Agni Gayatri Mantra सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

रेहम नजर करो अब मोरे साई लिरिक्स (Rahem Nazar Karo Ab More Sai Lyrics in Hindi) - By Alka Yagnik Sai Bhajan

अलका याग्निक द्वारा गाए प्रसिद्ध साईं भजन 'रेहम नजर करो अब मोरे साई' के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। बाबा की भक्ति में लीन होने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शिरडी के परम पूज्य संत श्री साईं बाबा के चरणों में समर्पित भजन "रेहम नजर करो अब मोरे साई" (Rahem Nazar Karo Ab More Sai) एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी प्रार्थना है। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याग्निक जी की मधुर और भक्तिमयी आवाज में गाया गया यह भजन श्रोताओं को सीधे शिरडी के पावन वातावरण और बाबा की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कराता है। इस भजन का मुख्य भाव पूर्ण शरणागति (Surrender), करुणा की याचना और आध्यात्मिक जागृति है। जब एक भक्त सांसारिक मोह-माया और जीवन के संघर्षों से थककर ईश्वर की शरण में जाता है, तब उसके हृदय से ऐसी ही करुणा पुकार निकलती है। यह भजन न केवल साईं भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, बल्कि यह भारतीय भक्ति संगीत की उस समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है जहां भाषा और संप्रदाय की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं और केवल शुद्ध प्रेम शेष रहता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

रेहम नजर करो अब मोरे साई लिरिक्स

रेहम नजर करो अब मोरे साई।
तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई॥

मैं अँधा हूँ बंदा तुम्हारा।
मैं ना जानू आल्हा इलाही॥
रेहम नजर करो अब मोरे साई।
तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई॥

खाली ज़माना मैंने गवाया।
साथी आखिर का किया न कोई॥
रेहम नजर करो अब मोरे साई।
तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई॥

अपने मजीद का झाड़ू घनोह है।
मालिक हमारे तुम बाबा साई॥
रेहम नजर करो अब मोरे साई।
तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई॥

साई मंजिल है बांवरा है राही।
जीने की राह दिखा दे ओ साई॥
रेहम नजर करो अब मोरे साई।
तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द गहरे आध्यात्मिक अर्थ और भक्ति रस से सराबोर है। यहाँ भक्त अपने आराध्य साईं बाबा से प्रार्थना कर रहा है कि वे अपनी दया दृष्टि (रेहम नजर) उस पर बनाए रखें। संसार में जीव स्वयं को अकेला पाता है और अंततः उसे समझ आता है कि इस नश्वर संसार के सभी रिश्ते-नाते क्षणभंगुर हैं। केवल सद्गुरु ही सच्चे माता, पिता और बंधु हैं।

भक्त अपनी अज्ञानता को स्वीकार करते हुए कहता है कि वह आध्यात्मिक रूप से अंधा है और उसे धर्म, संप्रदाय, अल्लाह या ईश्वर के बीच के भेदों का कोई ज्ञान नहीं है। वह केवल अपने बाबा को जानता है। उसने अपना पूरा जीवन सांसारिक सुखों और व्यर्थ के कार्यों में गंवा दिया है और अंत समय के लिए कोई आध्यात्मिक संचय या सच्चा साथी (पुण्य कर्म) अर्जित नहीं किया है। अंत में, वह बाबा की मस्जिद (द्वारकामाई) की सेवा करने की इच्छा व्यक्त करता है और बाबा को ही अपना अंतिम गंतव्य (मंजिल) मानते हुए जीवन का सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन साईं भक्ति परंपरा का एक अनमोल रत्न है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सर्वधर्म समभाव का संदेश: भजन में "आल्हा इलाही" और "मजीद" (मस्जिद) जैसे शब्दों का प्रयोग साईं बाबा के उस महान संदेश को रेखांकित करता है जिसमें उन्होंने "सबका मालिक एक" का सिद्धांत दिया था।
  • आत्म-समर्पण (शरणागति): इसमें भक्त अपने अहंकार को पूरी तरह से शून्य कर देता है और स्वयं को "अँधा बंदा" कहकर बाबा के चरणों में समर्पित कर देता है।
  • अलका याग्निक का दिव्य गायन: अलका याग्निक जी की सुरीली और शांत आवाज इस भजन को एक ध्यानमयी अवस्था प्रदान करती है, जिससे सुनने वाले का मन शांत और अंतर्मुखी हो जाता है।
  • सद्गुरु की महिमा: यह भजन इस बात की पुष्टि करता है कि बिना सद्गुरु के मार्गदर्शन के जीव इस संसार रूपी भवसागर को पार नहीं कर सकता।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए सभी समय शुभ हैं, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

