमपापहा ॥ ६९ ॥
भावज्ञा भोगदात्री च भवघ्नी भूतिभूषणा
भूतिदा भूमिदात्री च भूपतित्वप्रदायिनी ॥ ७० ॥
भ्रामरी भ्रमरी भारी भवसागरतारिणी
भण्डासुरवधोत्साहा भाग्यदा भावमोदिनी ॥ ७१ ॥
गोकाररूपा गोमाता गुरुपत्नी गुरुप्रिया
गोरोचनप्रिया गौरी गोविन्दगुणवर्धिनी ॥ ७२ ॥
गोपालचेष्टासन्तुष्टा गोवर्धनविवर्धिनी
गोविन्दरूपिणी गोप्त्री गोकुलानां विवर्धिनी ॥ ७३ ॥
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "श्री गायत्री सहस्रनाम स्तोत्रम् (Sri Gayatri Sahasranama Stotram Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।
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