Durga Bhajan Lyrics सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

तोला दुर्गा कहंव के मां काली चारों धाम में तोरे है उजारी लिरिक्स

तोला दुर्गा कहंव: माँ काली के प्रति श्रद्धा और भक्ति का अनूठा भजन, जो भक्तों को संकटों से उबारता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ दुर्गा और काली: श्रद्धा का अनूठा भजन

इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा और काली की आराधना करें, जो भक्तों की संकटों को दूर करती हैं।

तोला दुर्गा कहंव के मां काली चारों धाम में तोरे है उजारी लिरिक्स || Tola Durga kahava ke maan Kali chaaron dhaam mein tore hai ujaaree lyrics in hindi ||तोला दुर्गा कहंव के मां काली,चारों धाम में तोरे है उजारी,ओ माता रानीका मैं चढ़ावंव तोला, दर्शन दे माता मोर..चंद्रपुर में चंद्रसेनी कहाये तैं,रायगढ़ मा बूढ़ी माई हो,घूघरा नरवा मा बइठे हस काली बन के,हरदी के गौंटिन दाई वो..सारंगढ़ मा तैं समलाई,ढोलेसरा के तैं बंजारी,ओ मां भवानी,का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..तोर लईका दाई, रोवत हौं तोर बर..तोर बर मैं उदास हौं..विनती ल सुन ले माता, सुन ले गुहार वो..राख ले अंचरा के छांव वो..तोर बिना ये मोर जिन्दगानी..जइसे सावन होथे बिन पानी..ओ माता रानी..का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..देखत हौं चारो ओर, डहार नइ दिखै तोर..कहां लुकागे महामाई तैं..आंसू बरसगे दाई, चोला तरसगे वो..कइसे पीर सुनाव मैं..मोर नैना के प्यास बुझा दे..तोर दर्शन बिना नइ बाचंव..बचा ले दाई..का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ दुर्गा और माँ काली की आराधना है। भक्त अपनी हार्दिक भावनाओं के साथ माँ से प्रार्थना करते हैं कि वे उनके जीवन को प्रकाशमय बनाएं। "तोला दुर्गा कहंव के मां काली" की पंक्तियों में भक्त माँ से यह विनती करता है कि वे चारों धामों में उनके अस्तित्व को उजागर करें। यह दर्शाता है कि देवी का आशीर्वाद सभी स्थलों पर विद्यमान है। भक्त अपनी समस्याओं और दुःखद स्मृतियों को साझा करते हैं, जैसे "तोर बर मैं उदास हौं"। यह अंश दर्शाता है कि भक्त का हृदय देवी की सम्पूर्ण कृपा की कामना रखता है।

भावार्थ की दृष्टि से यह भजन भक्त के व्यक्तिगत संबंध को देवी के प्रति प्रस्तुत करता है। भक्त अपनी चिंताओं को "आंसू बरसगे दाई" की पंक्ति में दर्शाता है, जहाँ वह अपनी मुश्किलों को साझा करता है और एक सहारे की खोज में है। यह काली माँ के प्रति करुणा और प्रगाढ़ भक्ति का प्रतीक है। पंक्ति "बचा ले दाई" एक तेजी से बढ़ती हुई मांग को पेश करती है, जिसमें भक्त की आवश्यकता को पहचानने की छवि साफ है। भक्त का गहन प्रेम देवी से व्यक्त होता है, और वह यह दर्शाता है कि देवी के दर्शन के बिना उसका जीवन अधूरा है।

यह भजन भक्ति मार्ग की गहराइयों को दर्शाता है, जिसमें शुद्ध हृदय और निष्ठा आवश्यक हैं। इसमें भक्त की प्रार्थना, निष्कर्ष की पवित्रता और अद्वितीयता को दर्शाता है। भक्ति का यह मार्ग प्रतिमान है कि कैसे श्रद्धालु अपनी इच्छाओं, आशाओं और सपनों को देवी माँ के चरणों में रखता है। यह एक ऐसी यात्रा है, जिससे भक्त देवी की अनुकंपा प्राप्त करने के लिए उठता है। माँ काली और दुर्गा का यह संगम भक्त के मन में एक अद्भुत आस्था का संचार करता है, जो उनकी हर संतान को माता का सुरक्षित आंचल प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व देवी दुर्गा और काली की महानता में निहित है, जिन्हें भारतीय संस्कृति में शक्ति और सुरक्षात्मक देवियों के रूप में पूजा जाता है। पुराणों में देवी दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी के रूप में जाना जाता है, जो अंधकार और बुराई का नाश करती हैं। उनके उत्सव, जैसे नवरात्रि, भक्तों को शक्ति और साहस का संचार करते हैं। इसी प्रकार, माँ काली को मौलिकता और पारलौकिक शक्तियों का प्रतीक माना गया है। भक्तां के लिए, इस भजन का पाठ शक्ति के अदृश्य स्रोत से जोड़ता है, जहाँ भक्त देवी के असीम प्रेम और आशीर्वाद की साक्षात्कार करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन प्राप्त होता है। भक्तों का मानना है कि माँ दुर्गा और काली के प्रति इस भक्ति में उनकी सारी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त की समस्याओं का समाधान और निर्भीकता की वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही जाप सुबह-सुबह या रात्रि के समय किया जा सकता है। इसे करते समय एक दीप जलाना और आमतौर पर फूलों की भेंट चढ़ाना उत्तम रहता है। भक्त को ध्यानमग्न अवस्था में बैठकर आत्मा के शुद्धिकरण का प्रयास करना चाहिए। सच्चे मन से देवी से प्रार्थना करें, जिससे उनकी कृपा प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

यह भजन माँ दुर्गा और माँ काली से अपने जीवन में आशीर्वाद की भिक्षा मांगता है, साथ ही उनकी कृपा की कामना करता है।

भजन का जाप किस समय करना चाहिए?

इसे सुबह या शाम के समय जाप करना अधिक लाभकारी होता है, जब मन शांत और स्थिर होता है।

क्या इस भजन का जाप कठिन है?

इस भजन का जाप सरल है और किसी विशेष تعلم की आवश्यकता नहीं है। भावनाओं के साथ इसे गाना अधिक महत्व रखता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 16 Oct 2026

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