  • गुरुवार की विशेष पूजा: गुरुवार का दिन गुरु आराधना और साईं बाबा की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन सुबह या संध्याकाल में बाबा की धूप-आरती के समय इस भजन को सुनना या गाना अत्यंत शुभ होता है।
  • ध्यान और साधना के समय: मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए सुबह ब्रह्ममुहूर्त में इस भजन का श्रवण करने से मन एकाग्र होता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा (Faith) और सबुरी (Patience) का भाव होना चाहिए। बाबा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाकर, शांत चित्त से बैठकर इसका गायन करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन शिरडी के श्री साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा को दत्तात्रेय का अवतार और एक महान सिद्ध पुरुष माना जाता है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिरडी में एक फकीर के रूप में व्यतीत किया। उन्होंने कभी भी जाति, धर्म या संप्रदाय के आधार पर मनुष्यों में भेद नहीं किया। उनके दरबार में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समान रूप से आते थे। बाबा ने लोगों को प्रेम, करुणा, दान, संतोष और आंतरिक शुद्धि का मार्ग दिखाया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि शिरडी की पारंपरिक प्रार्थनाओं और सूफी-भक्ति आंदोलन से जुड़ी हुई है। शिरडी में बाबा के जीवनकाल के दौरान और उनके महासमाधि लेने के बाद भी, द्वारकामाई मस्जिद में इसी प्रकार के भक्ति गीतों और कव्वालियों का गायन होता था। अलका याग्निक जी द्वारा गाए गए इस आधुनिक संस्करण ने इस पारंपरिक प्रार्थना को घर-घर तक पहुँचाया है। इसकी सरल शब्दावली सीधे हृदय को छूती है और भक्त को बाबा के ऐतिहासिक निवास स्थान शिरडी की याद दिलाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अवधी, हिंदी और उर्दू (सूफी शब्दावली) का एक सुंदर मिश्रण है। इसे "साधुक्कड़ी" या "हिंदुस्तानी" भाषा की श्रेणी में रखा जा सकता है, जो आम जनमानस के लिए अत्यंत सुगम है।

  • प्रतीकात्मकता: "अँधा हूँ" शब्द का प्रयोग शारीरिक अंधेपन के लिए नहीं, बल्कि अज्ञानता और माया के आवरण के लिए किया गया है।
  • रूपक अलंकार: "बांवरा है राही" में मानव मन की चंचलता और भटकाव को एक पागल राही के रूप में दर्शाया गया है।
  • काव्य रस: इस भजन में मुख्य रूप से 'शांत रस' और 'करुण भक्ति रस' का परिपाक हुआ है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य के भीतर 'मैं' और 'मेरा' का भाव रहता है, तब तक वह ईश्वर को नहीं पा सकता। स्वयं को "अँधा बंदा" मानना परम विनम्रता का प्रतीक है।
  2. समय का सदुपयोग: "खाली ज़माना मैंने गवाया" हमें सचेत करता है कि जीवन का अमूल्य समय केवल भौतिक सुखों के अर्जन में नष्ट नहीं करना चाहिए, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी प्रयास करना चाहिए।
  3. सच्चा संबंध केवल ईश्वर से है: सांसारिक रिश्ते अस्थायी हैं, केवल ईश्वर ही आदि और अंत का साथी है।
  4. सेवा भाव: "मजीद का झाड़ू घनोह है" का अर्थ है कि ईश्वर के घर की सेवा करना, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध करती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
रेहम नजर दया दृष्टि / कृपादृष्टि ईश्वर की वह कृपा जो भक्त के पापों का नाश करती है।
मोरे साई मेरे साईं बाबा आराध्य के प्रति अपनत्व और प्रेम का भाव।
बंदा सेवक / दास ईश्वर के सम्मुख जीव की लघुता और समर्पण।
आल्हा इलाही अल्लाह / ईश्वर / परमात्मा परम सत्य जो सभी धर्मों से परे और एक है।
खाली ज़माना व्यर्थ गंवाया गया जीवन सांसारिक मोह-माया में नष्ट हुआ समय।
मजीद का झाड़ू मस्जिद की सफाई / सेवा मन के विकारों को दूर करने और सेवा भाव का प्रतीक।
बांवरा राही भटका हुआ मुसाफिर संसार में भटकती हुई जीवात्मा।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "रेहम नजर करो अब मोरे साई, तुम बिन नहीं मोरे माँ बाप भाई"
भावार्थ: हे मेरे साईं बाबा! अब मुझ पर अपनी दया की दृष्टि डालिए। इस संसार में आपके अतिरिक्त मेरा कोई सच्चा रक्षक, माता, पिता या भाई नहीं है। आप ही मेरे सर्वस्व हैं।

