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Matarani Bhajan

बड़ी प्यारी लागे (Badi pyari lage Lyrics in Hindi) - by Rajiv Krishan Gandhi Matarani Bhajan - Bhaktilok

271 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा की भक्ति: बड़ी प्यारी लागे

इस भजन में माँ दुर्गा की दिव्य छवि का वर्णन है, जो भक्तों के कठिन चनों को दूर करती हैं।

 बड़ी प्यारी लागे (Badi pyari lage Lyrics in Hindi) -सज धज के घर मेरे आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे,शेर सवार होके आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे...चंदा के जैसी बिंदिया है माँ की नाक की नथनी तारो के जैसी,कानो में झुमके हाथो में चूड़ागले में हार साजे नैनो में कजरा,सोलह श्रृंगार करके आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे...हाथो में मेहँदी शस्त्र सजाये शेर पे बैठी मैया मुस्काये,पेरो में पायल छन छन बजेगी मैया सभी के संकट हरेगी,दर्शन देने आज आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे....लाल चुनरिया सर पे सजा के सिंह पे सवार हो आयी गुफा से,मैया के चरणों से शीश झुका के राजीव हुआ धन्य दर्शन पाके,झोली सभी की भरने आयी है माँ बड़ी प्यारी लागे बड़ी सोनी लागे..||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'बड़ी प्यारी लागे' में माँ दुर्गा की सुंदरता और करुणामय स्वरूप का चित्रण किया गया है, जो भक्तों की जीवन में आशा और साहस का प्रतीक हैं। 'सज धज के घर मेरे आयी है माँ' से भक्त की प्रेमभावना प्रकट होती है, जो माँ के प्रति श्रद्घा और समर्पण का संकेत है। माँ की सुकोमल और मनमोहक छवि को 'बड़ी सोनी लागे' से दर्शाया गया है, जिसमें उनकी रूप-सौंदर्य की प्रशंसा होती है। आगे वर्णित है कि माँ 'शेर सवार होके आयी है', यह संकेत है कि माँ केवल सजीव रूप में नहीं, बल्कि अदृश्य स्वरूप में भी हमारे संकटों का निवारण करती हैं। 'चंदा के जैसी बिंदिया' और 'नथनी तारो के जैसी' जैसी उपमाएं उनकी आंतरिक दिव्यता को उजागर करती हैं। इस प्रकार भजन में माँ की गरिमा, शक्ति और सौंदर्य का अद्वितीय सम्मिलन देखने को मिलता है।

भावार्थ के दृष्टिकोण से, 'माँ की सवारी शेर' दर्शाता है कि माँ दुर्गा केवल सौम्य नहीं, बल्की शक्तिशाली भी हैं। उनके यशस्विता केवल आस्था से ही नहीं, बल्कि उनके साहसिक deeds से भी प्रकट होती है। 'मेहँदी शस्त्र सजाये' यह दर्शाता है कि माँ की शक्ति सजग और सजाया हुआ है, जब वे भक्तों की रक्षा करने आती हैं। इस भजन में माँ का दर्शन भक्तों के लिए एक पवित्र अनुभव है, जो उन्हें कठिनाईयों से निर्भय कर देती है। भक्त की अंतर्मन से निकली भावना 'दर्शन देने आज आयी है' इस बात का प्रमाण है कि माँ का प्रेम सदैव अपने भक्तों के साथ होता है और उनकी प्रार्थनाएँ सदा सुनी जाती हैं। यह भजन माँ की उपासना में डूबते हुए भक्त की भावनाओं को उभारता है।

भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) की दृष्टि से, 'बड़ी प्यारी लागे' एक प्रभावी साधना है। इस भजन में माँ दुर्गा केवल एक देवी नहीं, वरन एक मातृस्वरूप भी हैं, जिन्हें भक्त माँ कहकर संबोधित करते हैं। इस विचार से भक्ति का भाव और भी गहरा हो जाता है। 'लाल चुनरिया सर पे सजाकर' यह दर्शाता है कि भक्त ने माँ की सेवा में पूरी तरह से समर्पित किया है। भक्ति का अर्थ केवल श्रद्धा में लीन होना नहीं, बल्कि इस अनुभव को जीना भी है। इस प्रकार, यह भजन भक्तों को अपने जीवन में जिस आस्था और शक्ति की आवश्यकता होती है, उसे प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में गहराई से जुड़ा है। देवी दुर्गा का महत्व 'माँ' के रूप में तथा 'शक्ति' के प्रतीक के रूप में निरूपित होता है। देवी दुर्गा का उल्लेख विभिन्न पुराणों, जैसेकि देवी भागवत एवं महाभारत में मिलता है। यह भजन इस बात का प्रमाण है कि दुर्गा केवल युद्ध और विजय की देवी नहीं, बल्कि संजीवनी भी हैं, जो भक्तों के दुखों का निवारण करती हैं। उनका यह स्वरूप संपत्ति और सुख का प्रतीक भी है, जो भक्तों को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, आत्म-विश्वास, और दृढ़ता में वृद्धि करता है। भक्त जब इस भजन को गाते हैं, तो उनमें से संकटों की चिंता समाप्त होती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने से भक्तों को मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करता है, जिससे उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह के समय एक उपयुक्त समय है, जब वातावरण आनंदमयी होता है। दीप जलाकर तथा फूलों का अर्पण कर भजन का समर्पण करने से ये कृपाएँ और भी बढ़ जाती हैं। ध्यान मुद्रा में बैठकर, मन को शुद्ध रखते हुए इस भजन का गान करना, भक्त को माँ की कृपा का अनुभव करा सकता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन माँ दुर्गा को समर्पित है, जो शक्ति, साहस और सौंदर्य की देवी मानी जाती हैं। उनकी उपासना में यह भजन भक्तों की रक्षा और सहायता का प्रतीक है।

भजन में 'शेर सवार' का क्या अर्थ है?

'शेर सवार' माँ दुर्गा की शक्ति का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि वह केवल प्रेम और करुणा नहीं, बल्कि युद्ध की देवी भी हैं, जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

इस भजन का मानसिक लाभ क्या है?

इस भजन के प्रति आस्था रखने से भक्त को मानसिक शांति, आत्म-विश्वास और संकटों से निवारण का अनुभव होता है। यह उन्हें जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखने में मदद करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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