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Punjabi Devi Bhajan

नमस्कार देवी शिवे कल्याणी (Namaskaar Devi Shive Kalyaani Lyrics in Hindi) - by Jaya Kishori Devi Bhajan - Bhaktilok

109 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री देवी शिवे कल्याणी: भक्ति की असीम कृपा

यह भजन देवी शिवे कल्याणी की अनुकंपा को प्रशस्त करता है, भक्ति के साथ इसे गाएं और दिव्य अनुभव प्राप्त करें।

नमस्कार देवी शिवे कल्याणी ।दो भक्ति का वरदान दुर्गे भवानी॥जिधर देखते हैं उधर तू-ही तू-है।हर शै में जलवा तेरा हू-ब हू-है॥तेरी जुस्त जू है,तेरी गुफ्तगू है।तू घट घट बसै ,तेरी लीला लासानी॥नमस्कार देवी......तू ही शैलपुत्री तू ही दक्षबाला।तू ही वैष्णो कालका चण्डी ज्वाला॥उमां रमां सरस्वती जग की पाला।तू ही देव दानव ,करें नज़रानी॥नमस्कार देवी......तेरी रहीमतों का नहीं है ठिकाना।है दीदार तेरा दया का खजाना।तेरे खज़ाने से लेता है जमाना।तेरी बख्शिशों की ,बड़ी मेहरबानी॥नमस्कार देवी.......नहीं जानते हैं तेरी कुछ भी माया।बनें हैं वहीं हम ,जो तूने बनाया।तेरी कृपा से है जीवन यह पाया।‘‘मधुप’’ की भव बाधा ,हरो महारानी॥नमस्कार देवी......

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस मन्त्र में देवी शिवे कल्याणी की महिमा का गुणगान किया गया है। पहले शब्द 'नमस्कार' से यह समर्पण की भावना प्रकट होती है, जो बिना शर्त विश्वास और भक्ति के प्रतीक हैं। 'तू-ही तू है' का अर्थ है कि सर्वत्र देवी का प्रकाश और भूमिका है। हर वस्तु में उनका जलवा है, जो हमें इस बात की याद दिलाता है कि वे सभी जीवों के अंदर स्थित हैं। आगे के पद 'तेरी लीला लासानी' में यह संदेश दिया गया है कि देवी के द्वारा उत्पन्न सभी विविधताओं में उनके प्रेम और दया का अभिव्यक्ति निहित है। उनका हर रूप, चाहे वह शैलपुत्री हो या चण्डी, भक्तों को विभिन्न समस्याओं और संकटों से मुक्ति दिलाता है।

भजन में 'तेरे खज़ाने से लेता है जमाना' की पंक्ति इस बात को उजागर करती है कि संसार की सभी समृद्धि और सुख-समृद्धि केवल देवी की कृपा से ही संभव है। व्यक्ति जब देवी के प्रति समर्पित होता है, तो उसकी भक्ति उन्हें अनेक समस्याओं से मुक्त करती है। 'नहीं जानते हैं तेरी कुछ भी माया' में इस तथ्य का बोध कराना है कि मनुष्य इस संसार में जो भी भक्ति या साधना करता है, वह मूलतः देवी की कृपा से ही है। यह भक्ति का अद्भुत एहसास है जिसके माध्यम से भक्त अपने आप को देवी से जुड़े हुए अनुभव करता है।

भक्ति मार्ग की यह राह सुनहरी है, जहां भक्त अपने अज्ञानता और अनभिज्ञता को छोड़ते हैं। 'जो तूने बनाया' का भाव संकेत करता है कि ब्रह्मांड की सम्पूर्णता और जीवों की रचना देवी की इच्छा और आशीर्वाद से ही संभव है। इस दृष्टिकोण से भक्ति केवल इष्ट देवी की प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि यह स्वयं के आत्म-साक्षात्कार की भी ओर प्रेरित करती है। इस मन्त्र में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण से शक्ति का ध्यान तथा प्रेम के साथ भावों को अभिव्यक्त करने की प्रेरणा दी गई है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन हिन्दू संस्कृति के में महत्वूर्ण त्यौहारों और अनुष्ठानों का हिस्सा है। देवी की उपासना का उल्लेख देवी भागवत, देवी महात्म्य तथा अन्य पवित्र ग्रंथों में मिलता है। जैसे कि 'आदिशक्ति' का विवरण भी विभिन्न पुराणों में किया गया है, यह भजन उस आदिशक्ति की पूजा का निर्माण करता है। भक्ति के इस रूप को पर्व, अनुष्ठान और साधना में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तों का यह विश्वास है कि इस भजन के माध्यम से वे देवी की कृपा प्राप्त करते हैं, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। देवी शिवे कल्याणी का यह भजन सुनने और गाने से मानसिक शांति और संतुलन मिलता है। इसका नियमित पाठ करने से भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। यह भजन तनाव और चिंता को कम करने में भी सहायक होता है तथा भक्त को आत्मिक जुड़ाव महसूस कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रात:काल सूर्योदय से पहले या संध्या समय करना शुभ माना जाता है। इस दौरान सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें और एक दीया जलाएं। पूजा स्थल को स्वच्छ रखें एवं देवी को फूल तथा उनके अनुसार भोग अर्पित करें। बैठने का स्थान साफ और शांत होना चाहिए, जिससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिले।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नमस्कार देवी शिवे कल्याणी गाने का उचित समय क्या है?

इस भजन का गाना प्रात:काल सूर्योदय से पहले या संध्या समय सर्वोत्तम है, जब वातावरण शांति और भक्ति से भरपूर होता है।

इस भजन के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, सकारात्मकता और आत्मिक साक्षात्कार में सहायक होता है, जिससे भक्त की भक्ति में वृद्धि होती है।

क्या इस भजन की विशेष पूजा विधि है?

इस भजन का पाठ करते समय, देवी को सफेद फूलों और प्राकृतिक वस्त्रों से सजाना चाहिए, ध्यानस्थ रहना चाहिए और शुद्ध मन से अर्पण करना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 04 Sep 2026

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