मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
साईं बाबा षेज आरती लिरिक्स (Sai Baba Shej Aarti Lyrics in Hindi) -
ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।
पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥
निर्गुणाचीस्थिति कैसि आकारा आली बाबा आकारा आली ।
सर्वाघटी भरूनि उरली सायी मा ऊली ॥
ओवालु आरती माझ्या सद्गुरुनाथा माझा सायिनाथा ।
पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥
रजतमसत्वतिघेमाया प्रसावली बाबा मायाप्रसावली ।
माये चीया पोटी कैसी माया उद्भवली ॥
ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।
पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥
सप्त सागरी कैसा खेल माण्डिला बाबा खेल माण्डिला ।
खेलूनीया खेल अवघा विस्तारकेला ॥
ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।
पाञ्चाही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥
ब्रह्माण्डीची रचना कैसी दाखविली डोला बाबा दाखविलीडोला ।
तुकाह्मणे माझा स्वामी कृपालू भोला ॥
ओवालु आरती माझ्या सद्गुरु नाथा माझा सायिनाथा ।
पाञ्चही तत्त्वाञ्चा दीप लाविला आता ॥
आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।
सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।
आरति ज्ञान राजा ।
लोपले ज्ञान जागी । हित नेणति कोणी ।
अवतार पाण्डुरङ्गा । नाम ठेविले ज्ञानी ।
आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।
सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।
आरति ज्ञान राजा ।
कनकाचे ताटकारी । उभ्या गोपिकानारी ।
नारद तुम्बरहो । साम गायक करी ।
आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।
सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।
आरति ज्ञान राजा ।
प्रगट गुह्यबोले । विश्वब्रह्मचि केले ।
राम जनार्दनी । पायि मस्तक ठेविले ।
आरति ज्ञान राजा । महा कैवल्यतेजा ।
सेविति साधु सन्ता । मनु वेधल माझा ।
आरति ज्ञान राजा ।
आरति तुकरामा । स्वामि सद्गुरु धामा ।
सच्चिदानन्दमूर्ती । पाय दाखनि आह्मा ।
आरति तुकरामा ।
राघवे सागराता । पाषाण तारीले ।
तैसेतु कोबाचे । आभङ्ग रक्षीले ।
आरति तुकरामा । स्वामि सद्गुरु धामा ।
सच्चिदानन्दमूर्ती । पाय दाखनि आह्मा ।
आरति तुकरामा ।
तूकी ततुलनेसि । ब्रह्म तुकासि आले ।
ह्मणोनि रामेश्वरे । चरणि मस्तक ठेविले ।
आरति तुकरामा । स्वामि सद्गुरु धामा ।
सच्चिदानन्दमूर्ती । पाय दाखनि आह्मा ।
आरति तुकरामा ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
रञ्जविसी तू मधुर बोलुनी माय जशी निजमुलाहे ॥
भोगिसि व्याधी तू चहरुनिया निजसेवकदुःखालाहो ॥
धावुनिभक्त व्यसन हरीसी दर्शन दे शीत्या लाहो ॥
झाले असतिल कष्ट अतीशयतुमचे यादे हाल हो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
क्षमाशयन सुन्दर ही शोभासुमन शेजत्या परीहो ॥
घ्यावी धोडीभक्त जनाञ्ची पूजनादि सा करीहो ॥
ओवालीतो पञ्चप्राण ज्योती सुमती करीहो ॥
सेवा किङ्कर भक्त प्रीति अत्तर परिमल वारिहो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
सोडुनि जाया दुःखवाटते बाबाञ्चा चरणासिहो
सोडुनि जाया दुःखवाटते सायीञ्चा चरणासिहो
आज्ञेस्तवहा आशिर प्रसाद घेवुनि निजसदनासिहो ॥
जातो आता येवु पुनरपि तवचरणाचे पाशिहो ॥
उदवूतु जलासायि मावुले निजहित सादायासिहो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
आलवितो सप्रेमे तुजला आरति घेवुनि करीहो ।
जैजै सायिनाथ आता पहुडावे मन्दिरी हो ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
वैराग्याचा कुञ्च घेवुनि चौक झाडिला बाबा चौकझाडिला ।
तयावरी सुप्रिमाचा शिडकावादिधला ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
पायघड्याघातल्या सुन्दर नवविधा भक्ति बाबा नवविधा भक्ती ।
ज्ञानाञ्च्या समयालावुनि उजलल्याज्योति ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
भावार्था चा मञ्चक हृदयाकाशी टाङ्गिला हृदयाकाशी टाङ्गिला
मनाचि सुमने करूनि केलेशेजेला ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
द्वैताचे कपाटलावुनि एकत्रकेले बाबा एकत्रकेले ।
दुर्बुद्दीञ्च्या गाण्ठी सोडुनि पडदे सोडिले ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
आशा तृष्णा कल्पनेचा सोडुनि गल्बला बाबा सोडुनि गल्बला ।
दया क्षमा शान्ति दासी उभ्य़ासेवेला ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
अलक्ष उन्मनी घेवुनि नाजुक दुश्शाला बाबा नाजुक दुश्शाला ।
निरञ्जन सद्गुरु स्वामि निजविलशेजेला ।
अता स्वामी सुखेनिद्रा करा अवधूता बाबा करा सायिनाथा ।
चिन्मय हे सुखदाम जावुनि पहुडा एकान्ता ।
सद्गुरु सायिनाथ महराज की जै ।
श्री गुरुदेव दत्त ।
पाहे प्रसादा चीवाट। द्यावेदु ओनिया ताटा ।
शेषा घेवुनी जा ईल। तुमचे झालिया भोजन ।
झालो एकसवा। तुह्म आलं विया देवा ।
शेषा घेवुनी जा ईल। तुमचे झालिया भोजन ।
तुकाह्मणे चित्ता करुनि ॥ राहीलो निवाण्टा ।
तुकाह्मणे चित्ता करुनि ॥ राहीलो निवाण्टा ।
शेषा घेवुनी जा ईल। तुमचे झालिया भोजन ।
पावला प्रसाद आता विठोनिजावे बाबा आता निजावे ।
आपुलातो श्रम कलौ य़ेतसे भावे ।
अता स्वामी सुखे निद्राकरा गोपाला बाबा सायी दयाला ।
पुरले मनोरथा जातो अवुल्य़ास्थला ।
तुह्मासी जागावु आह्मी आपुल्या चाडा बाबा आपुल्य़ा चाडा ।
शुभाशुभ कर्मे दोष हरावया पीडा ।
अता स्वामी सुखे निद्राकरा गोपाला बाबा सायी दयाला ।
पुरले मनोरथा जातो अवुल्य़ास्थला ।
तुकाह्मणे दिधिले उच्चिष्टाचे भोजन उच्छिष्टाचे भोजन ।
नाहि निवडिले आह्म आपुल्याभिन्न ।
अता स्वामी सुखे निद्राकरा गोपाला बाबा सायी दयाला ।
पुरले मनोरथा जातो अवुल्य़ास्थला ।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "साईं बाबा षेज आरती लिरिक्स (Sai Baba Shej Aarti Lyrics in Hindi) - Shirdi Sai Baba Shej Aarti - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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