आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३७ PM | सूर्यास्त: ०५:२० AM
Chhath Puja Geet

काँच ही बाँस बसहर घरवा लिरिक्स (Kaanch Hi Baans Basahar Gharava Lyrics in Hindi) - Chhath Puja geet - Bhaktilok

102 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

छठ पूजा की महिमा: काँच ही बाँस बसहर घरवा

इस भजन में छठ पर्व की अद्भुत महिमा एवं प्रकृति से जुड़ाव का वर्णन है। श्रद्धा से गाने का आमंत्रण।

काँच ही बाँस बसहर घरवा। काँच ही बाँस बसहर घरवा। कूँ संकुच जइसे भोरवा। कूँ संकुच जइसे भोरवा। सुरा संगमहि संध्या बव्वा।। सुरा संगमहि संध्या बव्वा।। सूरज देवता सरिता पीया। सूरज देवता सरिता पीया। उबटन करी जोहर तोही। उबटन करी जोहर तोही। जिनके घरवाँ छठी मइया। जिनके घरवाँ छठी मइया। करवा ड्रावन रोज बदी। करवा ड्रावन रोज बदी। बगिया मथरा बसाँ जगइ। बगिया मथरा बसाँ जगइ। जल सागर मखिया चूर के। जल सागर मखिया चूर के। छठी मइया लागी अहिल्या। छठी मइया लागी अहिल्या। जिनके घरवाँ छठी मइया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

काँच ही बाँस बसहर घरवा की भक्ति के माध्यम से सूर्य देवता एवं छठी मइया की उपासना की जाती है। यह भजन, छठ पूजा के विशेष अवसर पर गाया जाता है, जिसमें भक्त अपनी श्रद्धा का प्रदर्शन करते हैं। यह रचना केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह जीवन को एक नई दिशा देने की प्रेरणा भी देती है। इसके माध्यम से भक्त प्र природе और सूर्य देवता के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं। इस गीत में सूरज और अस्तित्व की सृष्टि का संबंध प्रकट किया गया है, जहां सूरज की किरणों का महत्व और धरती की हरियाली दोनों का सामंजस्य दर्शित है। यहां काँच ही बाँस से बने घरवाले विशिष्ट रूप से जीवन की नाजुकता और उसका भावपूर्ण संदर्भ प्रस्तुत करते हैं।

भजन का उल्लेख करते हुए, इसे सामूहिक रूप से गाने की श्रुति भक्तों में एकता और सामंजस्य का अनुभव कराती है। 'काँच ही बाँस' की उपमा मानव जीवन के नाजुक एवं नश्वरता को सबके सामने लाती है। जैसे काँच नाजुक होता है, उसी प्रकार जीवन की वैभवता भी क्षणिक होती है। इस प्रकार भक्त भावुकता से सूर्य देवता से अपने जीवन को सुरक्षा और संजीवनी देने की प्रार्थना करता है। गीत की धुन में भक्तों की सच्ची भावना का रंग दिखाई देता है, जो उन्हें आत्मिक संतोष और आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। यह भजन प्रेम और भक्ति के रंग में रंगा हुआ है, जो जीवन में साधना और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का आह्वान किया गया है, जो भक्तों को सच्चे मन से सुख और शांति की प्राप्ति के लिए दिशा देता है। यह भक्ति परंपरा का अनूठा उदाहरण है, जिसका आधार प्राकृतिक शक्तियों का सम्मान है। हमें इस भक्ति के माध्यम से अपने भीतर के सकारात्मक ऊर्जा को पहचानना और उसे सहेजना चाहिए। सूर्य देवता की आराधना के माध्यम से, भक्ति मार्ग का अनुसरण करते हुए, भक्त अपने जीवन के सारे कष्टों को भुलाकर सुख और समृद्धि की प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं। यहाँ 'काँच ही बाँस' का अर्थ भी हमें यह सिखाता है कि जीवन को संतुलित और सौम्य बनाए रखना चाहिए, जैसे कि हल्का काँच भी अत्यधिक समर्पण से सुरक्षित रखा जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

काँच ही बाँस बसहर घरवा भजन का महत्वपूर्ण स्थान छठ पूजा में है। यह पूजा पौराणिक कथाओं में भी वर्णित है, जहां सूर्य देव की उपासना का महत्व अत्यधिक है। यह कहा जाता है कि सूर्य की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। महाभारत और पुराणों में भी सूर्य देवता की उपासना का विशेष महत्व था। इस पूजा के दौरान भक्त अपनी साधना के माध्यम से सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्तों का ध्यान सूर्य की किरणों के साथ-साथ अपने जीवन को समर्पित करने की दिशा में जाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का श्रद्धा पूर्वक गाना मानसिक शांति, आंतरिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। भक्त को इस गीत के माध्यम से अपने भीतर छिपी सकारात्मकता को जागृत करने में मदद मिलती है। साधना के दौरान सकारात्मक विचारों से मन को दृढ़ता मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। भक्त की आस्था और भक्ति के फलस्वरूप मानसिक तनाव कम होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह जल्दी करने से विशेष लाभ होता है। इसे सूर्योदय से पूर्व या छठ पूजा के दौरान गाना उत्तम होता है। साधना के दौरान, भक्त को एक शांत स्थान पर बैठकर अपने मन को एकाग्र करना चाहिए। दीपक जलाकर और माता छठी मइया को नैवेद्य अर्पित करके इस भजन का गान करना चाहिए। इसका सही भाव और श्रद्धा से किया गया जप निश्चित रूप से तृप्ति और सुख की अनुभूति कराएगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

काँच ही बाँस बसहर घरवा का क्या अर्थ है?

यह भजन जीवन की नाजुकता और दृढ़ता के साथ-साथ छठ पर्व की महिमा को दर्शाता है। इसे गाकर भक्त अपने मन में श्रद्धा एवं विश्वास उत्पन्न करते हैं।

इस भजन को गाने का सही समय क्या है?

इस भजन को विशेष रूप से छठ पूजा के दौरान और सूर्योदय से पहले गाना चाहिए। इसे सुबह की शांति में गाने से अधिक फल मिलता है।

क्या इस भजन का गाना व्यक्तिगत साधना में लाभकारी है?

हाँ, यह भजन व्यक्तिगत साधना में आंतरिक शांति और संकल्प शक्ति को बढ़ाता है। इसे नियमित रूप से गाने से भक्त को मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!