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Punjabi Devi Bhajan

छड़ के द्वारा किथे जावां दातिये दस मेरी माँ (Chad ke dvara kithe javaan daatiye das meri maa Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan - Bhaktilok

74 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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जन्मदाता देवी की अनुकंपा: भक्तों का मार्गदर्शन

इस भजन के माध्यम से माँ की कृपा और मार्गदर्शन का अनुभव करें।

छड़ के द्वारा किथे जावां दातिये दस मेरी माँ मुझे बताओ मेरी माँ मेलोडी-तुम्हारा प्यार परवान चढ़ा छोड़ कर, कहाँ जाऊँ मैं, मेरी माँ को बताओ ll जब दीया, मल्हियास, दहलीज़स तेरियापूरा हुआ, अधूरा हुआ, फिर भी मेरी आदत है आपका रेट, जय हो, चलो तुम्हारे लिए हम रोएँ और रोएँ, मुझे बताओ मेरी माँ सिवाय, द्वारा, कहाँ... अपना रेट मत छोड़ो, चलो. मेरा दूसरा, कोई नहीं, मुझे ठिकाना बताओ एलकहां जा रहे हो, जय हो? हम कहाँ जायें, दुःख सुनें, मुझे बताओ, मेरी माँ, सिवाय, द्वारा, कहाँ, बिल्ला, रोएंदार, हाथ जोड़े हुए वह तुम्हारे चरणों से विमुख नहीं होता मुझसे कौन, मुझे लिखने दो, मुझे लिखने दो, मुझे बताओ, मेरी माँ, सिवाय, द्वारा, कहाँ...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त की माँ से प्रार्थना की जा रही है कि वह उसे मार्गदर्शन दें। भजन की शुरुआत 'छड़ के द्वारा किथे जावां दातिये दस मेरी माँ' से होती है, जो यह दर्शाता है कि भक्ति का मूल तत्व अपने माता-पिता या देवी से माँगना है। भक्त यहाँ अपनी भावनाएँ साझा कर रहा है कि वह किस तरह जीवन की कठिनाइयों में अटका हुआ है और अपनी माँ से मार्ग दिखाने की निवेदन कर रहा है। 'जब दीया, मल्हियास, दहलीज़स...' जैसे शब्द यह दर्शाते हैं कि मातृसत्ता के प्रति भक्ति व्यक्ति के जीवन की हर मुश्किल घड़ी में सहारा देती है। यहाँ, माँ केवल भौतिक माता नहीं, बल्कि देवी को अभिव्यक्त करती है, जो भक्त को आध्यात्मिक समर्थन और सुरक्षा प्रदान करती है।

भजन में भक्त की पीड़ा और दुःख देखने को मिलता है, 'मुझे बताओ मेरी माँ, सिवाय, द्वारा, कहाँ...' इस पंक्ति के माध्यम से भक्त अपनी असमर्थता और जीवन की जटिलताओं का सच उद्घाटन कर रहा है। वह किसी निर्णायक स्थान की खोज में है, जहाँ उसे शांति और सुरक्षा मिले। 'चलो तुम्हारे लिए हम रोएँ और रोएँ' का अर्थ है कि भक्त किसी भी संकट में माँ के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहता है। माँ के प्रति यह निष्कलंक भक्ति और विश्वास भक्त को सांत्वना प्रदान करती है, जिससे उसकी आस्था और भी मजबूत होती है। यहाँ भक्त के आंसू 'प्यार परवान चढ़ा' के माध्यम से मातृत्व का महत्व इंगित करते हैं।

इस भजन में भक्ति मार्ग (भक्ति मार्ग) की गहराई छिपी हुई है। भक्त ने अपने हृदय में देवी के प्रति असीम प्रेम और श्रद्धा स्थापित की है। देवी के चरणों में अर्पण दिए गए आंसू और दुख-भार सब कुछ छोड़कर उन्हें समर्पित करते हैं। यह भजन देवत्व का उत्सव है, जो भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर एकीकृत करता है। इसमें निहित गूढ़ता का श्रेय इस बात को है कि माँ देवी की अनुकंपा से हर कठिनाई पार की जा सकती है। इस प्रकार, यह भजन सम्पूर्ण भक्तिके लिए एक मार्गदर्शक संदेश भी प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन माँ दुर्गा या अन्य माँ रूपी देवी की महिमा को प्रस्तुत करता है। भारतीय संस्कृति में माँ का स्वरूप हमेशा सराहा गया है, जहाँ वे केवल जन्मदाता नहीं बल्कि सारे संकटों का निवारण करने वाली भूमिकाएँ निभाती हैं। इसका संदर्भ पौराणिक कथाएँ जैसे देवी भागवतम् और मार्कंडी पुराण में भी मिलता है, जहाँ देवी ने भक्तों की रक्षा की है। जब भक्त अपनी बाधाओं और कष्टों के बीच में होते हैं, तो उनका ध्यान माँ की करुणा और आश्वासन की ओर आकर्षित होता है। यही कारण है कि यह भजन हर भक्त के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है, जो देवी की आस्था को व्यक्त करता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त अपने जीवन में आने वाले संकटों से उबरने में सक्षम होते हैं और आत्म-विश्वास बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, यह भजन मन को शांत और स्थिर करने में सहायता करता है, जिससे ध्यान में और अधिक गहराई प्राप्त होती है। देवी की कृपा के माध्यम से भक्त अपने दुखों को भी आसानी से सहन कर पाते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का श्रवण या उच्चारण सुबह या शाम को किया जा सकता है। भक्त को साफ़ मन और श्रद्धा के साथ इस भजन का जप करना चाहिए। भजन सुनते समय दीया जलाना और देवी को फूल चढ़ाना शुभ रहता है। सही मुद्रा में बैठकर, मानसिक एकाग्रता के साथ भजन का जप करना विशेष प्रभावकारी होता है। इस विशेष पूजा में भक्त को अपने हृदय की गहराइयों से देवी को आवाज़ देकर उनके प्रति भक्ति प्रकट करनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ से मार्गदर्शन माँगना है। भक्त माँ से निरंतर सलाह और सहायता की कामना करता है।

इस भजन को गाने का सही समय कौन सा है?

इस भजन को सुबह की आरती के समय या संध्या के समय गाना सर्वोत्तम होता है, जिससे देवी की कृपा जल्दी प्राप्त की जा सके।

क्या इस भजन के माध्यम से मानसिक परेशानियों पर काबू पाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन का श्रवण करने से मानसिक शांति और आत्म-संकल्प में वृद्धि होती है, जो मानसिक परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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