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भोले तेरा नाम लेकर मारते चिलम (Bhole Tera Naam Lekar Maarte Chilam Lyrics in Hindi) - by Shekhar Jaiswal Bholenath Bhajan - Bhaktilok

147 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोलेनाथ की महिमा: चिलम और भक्ति का संगम

भोलेनाथ की कृपा से समस्त दुखों का नाश होता है, यह भजन श्रद्धा और भक्ति की प्रेरणा देता है।

भोले तेरा नाम लेकर मारते चिलमहर कश पे सांसे मेरी बोले बम बम नाम लेकर बाबा तेरा मीटता है गमभोले भोले बोले मेरा हर एक अंग भोले तेरा नाम लेकर मारते चिलमहर कश पे सांसे मेरी बोले बम बम भोले बाबा तेरे तो शौक निराले हैं भांग कहीं चिलम कहीं विष के प्याले हैं उसमें ही बाबा मेरी दुनिया समाई थी उस से शुरू और उस से खत्म भोले तेरा नाम लेकर मारते चिलमहर कश पे सांसे मेरी बोले बम बम साथ तेरा दूंगी बोली जब तक दम उसके दरस को तरस गए हम दिल कहीं बाबा मेरा लगता नहीं तुम जो मिले तो मिट सारे गम भोले तेरा नाम लेकर मारते चिलमهر कश पे सांसे मेरी बोले बम बम नाम लेकर बाबा तेरा मीटता है गम भोले भोले बोले मेरा हर एक अंग भोले बम बम भोले बम बम भोले बम बम भोले बम बम भोले बम बम भोले बम बम...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भोलेनाथ (शिव) के प्रति भक्त का असीम प्रेम और आस्था प्रकट की गई है। भक्त अपने कष्टों को दूर करने हेतु भोलेनाथ का नाम लेकर उत्साह से जलता है। जैसे कि कहते हैं, 'हर कश पे सांसे मेरी बोले बम बम', इस पंक्ति से साधक का भाव प्रकट होता है कि वह हर सांस में भगवान का नाम लेता है। यहाँ बाबा का नाम लेने से उसे दुःख और कष्टों से मुक्ति तथा आनंद की अनुभूति होती है। भोलेनाथ के प्रति भक्त का यह अटूट निष्ठा दर्शाता है कि इनका नाम उसके लिए उपचार और प्रेम का सच्चा स्रोत है।

भावार्थ का दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इस भजन में भक्त की मनोदशा अत्यंत गहरी है। 'साथ तेरा दूंगी बोली जब तक दम' का अर्थ है कि भक्त भोलेनाथ के साथ हर हाल में रहना चाहता है। उसके लिए भोलेनाथ का दर्शन सबसे महत्वपूर्ण है। इस पंक्ति से भक्त की आशा और प्रेम झलकता है। साथ ही, 'दिल कहीं बाबा मेरा लगता नहीं', यह दर्शाता है कि जब तक पारंपरिक रूप से शिव का संयोग नहीं हो जाता, तब तक दिल को सुकून नहीं मिलता। यह भक्त की अंदरूनी yearning को दर्शाता है।

इस भजन की गूढ़ता में भक्ति मार्ग की अनंत गहराई छिपी हुई है। भक्त जो भक्ति के मार्ग पर चलता है, वह अपने जीवन को शिव का अर्पण करता है। 'उससे शुरू और उस से खत्म' का आशय है कि शिव ही जीवन का आरंभ और अंत है, जो संपूर्ण सृष्टि का पर्याय है। यह दर्शाता है कि शिव न केवल मानसिक शांति का स्रोत है, बल्कि जीवन की सम्पूर्णता का प्रतीक भी है। स्वयं से शिव तक की यात्रा में श्रद्धा, प्रेम, और भक्ति का सही माहौल तैयार होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व ना केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में भी है। भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान शिव को हमेशा संहारक और रचनात्मकता का प्रतीक माना गया है। शिव के विभिन्न स्वरूपों को देख, भक्त उनके प्रति भक्ति रखते हैं, एवं उनके निकट आने के लिए भजन एवं स्तुति करते हैं। शिव पुराण में भी शिव के उपासना और भक्ति की महानता को दर्शाया गया है। रामायण और महाभारत में भी शिव की कृपा का उल्लेख मिलता है, जिसका प्रभाव भक्तों की जीवन में देखा जा सकता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का प्रतिदिन गाना मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरूकता का स्रोत होता है। यह भक्ति में डूबकर भक्त को अपने जीवन के कष्टों को भुलाने और खुशी प्राप्त करने में मदद करता है। नियमित रूप से इसे गाने से देवता की कृपा प्राप्त होती है, जिससे भक्त का जीवन सुखी और सफल बनता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय करना अधिक लाभदायक होता है। पूजा के समय एक दीपक जलाना और भगवान शिव को भांग या बिल्व पत्र का अर्पण करना चाहिए। सही ध्यान मुद्रा में बैठकर, भक्त को केवल भोलेनाथ के नाम का संकल्प लेते हुए इस भजन का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से मन भी एकाग्र होता है और ध्यान में गहराई आती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का विशेष समय है?

इस भजन का जाप सुबह के समय करना विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि सुबह की शांति में भक्ति की गहराई प्राप्त होती है।

क्या इस भजन के साथ कोई विशेष पूजा विधि है?

इस भजन के साथ संकेतिक पूजा में भोलेनाथ को भांग और बिल्व पत्र अर्पित करने का महत्व है, जो शिव की कृपा को आकर्षित करने में सहायक होता है।

क्या ये भजन केवल शिव भक्तों के लिए है?

हालांकि यह भजन मुख्यतः शिव भक्तों के लिए है, लेकिन इसका आनंद सभी भक्त भी ले सकते हैं, जो किसी भी रूप में श्रद्धा रखते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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