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शीश के दानी थारा कीर्तन करावां(Sheesh Ke Dani Thara Kirtan Karawa Lyrics In Hindi) - by Surendra Jangid Bhaktilok

82 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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बाबा श्याम का भजन: शीश के दानी थारा

इस भजन में बाबा श्याम के प्रति भक्ति और सम्पूर्ण समर्पण की अद्भुत भावना है।

शीश के दानी थारा कीर्तन करावां कीर्तन करावां थाने आज बुलावां शीश के दानी..........सच्ची श्रद्धा से बाबा थाने बुलावां हीरा मोत्या सु बाबा सिंहासन सजावां आप पधारो बाबा सिंहासन बिराजो शीश के दानी..........केसरिया रंग का थाने बागां पहनावां फूल चढ़ावां थाने इत्तर लगावां केसर चन्दन का बाबा तिलक लगावां शीश के दानी..........थाल सजावां छप्पन भोग लगावां देसी घी का बाबा दीपक जलावां आरती उतारां बाबा ध्यान लगावां शीश के दानी..........ग्यारस का कीर्तन बाबा रात जगावां सुख दुःख की बातां बाबा थाने बतावां भजना सु थाने बाबा आज रिझावाँ शीश के दानी..........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन "शीश के दानी थारा कीर्तन करावां" बाबा श्याम के प्रति भक्ति और प्रेम का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसमें भक्त कवि शेरूंद्र जांगिड ने अपने हृदय की गहराई से श्रद्धा व्यक्त की है कि वह अपने ईष्ट, बाबा श्याम को अपने दर पर आमंत्रित कर रहे हैं। 'शीश के दानी' का अर्थ है कि श्याम बाबा भक्तों के कल्याण के लिए शीश (सिर) को भी दान देने वाले हैं। 'सच्ची श्रद्धा से बाबा थाने बुलावां' के माध्यम से भक्त की श्रद्धा की गहराई को दर्शाया गया है। यह दर्शाता है कि श्रद्धा केवल एक भावना नहीं, बल्कि समर्पण और निष्ठा का प्रतीक है। श्याम बाबा के दर पर भक्ति के साथ आने पर भक्त मन में संतोष और आत्मिक शांति प्राप्त करता है। इसी प्रकार 'हीरा मोत्या सु बाबा सिंहासन सजावां' से भक्त अपने प्रभु के लिए भव्यता और सम्मान प्रदर्शित कर रहा है, जो साधारण जीवन में अपने स्वामी का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास है।

भजन के भावार्थ में भक्त की निष्ठा और प्रेम प्रकट होता है। 'केसरिया रंग का थाने बागां पहनावां' इस बात को ध्यान में रखते हुए सुनाई देता है कि भक्त अपने भगवान के लिए सर्वश्रेष्ठ और सुंदरता का अनुभव चाहता है। ये फूल और इत्र का प्रयोग केवल भक्ति का एक प्रतीक है, जिसके माध्यम से भक्त अपने मन की गहराई से श्याम बाबा को समर्पित करता है। 'छप्पन भोग लगावां' से भक्त श्याम बाबा को भोग अर्पित करने का माध्यम बनता है, यह दर्शाते हुए कि भगवान की भक्त में कितनी अधिक स्थायी भूख है। इसके साथ ही 'ग्यारस का कीर्तन बाबा रात जगावां' से भक्त का संकल्प दिखता है कि वह बाबा का कीर्तन करके अपने मन में बाबा की उपस्थिति का अनुभव करता है। यह न केवल व्यक्तिगत भक्ति का मार्ग है बल्कि सामूहिक जन मानस में भी शांति और प्रेम फैलाने का प्रयास है।

यह भजन भक्ति मार्ग के सर्वोच्च सिद्धांतों का प्रतीक है। भक्त का समर्पण, पूजा और आह्वान सिर्फ एक भक्ति-प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि इसे जीवन का एक हिस्सा बना लेना चाहिए। यहाँ पर विभिन्न रंगों और भोगों का उल्लेख केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि यह सब भक्त के मन की गहराइयों से उत्पन्न प्रेम का परिणाम है। प्रारंभिक भक्ति में जो भक्त श्याम के प्रति समर्पित होता है, वह आगे की भक्ति में भक्ति की गहराई को अनुभव करता है। 'आरती उतारां बाबा ध्यान लगावां' का अभिप्राय है कि भक्ति का प्रत्येक चरण एक अद्भुत साधना है, जिसमें भक्त की भावना, आरती और ध्यान का एक अद्वितीय संगम विद्यमान है। यह भजन एक साधक को शांति, प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भक्ति के इस संगीतमय स्वरुप का पुराणों और ग्रंथों में एक अद्भुत स्थल है। देवी-देवताओं के प्रति भक्ति की शक्ति को दर्शाने वाले अनेक लेख हैं, जैसे कि भागवत पुराण और रामायण में भगवान राम और कृष्ण के प्रति भक्तों की असीम श्रद्धा। बाबा श्याम की कथा और उनकी उपासना श्रवण महाभारत के पांडवों के समय से होती आ रही है। इस भजन के माध्य से समय के अभाव में भी भक्त अपने देवता से जुड़ने का प्रयास करता है, जिससे अज्ञान, दुख-दर्द और सांसारिक बाधाओं से मुक्ति मिल सके।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से व्यक्ति मानसिक शांति और संतोष का अनुभव करता है। भक्ति भाव से गाए जाने पर यह आंतरिक ऊर्जा और सकारात्मकता उत्पन्न करता है, जिससे व्यक्ति जीवन में आई चुनौतियों का सामना अधिक साहस से करने में सक्षम होता है। भजन का मंत्रमय जाप तनाव को कम करने और मन की शांति के लिए लाभकारी है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय के समय या शाम को देवताओं की पूजा के समय किया जा सकता है। पूजा के दौरान एक दीप जलाना, फूल-फल अर्पित करना और ध्यान की स्थिति में बैठना आवश्यक है। मानसिक शांति के लिए भक्त को गंभीरता से ध्यान लगाना होगा और अपने हृदय में भगवान के प्रति प्रेम महसूस करना चाहिए। इस भजन का पाठ करते समय भक्त को चाहिए कि वह पूरी निष्ठा और समर्पण से इसे गाए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शीश के दानी थारा कीर्तन करावां का क्या अर्थ है?

इस भजन का अर्थ है कि भक्त भगवान श्याम को अपने हृदय से आमंत्रित कर रहा है, जो शीश (सिर) को भी दान देने वाले हैं। यह समर्पण और भक्ति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

इस भजन का गाने का सही समय कब है?

इस भजन को सुबह की पूजा के समय या शाम की आरती के समय गाया जा सकता है। भक्तों का मानना है कि यह समय विशेष रूप से शांति और भक्ति के लिए उपयुक्त है।

क्या इस भजन के गाने से मानसिक शांति मिलती है?

जी हां, इस भजन का जाप मानसिक शांति और संतोष लाने में मददगार साबित होता है। भक्तों का अनुभव है कि नियमित रूप से गाने से तनाव कम होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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