आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
Matarani Bhajan

कृपा बरसा दईयो मोरी नर्मदा माई (kripa barsa daiyo mori narmada mai Lyrics in Hindi) - Matarani Bhajan - Bhaktilok

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

नर्मदा माई की कृपा का अमृत समान भावछंद

इस भजन का पाठ नर्मदा माई की कृपा की याचना करता है, सभी भक्तों को प्रेम से जोड़ता है।

कृपा बरसा दईयो मोरी नर्मदा माई कृपा बरसा दईयो मोरी नरबदा माई। तेज लहर और गहरो पानी पाप मिटावे मात भवानी तेज लहर और गहरो पानी पाप मिटावे मात भवानी मां रेवा मां रेवा मां रेवा भी कहलाई तोरी जय हो नरबदा माई कृपा बरसा दईयो मोरी नरबदा माई। निर्मल कहीं कहीं रूप भयंकर तुझमें समाए हर कंकर है शंकर निर्मल कहीं कहीं रूप भयंकर तुझमें समाए हर कंकर है शंकर शिव भोले की शिव भोले की शिव भोले की बेटी कहाई तोरी जय हो नरबदा माई कृपा बरसा दईयो मोरी नरबदा माई। जब डगमगाए मां हमारी नैय्या банके सहारा आ जइयो मैय्या जब डगमगाए मां हमारी नैय्या банके सहारा आ जइयो मैय्या तूने सबपे तूने सबपे तूने सबपे कृपा बरसाई तोरी जय हो नरबदा माई कृपा बरसा दईयो मोरी नरबदा माई। कृपा बरसा दईयो मोरी नरबदा माई।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य主题 नर्मदा माई की कृपा ब्रह्माण्ड में व्याप्त शक्ति का प्रतीक है। नर्मदा को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है और इसे माँ का स्वरूप बताया गया है। भजन की पहली पंक्ति, 'कृपा बरसा दईयो मोरी नर्मदा माई', भक्त अपनी कठिनाइयों के समय में माँ से कृपा और संरक्षण की याचना कर रहा है। माँ नर्मदा की पवित्रता और उनके जल की शक्ति का उल्लेख करते हुए, यह भजन कहता है कि उनके तेज लहर और गहरे पानी में पाप मिटाने की क्षमता है। इस प्रकार, नर्मदा का जल सिर्फ भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धता का भी साधन है।

भावार्थ में, यह भजन नर्मदा माई के प्रति भक्त की भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। पंक्ति 'जब डगमगाए मां हमारी नैय्या' यह दर्शाती है कि जब भक्त जीवन में विपत्तियों से जूझता है, तब वह माँ नर्मदा से सहायता की प्रार्थना करता है। माँ को सहारा मानते हुए, भक्त अपनी समस्त संकटों से उबरने हेतु नर्मदा की कृपा की कामना करता है। माँ के 'कंकर में शंकर' होने का अर्थ है कि नर्मदा में शिव का निवास है, जो भक्तों के लिए आनंद और शांति प्रदान करते हैं। यह भाव भक्त के अंतर्मन में नर्मदा और शिव को साक्षात् अनुभव करने की प्रेरणा देता है।

नर्मदा पूजा में भक्ति मार्ग का महत्वपूर्ण प्रतीक है। भक्तों का यह विश्वास है कि माँ नर्मदा की सेवा और पूजा से वे मानसिक और आत्मिक शुद्धि प्राप्त करते हैं। इस भजन में माँ का गुणगान करते हुए यह दर्शाया गया है कि भक्ति में एकता और समर्पण का कितना महत्व है। पवित्रता, प्रेम और सहानुभूति लाने वाले नर्मदा के जल से, भक्त खुद को शुद्ध और बुराइयों से मुक्त महसूस करते हैं। यह भजन भक्ति मार्ग की आतंरिक शांति और साधना के लिए एक प्रेरणादायी स्रोत है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

नर्मदा नदी को भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण स्थान मिला है। यह केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि माँ का स्वरूप है जो भक्तों को शांति और प्रसन्नता प्रदान करती है। पौराणिक कथाओं में नर्मदा का विशेष उल्लेख है, जैसे स्कंदपुराण में इसे 'धरा की देवी' कहा गया है। नर्मदा की पूजा का उल्लेख पुराणों के साथ-साथ रामायण और महाभारत में भी मिलता है। भक्तों का मानना है कि नर्मदा के जल में स्नान करने से पाप समाप्त होते हैं और आत्मिक कल्याण की प्राप्ति होती है। इस भजन में नर्मदा की महिमा, उनके स्नेह और कृपा की महत्वपूर्णता को बताया गया है, जिससे भक्त संजीवनी शक्ति का अनुभव कर सके।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। कृपा बरसा दईयो मोरी नर्मदा माई भजन के पाठ से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भक्तों को अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है, साथ ही पापों का क्षय भी करता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से आत्मिक उन्नति और संपूर्णता की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या संध्या समय करना विशेष लाभकारी है। भक्त को शुद्ध मन और श्रद्धा से इस भजन का जाप करना चाहिए। पूजा के दौरान एक दीपक जलाना और नर्मदा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष बैठना उचित रहता है। ध्यान और समर्पण के साथ भक्ति भावना के साथ इस भजन का पाठ करने से विशेष कृपा की अनुभूति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नर्मदा माई की पूजा का क्या महत्व है?

नर्मदा माई की पूजा का महत्व धार्मिक विश्वास और पवित्रता के प्रतीक के रूप में है। उन्हें जल, शक्ति, और शुद्धता का स्रोत माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा से मानसिक और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।

कृपा बरसा दईयो मोरी नर्मदा माई भजन का श्रवण कैसे करें?

इस भजन के श्रवण के लिए भक्त को शांत मन से बैठकर एकाग्रता से यह भजन सुनना चाहिए। श्रद्धा और भक्ति के साथ पाठ करने से मन में सकारात्मकता और शांति का प्रवाह होता है।

क्या इस भजन का पाठ करते समय कोई विशेष वस्त्र धारण करना चाहिए?

भजन का पाठ करने के लिए शुद्ध और सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह श्रद्धा और पवित्रता का प्रतीक है और भक्ति भाव को बढ़ाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!