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Durga Bhajan Lyrics

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ (Durga Hai Meri Maa Ambe Hai Meri Maa Lyrics in Hindi) - Durga Bhajan - Bhaktilok

111 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा: जीवन का प्रकाश और आशीर्वाद

इस भजन में माँ दुर्गा की अनंत कृपा का गुणगान किया गया है। प्रेम से इसे गाएं और आशीर्वाद पाएं।

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँजय बोलो जय माता दी, जय हो...जो भी दर पे आए, जय हो...वो खाली न जाए, जय हो...सबके काम है करती, जय हो...सबके दुखरे हरती, जय हो...मैया मेरी शेरोवाली, जय हो...भरदे झोली खाली, जय हो...मैया मेरी शेरोवाली, जय हो...भरदे झोली खाली जय हो...दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ...दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ...सारे जग को खेल खिलायेबिच्डो को जो खूब मिलाये दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँपूरे करे अरमान जो सारे,देती है वरदान जो सारेदुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ दुर्गा को एक पालनहार, उपस्याहारिणी और समस्त जगत की माता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 'दुर्गा है मेरी माँ, अम्बे है मेरी माँ' इस पंक्ति से माँ की स्नेहिल और वात्सल्यपूर्ण छवि उभरती है। माँ दुर्गा केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन के सभी सुख-दुख में हमारे साथ रहने वाली माता हैं। वह हर दर पर आने वाले भक्तों को निराश नहीं लौटातीं, जैसा कि गीत में कहा गया है, 'जो भी दर पे आए, वो खाली न जाए।' इसका अर्थ है कि माँ की कृपा से हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। हर पंक्ति में भक्ति की अपार ऊर्जा निहित है, जो भक्तों को आश्वस्त करती है कि माँ दुर्गा हर संकट में उनके साथ हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन न केवल माँ दुर्गा के प्रति भक्ति का संचार करता है, बल्कि अनमोल भावनाओं का भी संचार करता है। 'सबके काम है करती, सबके दुखरे हरती' यह पंक्ति दर्शाती है कि माँ अपने भक्तों के दुख-दर्द को समझती हैं और दूर करती हैं। उनकी पहचान शेरोवाली माता के रूप में भी की जाती है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं। भक्त जब इस भजन को गाते हैं, तो उनकी श्रद्धा और विश्वास माँ के प्रति और बढ़ते हैं। यह भजन एक प्रकार का संवाद है, जिसमें भक्त अपनी भावनाओं को माँ के आगे रखते हैं, और इस प्रकार एक सशक्त भक्ति का संचार होता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग (भक्ति का रास्ता) का गहन अनुभव किया जा सकता है। भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस आस्था का एहसास है, जो हर भक्त के हृदय में माँ दुर्गा के प्रति होती है। 'सारे जग को खेल खिलाये, बिछडो को जो खूब मिलाये' जैसे पदों के माध्यम से यह बताया गया है कि माँ दुर्गा समाज में संयोग और सामंजस्य की भावना को बढ़ाती हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि किसी भी कठिनाई में माँ की कृपा की तलाश हमारे जीवन में सकारात्मकता लाती है। इससे भक्त की आत्मा को पूर्णता और शांति प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ दुर्गा का पूजन भारतीय दर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां शakti (शक्ति) की पूजा की जाती है। मार्कंडेय पुराण में माँ दुर्गा की कथाएँ वर्णित हैं, जो उनकी शक्ति और पराक्रम को दर्शाती हैं। महाकालेश्वर की उपासना के दौरान भी देवी दुर्गा की आराधना की जाती है। 'दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ' भजन में इस आदर्श को दर्शाया गया है कि माँ केवल भक्तों की आराधना का केंद्र नहीं, बल्कि उनकी आशा और भय का निवारक भी हैं। महाभारत में भी माता दुर्गा की महिमा का वर्णन मिलता है, जहां वे पाण्डवों की रक्षा करती हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। यह भजन मानसिक शांति, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन प्रदान करता है। इसे गाने से भक्तों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है और साथ ही उन्हें माँ दुर्गा की अनुकंपा को अनुभव करने का अवसर मिलता है। यह न केवल भक्ति को बढ़ाता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप प्रातः या संध्या के समय करना सर्वोत्तम है। भजन गाते समय भगवान का ध्यान करें और एक दीप जलाएं। भजन गाते समय मन में विश्वास और प्रेम का भाव रखें, इससे माँ का आशीर्वाद अधिक प्रभावी होता है। बैठे रहने का सही तरीका है, जिससे आपकी सकारात्मक ऊर्जा ऊपर की ओर बढे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन का मूल संदेश क्या है?

इस भजन का मूल संदेश माँ दुर्गा की अनंत कृपा और दया पर आधारित है। यह बताता है कि माँ हर भक्त की मदद करती हैं और उनके दुख दूर करती हैं।

भजन गाने का सही समय क्या है?

इस भजन का गान सुबह या शाम के समय करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भक्त को माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्या विशेष अवसर पर इस भजन का गान किया जा सकता है?

हाँ, नवरात्रि जैसे पर्व पर या किसी संकट के समय इस भजन का गान करना विशेष फलदायी होता है, जिससे भक्त को माँ का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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