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नवार्ण मंत्र की साधना कैसे करें (How to meditate on Navarna Mantra) - Bhaktilok

154 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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निवारण मंत्र की महिमा और साधना

निवारण मंत्र की साधना करने से जीवन में सुख और समृद्धि का अनुभव करें।

निवारण मंत्र की साधना कैसे करें:- श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।। राम जी के चरणों में, भक्तों का बसा समुद्र। हरि की महिमा गुण गाता, अति सुन्दर भक्ति का संदुर।। नवार्ण मंत्र का जाप करें, मन में करते ध्यान। समय पर ध्यान लगाए, प्रसन्न हो भगवान।। साधक को पवित्र हृदय से, करनें हो जाती साधना। जो सच्चे मन से जाप करे, रस पाता हरि से ज्ञान।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

निवारण मंत्र की साधना का मुख्य उद्देश्य भक्त के जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति करना है। इस भजन के माध्यम से भक्त यह आवाहन करता है कि वह अपने मन और हृदय को पवित्र रखे। इसमें कहा गया है कि 'बुद्धिहीन तनु जानिके' से यह संकेत मिलता है कि साधक को अपनी सीमाओं को पहचानकर, संतोष और आत्मज्ञान के साथ अपने जीवन को आगे बढ़ाना चाहिए। 'राम जी के चरणों में भक्तों का बसा समुद्र' सब भक्तों की प्रेम-भावना और समर्पण का प्रतीक है। यह स्पष्ट करता है कि हर भक्त को राम जी की भक्ति में अपने हृदय को समर्पित करना चाहिए।

इस भजन में भक्त राम जी के चरणों में अपनी भावनाएँ प्रकट करता है और उनसे मदद की प्रार्थना करता है। 'हरहु कलेश विकार' का अर्थ है कि सभी कष्टों और विकारों को दूर करने के लिए राम जी की कृपा की आवश्यकता है। भक्त अपने मन की शुद्धता के साथ निवारण मंत्र का जाप करता है ताकि भगवान की कृपा उसे हर दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करे। यह भक्ति का भावार्थ हमें स्पष्ट करता है कि सच्चे भक्ति में आत्मसमर्पण और विश्वास होना जरूरी है, जिससे मन की शांति और स्थिरता प्राप्त होती है।

निवारण मंत्र की साधना संकटों और बाधाओं से मुक्ति पाने का एक मार्ग है। यह मंत्र केवल शब्दों का जाप नहीं है, बल्कि एक गहरी अर्थवत्ता रखता है। 'जिसे सच्ची मन से जाप करे' का संदेश हमें इसका अनुभव कराता है कि साधना में भावना और इरादा दोनों की महत्ता है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्त को चाहिए कि वो बिना किसी स्वार्थ के इश्वर में विश्वास करे और उनके प्रति अपनी भक्ति को अवश्य प्रकट करे। इससे मन की शांति, प्रगति और अद्वितीय अनुभूति प्राप्त होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

निवारण मंत्र का महत्व हिन्दू धर्म में विशेष रूप से धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। पुराणों में यह कहा गया है कि नवार्ण मंत्र का जाप माँ दुर्गा और श्रीराम के प्रति भक्ति को प्रकट करने का एक तरीका है। इस मंत्र के जाप से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह भक्त को निर्भीकता और शक्ति भी प्रदान करता है। महाभारत और रामायण में भी भक्तों द्वारा ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्रों का जाप करने का वर्णन मिलता है। इस मंत्र का साधक का जीवन में पारिवारिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सभी समस्याओं से मुक्त होने में सहायता करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। निवारण मंत्र की साधना से मानसिक शांति, तनाव की कमी और स्वास्थ्य में सुधार होता है। नियमित जाप करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और साधक को सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। इसके अलावा, यह साधना भक्त को आध्यात्मिक उन्नति और अनुभूतियाँ भी प्रदान करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

निवारण मंत्र की साधना करने का सर्वोत्तम समय सुबह का है, जब मन शांति और उत्साह से भरा होता है। साधना के दौरान एक साफ स्थान पर बैठकर, दीपक जलाना और फल या फूल अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही, पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्र का जाप करें। ध्यान रखें कि साधना के दौरान आपका मन एकदम स्थिर और शांत रहे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

निवार्ण मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?

निवार्ण मंत्र का जाप दिन में कम से कम 108 बार करने की सिफारिश की जाती है। इससे मानसिक शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।

क्या निवार्ण मंत्र का जाप किसी विशेष समय पर करना चाहिए?

हां, निवार्ण मंत्र का जाप सुबह सूर्योदय के समय किया जाना चाहिए। यह समय मानसिक शांति और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है।

क्या साधना के दौरान कोई विशेष वस्त्र पहनना चाहिए?

साधना के दौरान साफ, पवित्र और श्वेत वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। यह साधक की स्थिति को ध्यान में रखता है और भक्ति में वृद्धि करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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