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चाहे ब्रह्मा कहो चाहे विष्णु कहो महादेवा (chahe brahma kaho chahe vishnu kaho lyrics in hindi) - Bhaktilok

156 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महादेव के साथ: एक भक्ति यात्रा

इस भजन के माध्यम से, शिव की भक्ति और उनके अनंत स्वरूप का अनुभव करें।

चाहे ब्रह्मा कहो चाहे विष्णु कहो महादेवा (chahe brahma kaho chahe vishnu kaho lyrics in hindi) - चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे, विष्णु कहो, महाँदेवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ॥ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा, ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ॥चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...ओ कैलाश, के वासी, कहां हो, हम बुलाए, यहां तुम, कहां हो ॥ले के, गोरा को साथ, ले के, डमरू को हाथ, आओ देवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ।चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...ओ वैकुंठ, के बांसी, कहां हो, हम बुलाए, यहां तुम, कहां हो ॥ले के, लक्ष्मी को साथ, ले के, चक्र को हाथ, आओ देवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ।चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...ओ अयोध्या, के वासी, कहां हो, हम बुलाए, यहां तुम, कहां हो ॥ले के, सीता को साथ, ले के, धनुष को हाथ, आओ देवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ।चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...ओ मथुरा, के वासी, कहां हो, हम बुलाए, यहां तुम, कहां हो ॥ले के, राधा को साथ, ले के, मुरली को हाथ, आओ देवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ।चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...ओ गुफ़ा, के वासी, कहां हो, हम बुलाए, यहां तुम, कहां हो ॥ले के, रत्नो को साथ, ले के, चिमटे को हाथ, आओ देवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ।चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...ओ पहाड़ों, की वासी, कहां हो, हम बुलाए, यहां तुम, कहां हो ॥ले के, लांगुरिया को साथ, ले के, त्रिशूल को हाथ, आओ देवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा ।चाहे, ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में, भक्त भगवान शिव की महिमा का गान कर रहे हैं, जो सृजन और प्रवृत्ति के साक्षात रूप हैं। 'चाहे ब्रह्मा कहो, चाहे विष्णु कहो' जैसे पंक्तियों से यह अभिव्यक्त होता है कि शिव को सर्वव्यापी रूप में देखा जा सकता है। भक्ति में यह संदेश है कि ब्रह्मा के सृजन, विष्णु के पालन और शिव के संहार के साथ-साथ हर देवता एकता में बंधे हुए हैं। भजन के 'ओ कैलाश के वासी' जैसे शब्दों से हमें कैलाश पर्वत की महिमा का एहसास होता है, जहां भगवान शिव का निवास है। भक्त भगवान से उनकी कृपा की प्रार्थना कर रहे हैं, यह दर्शाते हुए कि शिव ही हमारे जीवन में ऐसे देवी-देवताओं का सार हैं जिनके बिना हमारा जीवन अधूरा है।

इस भजन की भावनात्मक गहराई भक्तों की संवेदनाओं से भरी हुई है। 'महादेवा,ॐ नमो, भगवते, वासुदेवा' का जाप करते समय भक्त शांति और आशा की तलाश में होते हैं। यह भजन भगवान शिव की असीम कृपा की सजीवता को दर्शाता है, और भक्त उन्हें अपने जीवन के हर पहलू में अनुरोध कर रहे हैं। भक्त कितनी गहराई से अपने देवता की ओर आकर्षित हैं, इसे कई स्थानों पर देखा जा सकता है, जैसे 'सबको साथ लेकर आना' और 'जीवन के अलग-अलग आयामों से शब्दों को जोड़ना।' इन पंक्तियों में भक्त की आस्था, प्रेम और एकात्मता की भावना प्रकट होती है।

इस भजन का दार्शनिक अर्थ भक्ति मार्ग की गहराई में छिपा है। यह जानकारी देता है कि शिव को विभिन्न रूपों में देखा जा सकता है। शिव का 'गोरा' स्वरूप, 'कैलाश' की निवास, और 'लक्ष्मी' तथा 'सीता' के साथ जुड़ाव से हमें यह बोध होता है कि हर देवता का एक अलग महत्व है। शिव का स्वरूप इस प्रकार की बहुआयामी सच्चाई का प्रतिनिधित्व करता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्त को यह समझना जरूरी है कि हर देवी-देवता की सृजन और समर्पण की अपनी अलग कहानियाँ हैं, जो अंततः महादेव की ओर ले जाती हैं। इस भजन के माध्यम से, भक्त अपनी भावनाओं को व्यक्त कर, भगवान शिव के प्रति अपनी निष्ठा को सुदृढ़ कर रहे हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हिन्दू धर्म के पौराणिक ग्रंथों में गहराई से निहित है। भगवान शिव को त्रिदेवों में सर्वोच्च माना जाता है, जो सृष्टि के कर्ता, पालनहार और संहारक हैं। शिव का नाम लेते ही अज्ञान का नाश और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस भजन में दिए गए अनगिनत नाम, जैसे 'कैलाश', 'वैकुंठ', 'मथुरा' आदि विभिन्न अवसरों और स्थानों का उल्लेख कर शिव की सर्वव्यापीता को दर्शाते हैं। इसी प्रकार, शिव की भक्ति रामायण, महाभारत और पुराणों जैसे ग्रंथों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और आध्यात्मिक उन्नति का साधन है। यह भक्ति अनावश्यक चिंता और तनाव को दूर करती है और भक्त को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। साथ ही, यह भजन जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति और साहस भी देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय या संध्याकाल के समय करना उचित होता है। पूजा करते समय एक शुद्ध आसन पर बैठकर, ध्यान एकाग्रता से भगवान शिव की मूर्ति के सामने दीप जलाना चाहिए। भजन के दौरान मन को शुद्ध और शांत रखना आवश्यक है। इस भक्ति प्रक्रिया में श्रद्धा और विश्वास के साथ साधना करने से मन की शांति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश एकता और शिव के सर्वव्यापी स्वरूप का गुणगान करना है। यह दर्शाता है कि सभी देवी-देवता शिव से जुड़े हुए हैं।

क्या भगवान शिव को अन्य देवताओं के समान माना जा सकता है?

भजन में उल्लिखित अन्य देवता जैसे ब्रह्मा और विष्णु भी शिव के अंश माने जाते हैं, क्योंकि सभी देवताओं की उत्पत्ति और अंत शिव में होती है।

इस भजन का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का पाठ मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति और मुश्किल समय में साहस और प्रेरणा प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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