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Shankar Ji Main Aapke Bete Ka Yaar Hoon Lyrics (Shiv Bhajan) – शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ

246 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ

(Shankar Ji Main Aapke Bete Ka Yaar Hoon) – Mahashivratri Special Bhajan 2026 by Krish Mondal
🎤 गायक: Krish Mondal ✍️ गीतकार एवं संगीतकार: Priyanka R Bala 🏷️ लेबल: RDC Melodies

तीन आँख हैं आपके और शीश पे चंदा रहता है

बालों से गंगा निकलती है मुझे ऐसा गणपति कहता है.. x2

कैलाश पे यही देखने आया इस बार हूँ..

कैलाश पे यही देखने आया इस बार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

ऊँचे पर्वत पे रहते हैं कैलाश के वासी हैं

नंदी पर बैठ के जाते जब जाते काशी हैं

साँप गले में रहते हैं पर उनको डसते नहीं

गन्नू कहता मेरे पापा भूतों से डरते नहीं

गणपति जितना आपसे मैं भी करता प्यार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

एक हाथ त्रिशूल एक से डमरू बजता है

शीश पे आपके चंदा और भी सुंदर लगता है

अरे नीले नीले कंठ आपके सबसे न्यारे हैं

सच्ची में हाय शंकर जी आप कितने प्यारे हैं

दोस्त बनोगे क्या मेरे मैं तो तैयार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ...

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह महाशिवरात्रि 2026 स्पेशल भजन भगवान शिव (शंकर जी/महादेव) के प्रति मासूम, बच्चे जैसी भक्ति और दोस्ती का भावपूर्ण गान है। गायक खुद को "गणपति का यार" बताते हुए शिव के दिव्य रूप (तीन आँखें, जटा में गंगा, चंदा, त्रिशूल, डमरू, नीला कंठ, साँप, नंदी सवारी) की प्रशंसा करता है और कैलाश पर जाकर उन्हें "दोस्त" बनाने की इच्छा जताता है। संदेश है: शिव भक्ति सरल, निश्छल और प्रेमपूर्ण हो सकती है – जैसे बच्चा पिता से दोस्ती करता है, वैसे ही भक्त महादेव से आत्मीय संबंध बना सकता है। "हर हर महादेव" की भावना के साथ यह भजन दिल में श्रद्धा और सकारात्मकता भरता है।

कृष मोंडल की मधुर आवाज़ में यह भजन शिव भक्तों के लिए विशेष उपहार है।

🎵 गायक: कृष मोंडल (Krish Mondal)

कृष मोंडल युवा भजन गायक हैं, जिनकी भावपूर्ण आवाज़ ने कई शिव भजनों को लोकप्रिय बनाया है। प्रियंका आर बाला के बोल और संगीत में यह 2026 महाशिवरात्रि स्पेशल ट्रैक RDC Melodies द्वारा जारी किया गया है। यह भजन शिव भक्तों को शिव के साथ "दोस्ती" के अनोखे भाव से जोड़ता है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "Shankar Ji Main Aapke Bete Ka Yaar Hoon Lyrics (Shiv Bhajan) – शंकर जी मैं आपके बेटे का यार हूँ" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 03 Sep 2026

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