पंक्ति: "मैं अँधा हूँ बंदा तुम्हारा, मैं ना जानू आल्हा इलाही"
भावार्थ: मैं अज्ञानता के अंधकार में डूबा हुआ आपका एक साधारण सेवक हूँ। मैं शास्त्रों के जटिल ज्ञान, मजहबों के अंतर और अल्लाह या ईश्वर के भेदों को नहीं जानता। मैं तो बस आपकी शरण में आना जानता हूँ।

पंक्ति: "खाली ज़माना मैंने गवाया, साथी आखिर का किया न कोई"
भावार्थ: मैंने अपने जीवन का बहुमूल्य समय व्यर्थ के सांसारिक प्रपंचों में नष्ट कर दिया। मैंने कोई ऐसा सत्कर्म या आध्यात्मिक संचय नहीं किया जो मृत्यु के पश्चात परलोक में मेरा साथ दे सके।

पंक्ति: "अपने मजीद का झाड़ू घनोह है, मालिक हमारे तुम बाबा साई"
भावार्थ: हे बाबा! आपकी पावन मस्जिद (द्वारकामाई) की सेवा करना ही मेरा परम सौभाग्य है। आप ही हमारे एकमात्र स्वामी और मालिक हैं।

पंक्ति: "साई मंजिल है बांवरा है राही, जीने की राह दिखा दे ओ साई"
भावार्थ: मेरी आत्मा रूपी राही इस संसार में भटक रहा है और आप ही मेरी अंतिम मंजिल हैं। कृपा करके मुझे इस जीवन को सही ढंग से जीने का मार्ग दिखाइए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

साईं बाबा की आराधना करते समय इस प्रसिद्ध साईं गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

॥ श्री साईं गायत्री मंत्र ॥

ॐ शिरडी वासाय विद्महे, सचिदानंदाय धीमहि, तन्नो साईं प्रचोदयात।

यह मंत्र साधक के मन को शांति प्रदान करता है और बाबा के चरणों में भक्ति को सुदृढ़ करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम रेहम नजर करो अब मोरे साई (Rahem Nazar Karo Ab More Sai)
समर्पित देवी-देवता शिरडी के साईं बाबा (Shirdi Sai Baba)
मुख्य गायिका अलका याग्निक (Alka Yagnik)
भाषा हिंदी - उर्दू (सूफी मिश्रित)
भजन का भाव करुणा, समर्पण, विनय और शांत रस
उपयुक्त अवसर गुरुवार पूजा, साईं संध्या, दैनिक प्रार्थना, मंदिर उत्सव
मुख्य संदेश सबका मालिक एक, मानवता और गुरु भक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को भारत की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याग्निक जी ने अपनी अत्यंत सुरीली और भावपूर्ण आवाज में गाया है।

"आल्हा इलाही" का अर्थ परमात्मा या ईश्वर से है। यह शब्द साईं बाबा के सर्वधर्म समभाव और "सबका मालिक एक" के सिद्धांत को दर्शाता है।

हिंदू धर्म और साईं परंपरा में गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन गुरु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन साईं बाबा के मंदिरों में विशेष आरती और भंडारे का आयोजन होता है।

यह पंक्ति हमें सचेत करती है कि मनुष्य को अपना जीवन केवल भौतिक सुखों और व्यर्थ के कार्यों में नष्ट नहीं करना चाहिए, बल्कि परोपकार और ईश्वर भक्ति में भी समय लगाना चाहिए।

हाँ, इस भजन को आप अपने दैनिक पूजा-पाठ के समय या संध्या आरती के समय रोज गा सकते हैं। यह घर के वातावरण को शांत और सकारात्मक बनाता है।

साईं बाबा के दो मुख्य महामंत्र हैं - "श्रद्धा" (Faith) और "सबुरी" (Patience)। बाबा कहते थे कि इन दोनों को अपने जीवन में उतारने वाले का कल्याण निश्चित है।

इसका प्रतीकात्मक अर्थ ईश्वर के घर की सेवा करना और अपने मन के भीतर जमे हुए विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) को साफ करना है।

यह भजन सुगम संगीत और भक्ति संगीत की शैली में रचित है। इसकी धुन अत्यंत सरल और कर्णप्रिय है, जिसे कोई भी आसानी से गुनगुना सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को तैयार करने में साईं सच्चरित्र, पारंपरिक साईं भजनों के इतिहास और प्रामाणिक भक्ति ग्रंथों का संदर्भ लिया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुँचाना है ताकि उनकी श्रद्धा और ज्ञान में वृद्धि हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री साईं सच्चरित्र (शिरडी साईं बाबा संस्थान)
  • पारंपरिक सूफी और भक्ति काव्य संग्रह
  • अलका याग्निक जी द्वारा गाए गए आधिकारिक ऑडियो एल्बम

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह साईं भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित संबंधित लेख और भजन भी पढ़ सकते हैं:

श्रेणियां: Agni Gayatri Mantra Agni Suktam

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!