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Holi Bhajan

होली खेले मसाने में भजन (Holi khele masaane mein Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

103 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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राधा-कृष्ण की होली: प्रेम का रंग चढ़ाने वाला भजन

इस शुभ अवसर पर सुरम्य होली का रंग छिड़कें और हरि की सजीवता का अनुभव करें।

होली खेले मसाने में, होली खेले मसाने में। हरि सिज्जन गिनती, रंगनिया मस्ताने में॥ कांची कांची देवी की, मस्तानी अवतरण। रंगी रंगी गोधूलि, मुस्कान जगाने में॥ धरती माता चुपसी, आंसू नहीं बहाती। नन्दन बगिया की बाती, फूलों को घुमाने में॥ आगे धूम धूम बजी, हरि सिज्जन गिनती। रंगनिया मस्ताने में, होली खेले मसाने में॥ गोपियां सारी गइया, गोधूलि का सौगात। रंग बिछे चरणों में, होली खेले मसाने में॥ नंदजी की उत्सव छटा, रंगीन रंगीला खेल। खोले सब आंठी बंधन, होली खेले मसाने में॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में होली के शुभ और आनंद भरे पर्व का वर्णन किया गया है, जो कि भक्तों के लिए आध्यात्मिक आनंद प्रदान करता है। 'होली खेले मसाने में' की पंक्तियाँ, भगवान श्री कृष्ण और राधा का रंगीन और प्रेम से भरा खेल दर्शाती हैं। इसे सुनकर भक्तों के मन में उल्लास और प्रेम का संचार होता है। कलियुग में होली एक ऐसा पर्व है, जो न केवल जीवन में रंग भरने का कार्य करता है, बल्कि यह प्रेम, एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का भी संदेश देता है। इस गीत में बात की गई है कसौटी और कुसुम की, जो अनुपम लालित्य को दर्शाते हैं। रंगों के इस त्योहार के माध्यम से, कलाकारों ने प्रेम का अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है, जिसमें भक्ति और समर्पण की गहराई उपस्थित है।

इस भजन का भावार्थ केवल बाह्य उत्सव तक ही सीमित नहीं है। भक्त इन पंक्तियों के माध्यम से आंतरिक उल्लास और भक्तिभाव का अनुभव करते हैं। विशेषकर 'रंगनिया मस्ताने में' वाक्यांश से यह स्पष्ट होता है कि होली का वास्तविक अर्थ है आनंद में सम्मिलित होना, जहाँ सभी भेदभाव और वैमनस्य पीछे छूट जाते हैं। इस अवसर पर, जब लोग एक-दूसरे पर रंग डालते हैं, वे वास्तव में एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम और स्नेह को प्रकट करते हैं। इससे आत्मा में एकता और सामंजस्य की स्थापना होती है। खासकर, जब गोपियां गयियों के संग होती हैं, तब यह संदेश और प्रबल हो जाता है कि प्रेम में सच्चा रंग भरा होता है, जो सभी विभाजन को मिटाने में सक्षम है।

फिर से इस भजन के थल में धार्मिकता और भक्ति की गहराई देखने को मिलती है। 'नंदजी की उत्सव छटा' दर्शाता है कि भक्ति मार्ग में प्रेम की उपासना का महत्व है। होली का पर्व एक भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति का मौका है। भक्त रंगों में अपने दुखों और बाधाओं को विसर्जित कर देते हैं। इस भजन के दौरान, भक्तों का जीवन में रंग भरा जाता है और यह अनुभव कराना कि सृष्टि के कण-कण में भगवान का प्रताव है। शास्त्रों में भक्तिपूर्ण उद्घोषण के इस तरीके को 'त्वामेव माता च पिता त्वमेव' की भावना में मूर्त किया गया है, जहाँ भक्त अपने आप को भगवान के प्रेम में समर्पित करके एक नया जीवन प्रवेश करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय संस्कृति और परंपरा में गहराई से जुड़ा है। यहां तक कि पुराणों में भी होली का पर्व भगवान कृष्ण के जीवन से संबंधित है। यह पर्व प्रेम, एकता और भाईचारे का प्रतीक है, और इसे विशेषकर सही भाव के साथ मनाना आवश्यक है। श्रीमद्भागवत में कृष्ण की होली का वर्णन किया गया है, जहाँ वृंदावन की गोपियां अपने प्रिय भगवान के संग रंग खेलते हैं। यह दर्शाता है कि भक्ति और प्रेम जीवन के सबसे महान उपहार हैं। इस भजन के माध्य से भक्त कृष्ण की अनंत प्रेम और कुलमिलन स्वभाव का अनुभव करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मन में शांति और आनंद का अनुभव होता है। भक्तों में प्रेम और सद्भावना का संचार होता है, जो कि सामाजिक संबंधों को सशक्त करता है। इसके अतिरिक्त, मानसिक तनाव कम करने में सहायता मिलती है, जिससे व्यक्ति स्वस्थ और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन यापन कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या सूर्यास्त के दौरान किया जाना चाहिए। भजन गाते समय दिए का प्रकाश करें और भगवान की तस्वीर के समक्ष बैठकर ध्यान करें। सही मुद्रा में बैठकर मन को शांति से भरना आवश्यक है, जिससे ध्यान पूर्ण रूप से गीत की भावना में लीन हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या होली का त्योहार केवल आनंद का पर्व है?

नहीं, होली का त्योहार प्रेम, एकता और भाईचारे का प्रतीक है। यह भक्तिदिव्यता का उत्सव भी है, जहाँ सबके दुखों को भुलाकर आनंद का अनुभव किया जाता है।

इस भजन का महत्व क्या है?

यह भजन भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम को दर्शाता है, और भक्तों को प्रेम और स्नेह की भावना में लिप्त करता है। इससे आत्मा में आनंद और शांति का संचार होता है।

किस समय इस भजन का जाप करना बेहतर होता है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय बेहतर होता है, जब मन शांति और एकाग्रता से भरा हो। यह गुरु-उपासना और भक्ति साधना के लिए उचित समय है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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