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आए हैं मैया के नवरातें (Aaye hain maiya ke navratey lyrics in hindi) - Bhaktilok

143 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ दुर्गा की आराधना का मधुर गीत

यह भजन माता दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, दिव्य आशीर्वाद के लिए गाओ।

आए हैं मैया के नवरातें (Aaye hain maiya ke navratey lyrics in hindi) - सज सोलह श्रृंगार मैया कर के सिंह सवारी दुःखिओं के दुःख दर्द मिटने आयी है शेरा वाली झन-झन झनके पायलिया झनके, खन - खनके चूड़ियां खनके, आए हैं मैया के नवरातें, खुशियों से मोरा जियरा छलके ॥ हॉं, झन-झन झनके पायलिया शेरावाली, ज्योता वाली, पहाड़ा वाली, मेहरा वाली चौकी सजाओ मंगल गाओ, नौ दिन नौ जगराते कराओ, ध्वजा नारियल पुष्प चढा़कर, मां की पावन ज्योत जलाओ, लहराए मैया की चुनर, माथे की बिंदिया चम- चम चमके ॥ हॉं, झन-झन झनके पायलिया शेरावाली, ज्योता वाली, पहाड़ा वाली, मेहरा वाली ध्यानु भगत का मान बढ़ाया, घोड़े का कटा शीश लगाया, आशीष देके तूने ओ मैया, श्रीधर से भंडारा कराया, बड़ी निराली तेरी माया, भक्तों पे तेरी ममता छलके ॥ हॉं, झन-झन झनके पायलिया शेरावाली, ज्योता वाली, पहाड़ा वाली, मेहरा वाली हम बालक शरण तेरी आए, सेवा से सारे सुख पाए, तेरा शोभा के गुण गाकर, हर्ष भी चरणों में रम जाए, छवि निहारूँ मैं तो मैया, जब-जब खुले ये मेरी पलकें ॥ हॉं, झन-झन झनके पायलिया शेरावाली, ज्योता वाली, पहाड़ा वाली, मेहरा वाली

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का केंद्रीय विषय माता दुर्गा की आराधना है, जिन्हें शेरावाली और रक्षक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भजन की आरंभिक पंक्तियों से ही साफ है कि मां की उपस्थिति जीवन के दुखों को मिटाने के लिए आई है। 'आए हैं मैया के नवरातें' पंक्ति नवरात्रि के सम्मान को दर्शाती है, जिसमें भक्तगण माता की पूजा और अर्चना करते हैं। इस महापर्व के दौरान, भक्त सजावट और श्रृंगार करके माता दुर्गा का स्वागत करते हैं, जैसा कि यहाँ 'सज सोलह श्रृंगार' से प्रकट होता है। 'दुखिओं के दुःख दर्द मिटने आयी है' में यह संदेश छिपा है कि माँ दुर्गा अपने भक्तों के समस्त भय और कष्टों को दूर करती हैं। नवरात्रि में माता की मूर्ति या तस्वीर के आगे दीया जलाना, नीचे चारों ओर ध्वजा और फूल अर्पित करना, सभी भक्तों के लिए अनिवार्य कार्य हैं ताकि उनकी आस्था और मान्यता प्रकट हो सके।

इस भजन में भावनाओं का गहरा समावेश है। 'झन-झन झनके पायलिया' पंक्ति भक्त के हृदय में मातृ प्रेम की मधुर धुन प्रस्तुत करती है। माता के चरणों में आनेवाले भक्तों की सेवा का उल्लेख करते हुए, भजन कहता है कि हमें 'सेवा से सारे सुख पाए'। इस प्रकार, यह स्पष्ट होता है कि मां का आशीर्वाद प्राप्त करना जीवन में सुख और शांति का संवर्धन करता है। 'आशीष देके तूने ओ मैया' वर्णन करती है कि माँ अपनी ममता से भक्तों का साथ देती हैं और उन्हें सुखदायी आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह समर्पण की भावना और भक्ति मार्ग के महत्व को दर्शाता है, जहाँ भक्त मां की शक्ति और माया के परिणामस्वरूप अपनी भक्ति और समर्पण को दिखाते हैं।

यह भजन मुख्यतः भक्ति मार्ग की परिकल्पना को उजागर करता है, जो दर्शाता है कि देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हमें समर्पण और भक्ति की भावना से भरे रहना चाहिए। 'मई बालक शरण तेरी आए' इस पंक्ति में भक्त की स्थिति एक शरणार्थी की है, जो मां की शरण में आता है। निरंतर भक्ति में लीन रहना और माता की खासियतों को गाना, मन को शुद्ध करने और आत्मा को उठाने का माध्यम है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब हम माता की भक्ति करते हैं, तब हमारी संपूर्णता बनी रहती है और हम एक स्थायी सुख एवं संतोष का अनुभव करते हैं। भक्ति मार्ग एक ऐसा साधन है, जो व्यक्ति को समाज और पारिवारिक खुशहाली की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवती दुर्गा की आराधना भारत की प्राचीन संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। शास्त्रों में, नवरात्रि का पर्व विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती, मार्कंडी उपनिषद और अन्य पुराणों में वर्णित है, जहाँ शक्ति की उपासना की जाती है। दुर्गा पूजा का यह पावन अवसर तभी मनाया जाता है जब भक्त अपनी शुद्धता और भक्ति से माता की कृपा को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। महाभारत और रामायण के संदर्भ में भाई-भाई के मध्य दुर्गा की उपासना का महत्व भी स्पष्ट है। नवरात्रि का पर्व भक्तों के लिए साधना का समय है, जिसमें वे ध्यान और भक्ति के माध्यम से माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गान मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। भक्ति भाव में डूबने से, भक्तों को आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। यह भजन सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक समृद्धि की ओर ले जाता है। इसके chanting से भक्तों को स्वास्थ्य में सुधार, दुखों से राहत और दीर्घकालिक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन प्रतिदिन सुबह या शाम को किया जा सकता है। इस दौरान एक स्वच्छ स्थान पर ध्यान केन्द्रित करें, एक मिट्टी का दीया जलाएँ और माता दुर्गा की पूजा सामग्री जैसे नारियल, फूल व फल अर्पित करें। उचित मुद्रा में बैठकर भक्ति भाव से इस भजन का गायन करें। मन में श्रद्धा और भक्ति का संचार करने के लिए, रुखी और विनम्र भावना बनाए रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नवरात्रों में इस भजन का महत्व क्या है?

नवरात्रि देवी दुर्गा की उपासना का पावन पर्व है। इस भजन का महत्व इस पर्व पर विशेष रूप से गायन करने में है, जिससे भक्तों को आशीर्वाद और शक्ति मिलती है।

क्या इस भजन को परिवार के साथ गाना चाहिए?

जी हां, इस भजन को परिवार के साथ गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी में एकता व भाईचारे की भावना बढ़ती है।

क्या इस भजन का रटा लगाना जरूरी है?

इस भजन का सही भावार्थ समझना और समर्पित भाव से गाना ज्यादा महत्वपूर्ण है, रटने की आवश्यकता नहीं होती है। भावना से गाएँ तो प्रभाव अधिक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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