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श्री महालक्ष्मी अष्टकम (Shri Mahalakshmi Ashtakam Lyrics in Hindi) - Navaratri Special Bhajan - Bhaktilok

134 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महालक्ष्मी की कृपा: समृद्धि का स्तोत्र

महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करें और समृद्धि, शांति तथा खुशियों की प्राप्ति करें।

 श्री महालक्ष्मी अष्टकम (Shri Mahalakshmi Ashtakam Lyrics in Hindi) - नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि ।सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ २ ॥सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि ।सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि ।योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ५ ॥स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे ।महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि ।परमेशि जगन्मातः महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते ।जगत्स्थिते जगन्मातः महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ॥ ८ ॥फलश्रुति:- महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रम् यः पठेद्भक्तिमान्नरः ।सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९ ॥एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥ १० ॥त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥ ११ ॥इति श्री महालक्ष्म्यष्टकम् ॥*** Singer : Kamlesh Upadhyay ***

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री महालक्ष्मी अष्टकम का प्रमुख आधार देवी महालक्ष्मी की स्तुति और उनके गुणों का वर्णन है। इस स्तोत्र में, पहले श्लोक में देवी को 'महामाया' कहा गया है, जो पूर्णता और शक्ति का प्रतीक है। जैसे 'शङ्खचक्रगदाहस्ते' की उपाधि देवी के दिव्य रूप और असीम शक्तियों को प्रकट करती है। वे समस्त संकटों और पापों से रक्षा करती हैं; इसीलिए उन्हें 'सर्वपापहरे' कहा गया है। इस स्तोत्र में यह भी वर्णन है कि वे भुक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करती हैं, जो मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य है। इसके साथ ही, 'योगजे योगसम्भूते' से यह अभिप्राय है कि देवी योग की शक्ति से जन्मी हैं और उन्हें प्राप्त करना मानवता के लिए सरल है। यहाँ पर तीनों कालों में पाठ करने का महत्व भी बताया गया है, जिससे भक्त की साधना में वृद्धि होती है, और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है।

भक्तों की भावनाएँ इस स्तोत्र में गहराई से झलकती हैं। देवी महालक्ष्मी, जो संपूर्णता और समृद्धि की धारण करती हैं, भक्तों को अपने सभी दुःखों से मुक्ति देने का वचन देती हैं। 'महान' की उपाधियाँ इस बात को दर्शाती हैं कि वे सिर्फ एक देवी नहीं, बल्कि एक सर्वव्यापी शक्ति हैं। भक्तों की प्रार्थनाएँ जब सच्ची मन से की जाती हैं, तो महालक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति को दुनिया की समृद्धि और ज्ञान प्राप्त होता है। यह अष्टकम, प्रेम और भक्ति की एक छवि प्रस्तुत करता है, जिसमें भक्त अपनी सभी आशाएँ और आकांक्षाएँ देवी को अर्पित करता है। महालक्ष्मी की आराधना करते हुए, भक्त को साधना और समर्पण का भाव रखना चाहिए।

इस स्तोत्र का theological महत्व यह है कि यह भक्ति मार्ग का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसमें भक्त की सरलता और विश्वास प्रकट होता है। 'सर्वज्ञे सर्ववरदे' के माध्यम से यह बताया गया है कि देवी महालक्ष्मी समस्त ज्ञान की धारण करती हैं। हर भक्त को यह समझना चाहिए कि देवी की भक्ति में न केवल भौतिक समृद्धि का लाभ है, बल्कि आत्मिक विकास और मुक्ति का मार्ग भी है। यह भक्ति का मार्ग हमे सिखाता है कि दान, संतोष और अहंकार का त्याग आवश्यक है। इस प्रकार, महालक्ष्मी अष्टकम हमें जीवन के समस्त पहलुओं में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

महालक्ष्मी अष्टकम का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व विशेष है, जैसा कि यह धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर पुराणों में वर्णित है। देवी महालक्ष्मी को लक्ष्मी पुराण, विष्णु पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में समृद्धि और भौतिक सुखों की देवी माना गया है। देवी की पूजा का संदर्भ हमें हिंदू धर्म की जड़ों में मिलता है, जहाँ देवी को घर की देवी माना जाता है। यह अष्टकम नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है, जो कि देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का त्योहार है। इसके माध्यम से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए देवी महालक्ष्मी की कृपा की प्रार्थना करते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित पाठ करने से कई मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। मानसिक दृष्टि से, इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन में शांति और संतोष आता है। शारीरिक स्तर पर, यह रोग दूर करने और स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करता है। आध्यात्मिक रूप से, इससे भक्त को आंतरिक शांति, ध्यान की गहराई और कल्याणकारी ज्ञान की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ सुबह मौसम के अनुसार या संध्या के समय करना शुभ होता है। पूजा के समय पहले एक स्वच्छ स्थान पर आसन बिछाएँ, और उसके बाद एक दीपक जलायें तथा देवी को पुष्प अर्पित करें। मन में सकारात्मकता और श्रद्धा के साथ पाठ करें। समर्पण और भक्तिभाव में ध्यान केंद्रित करें, जिससे देवी की कृपा शीघ्र प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ सुबह या शाम के समय करना चाहिए, खासकर नवरात्रि में इसकी विशेष पूजा होती है।

क्या महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ने से धन की प्राप्ति होती है?

हाँ, इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से धन एवं समृद्धि की प्राप्ति के लिए देवी महालक्ष्मी की कृपा होती है।

इस अष्टकम के पाठ करने का प्रभाव क्या है?

यह पाठ मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास में सहायक है, जिससे भक्त को सर्वांगिण लाभ मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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