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कीर्तन की है रात बाबा आज ठाणे आणो है (Kirtan Ki Hai Raat Baba Aaj Thane Aane Hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

145 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्तों का प्रिय संगीतमंत्र: बाबा की आराधना

प्रभु की कृपा पाने हेतु गाया जाने वाला यह भजन भक्तों के हृदय में प्रेम एवं श्रद्धा भरता है।

कीर्तन की है रात बाबा आज ठाणे आणो है ।थारे कोल निभानु हेदरबार सावरिया, ऐसो सजो प्यारो, दयालु आप कोसेवा में सावरिया, सगला खड़ा डिगे, हुकम बस आप कोसेवा में थारी म्हने आज बिछ जणू हे, थारे कोल निभानु हेकीर्तन की है रात...कीर्तन की है तैयारी, कीर्तन करा जमकर, प्रभु क्यु देर करोवादों थारो दाता, कीर्तन में आने को, घणी मत देर करोभजनासु ठाणे म्हने आज रिझाणु है, थारे कोल निभानु हेकीर्तन की है रात...जो कुछ बनो म्हासु, अर्पण परभू सारो, प्रभु स्वीकार करोनादाँ सु गलती होती ही आई है, ब्रभु मत ध्यान धरोनंदू सावरिया थानों दास पुरानो है, थारे कोल निभानु हे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में बाबा की आह्वान करते हुए उनकी कृपा की कामना की गई है। 'कीर्तन की है रात बाबा आज ठाणे आणो है' इस पंक्ति में भक्त बाबा से निवेदन कर रहे हैं कि वह उनके पास आएं और अपनी कृपा बरसाएं। रोमांटिक और भक्ति भाव से भरे शब्द जैसे 'थारे कोल निभानु हे' दर्शाते हैं कि भक्त का मन बाबा के प्रति कितनी गहरी श्रद्धा से भरा हुआ है। उनके प्रति अनन्य भक्ति अर्पित करते हुए, भक्त यह समझते हैं कि बाबा उनकी सभी इच्छाओं का ध्यान रखेंगे और उन्हें अपने स्नेह से भर देंगे। इस भजन का मूल संदेश यह है कि जहां प्रेम और भक्ति होती है, वहां भगवान का निवास होता है।

भजन में भक्त की भावनाएँ इतनी प्रगाढ़ हैं कि वे बाबा से इनकार नहीं कर सकते। 'प्रभु क्यु देर करोवादों थारो दाता' का अर्थ है कि भक्त अपनी आत्‍मीयता से प्रभु को बुला रहे हैं, यह दर्शाते हुए कि भक्ति की गहराई में उत्साह की एक लहर है। 'जो कुछ बनो म्हासु, अर्पण परभू सारो' पंक्ति में भक्ति का अद्भुत रूप देखा जा सकता है, जहां भक्त सब कुछ भगवान को समर्पित करते हैं। यह केवल व्यक्तिगत भक्ति ही नहीं, बल्कि समाज के कल्याण की भावना भी अभिव्यक्त करती है। ऐसे में भजन का सुनना और गाना न केवल भक्ति का एक हिस्सा है, बल्कि यह समर्पण और प्रेम का उदाहरण भी है।

यह भजन भक्ति मार्ग एवं अनुराग का मौलिक संदेश देता है। भक्त की वाणी में प्रेम और समर्पण की भावना से भरे शब्द सिद्ध करते हैं कि ज्ञानी और भक्त दोनों के लिए एक समान है। 'ब्रभु मत ध्यान धरोनंदू' का तात्पर्य है कि व्यक्ति को भक्ति के क्षणों में ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके पीछे यह तर्क है कि जब भक्त ध्यान लगाता है, तो उसका आत्मिक संबंध प्रभु से और गहरा होता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि उस समर्पण का प्रतीक है, जिससे भक्त अपने प्रभु का साथ पा सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का स्थान भारतीय भक्तिपंथ में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह सरलता से अध्यात्मिकता को प्रतिस्थापित करता है, जैसा कि भागवत पुराण में भी दिखाया गया है, जहां भक्त की सच्ची भक्ति स्वर्ग की ओर ले जाती है। इसी प्रकार, रामायण और महाभारत में भी भक्तिजनों की कहानियों के माध्यम से यह समझा गया है कि भगवान की कृपा सच्चे मन से की गई भक्ति में ही निहित है। इस प्रकार, यह भजन भक्तों में प्रेम, श्रद्धा और विश्वास को बढ़ाने का कार्य करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का गायन मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष, और भक्ति भाव की अनुभूति करता है। नियमित रूप से इस भजन का गायन या ध्यान करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे कठिनाइयों का सामना करना आसान हो जाता है। यह भक्ति न केवल भौतिक सुख, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास भी लाती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही समय सुबह या शाम का होता है। पूजा स्थल पर दीप जलाकर, पुष्प अर्पित करें और पूरे मन से भजन गाएं। शरीर को सीधा बैठाएं और ध्यान केंद्रित करें ताकि प्रभु की कृपा की अनुभूति कर सकें। शुद्धता और एकाग्रता भजन की प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन भक्तों के लिए अद्भुत कृपा का प्रतीक है और यह भगवान को बुलाने का एक तरीका है। भक्त की भक्ति को दर्शाता है और प्रभु की उपस्थिति का अहसास कराता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है?

इस भजन का गायन सुबह या शाम के समय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इन समयों में मन आध्यात्मिकता के प्रति अधिक खुला रहता है।

मैं इस भजन का गायन कैसे करूं?

इस भजन का गायन करते समय एकाग्रता और श्रद्धा के साथ भाव से गाना चाहिए। सफेद कपड़े पहनना और दीप जलाना भी शुभ माना जाता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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