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Durga Bhajan Lyrics

दुर्गे दुर्घट भारी आरती (Durge Durgat Bhari Aarti Lyrics in Hindi) - Durga Aarti Durge Durgat Bhari - Bhaktilok

113 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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दुर्गे दुर्घट भारी आरती: शक्ति की अनुकम्पा

महाकाली की आरती का पाठ कर मन में श्रद्धा जगाएं, भक्ति से संकटों का नाश होगा।

दुर्गे दुर्घट भारी आरती, जो जागे वो सुख पावे। जो जपे उसका हाल सुनावे, दुर्गे दुर्गट भारी आरती। माँ महाकाली, तू जगमाता। तेरी महिमा हैं, सबकी बुनियाद। सुन निहारे सबकी बिनती, दुर्गे दुर्गट भारी आरती।। विषम सन्धान्त में जब आ जाए। सुख-समृद्धि का संग लाए। माँ दुर्गे जो तेरा रंग चढ़ाए। इसमें मोहन भक्ति सारा जग समाए।। आप ही एक, धर्म की मूरत। तेरे चरणों में सब का स्वरूप। हर कामना सबकी तुम हो युक्त। दुर्गे दुर्गट भारी आरती।। ज्योतिर्मय, तिमिर तोड़ने वाली। दुख-दर्द में भगवान की प्यारी। जो संकट में आहे लगाती। दुर्गे दुर्गट भारी आरती।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस आरती का मुख्य विषय माँ दुर्गा की महानता और शक्ति का गुणगान करना है। इसमें माँ दुर्गा के प्रति भक्तों की भक्ति और स्नेह को दर्शाया गया है। 'जो जागे वो सुख पावे' पंक्ति में यह सूचना है कि जो श्रद्धालु माँ दुर्गा की आरती का पाठ करते हैं, उन्हें सभी सुखों की प्राप्ति होती है। यह आरती माँ के अद्वितीय स्वरूप और उनके भक्तों के प्रति करुणा को भी उजागर करती है। इसमें काले और सफेद रंग का अद्भुत धार्मिक प्रतीक प्रस्तुत करते हुए माँ के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन किया गया है। देवी के नामों का स्मरण भक्तों को हर परिस्थिति में सहारा देता है और उन्हें माँ की अनुकंपा की अनुभूति कराता है।

इस आरती का भावार्थ भक्तों के लिए अपनी भक्ति को माँ दुर्गा के चरणों में लगाने का एक अद्वितीय मार्ग है। भक्त जनों की आरती से यह संदेश मिलता है कि माँ दुर्गा संकटों में भी उन्हें मार्गदर्शन करती हैं। 'विषम सन्धान्त में जब आ जाए' पंक्ति यह संकेत करती है कि जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयों में माँ की उपासना से संबल मिला करता है। श्रद्धालु जब माँ का ध्यान करते हैं, तो उनका हृदय प्रेम और श्रद्धा से भर जाता है। यहाँ तक कि आंतरिक संकट भी फिर नहीं टिक पाते। 'दुख-दर्द में भगवान की प्यारी' इस पंक्ति का सीधा अर्थ है कि माँ दुर्गा अपने भक्तों के हर दुख को दूर करती हैं, जिससे भक्तों को आत्मिक सुख की अनुभूति होती है।

इस आरती में भक्ति मार्ग की गहनता को भी दर्शाया गया है, जो कि तुलसीदास, मीरा और रामकृष्ण परमहंस जैसे संतों द्वारा व्यक्त किया गया है। यह भक्ति का मार्ग श्रद्धा, प्रेम एवं भक्ति से भरा होता है, जहाँ भक्त देवी में एकम एक होते हैं। यहाँ 'आप ही एक, धर्म की मूरत' पंक्ति यह दर्शाती है कि माँ दुर्गा स्वयं धर्म की संरक्षक और मार्गदर्शक हैं। उन्हें भजने वाला व्यक्ति अपार शक्ति और ज्ञान प्राप्त करता है। यह आरती भक्ति का एक अनुपम उदाहरण है, जो मन और आत्मा को जोड़कर श्रद्धालुओं की जीवन यात्रा को सरल बनाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ऐसी आरतियाँ भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा हैं, जहाँ देवी दुर्गा की आराधना करके भक्त जन अपने जीवन में आशा, शक्ति और धैर्य भरते हैं। इस आरती का उल्लेख पीढ़ियों से भारतीय पौराणिक कथाओं में मिलता है, जैसे देवी भागवत में माँ दुर्गा की महिमा का वर्णन मिलता है। महाकाली का प्रति प्रत्येक नाम एवं रूप भक्तों को विभिन्न रोजमर्रा की समस्याओं से राहत दिलाते हैं। यह दर्शाता है कि माँ दुर्गा केवल युद्ध और शक्ति की देवी नहीं हैं, बल्कि वे करुणा, प्रेम और सुरक्षा की मूरत भी हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। माँ दुर्गा की आरती का पाठ करने से मानसिक शांति, तनाव में कमी, और आत्मिक विकास होता है। यह मानसिक शक्ति को बढ़ाती है और कठिनाइयों से लड़ने की ऊर्जा प्रदान करती है। नियमित रूप से आरती का पाठ करने से व्यक्ति सकारात्मकता और मानसिक मजबूती के साथ जीवन में आगे बढ़ता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

दुर्गे दुर्घट भारी आरती का पाठ सुबह के समय, विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान करना अत्यंत फलदायी होता है। पूजा स्थल को साफ करके एक दीया जलाएं और माँ दुर्गा के चित्र या मूर्ति के सामने बैठकर श्रद्धा भाव से आरती का पाठ करें। ध्यान रखें कि आपकी मन की स्थिति पूरी तरह से भक्तिभावित हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दुर्गे दुर्घट भारी आरती का महत्व क्या है?

यह आरती देवी दुर्गा के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करती है और भक्तों को संकटों से मुक्ति दिलाने में सहायक है।

इस आरती का पाठ कब करना चाहिए?

आरती का पाठ सुबह या नवरात्रि में करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

क्या दुर्गे दुर्घट भारी आरती का पाठ करने से मन को शांति मिलती है?

हाँ, नियमित पाठ करने से मन में शांति एवं सकारात्मकता आती है, जिससे व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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