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Chhath Puja Geet

छठी मैया के ऊँची रे अररीया लिरिक्स (Chhathi Maiya Ke Unchhi Re Arariya Lyrics in Hindi) - Chhath Puja Geet - Bhaktilok

189 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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छठी मैया: आस्था का प्रतीक भजन

छठी मैया के आराधना का यह भजन भक्ति एवं श्रद्धा का अद्भुत बोध कराता है।

छठी मैया के ऊँची रे अररीया, छठी मैया के ऊँची रे अररीया, बंसुरी बजावे राजाजी, बंसुरी बजावे राजाजी। छठी मैया के ऊँची रे अररीया, छठी मैया के ऊँची रे अररीया, बंसुरी बजावे राजाजी, बंसुरी बजावे राजाजी। मारगजरी सोने चाँद के, कुंवर सुनते लावे राजाजी, कुंवर सुनते लावे राजाजी। छठी मैया के ऊँची रे अररीया, छठी मैया के ऊँची रे अररीया। गोपियाँ हंसते खेलते आगे, गोपियाँ हंसते खेलते आगे। सुरुचि महल का ओट खातिर, सुरुचि महल का ओट खातिर। छठी मैया के ऊँची रे अररीया, छठी मैया के ऊँची रे अररीया।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्रमुख विषय छठी मैया की आराधना और उनके प्रति श्रद्धा का प्रदर्शन है। 'छठी मैया के ऊँची रे अररीया' इस वाक्य के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि छठी मैया का स्थान आकाश में या ऊँचाई पर है, जो उनकी दिव्यता और पवित्रता को दर्शाता है। यह भजन भक्तों को प्रोत्साहित करता है कि वे छठी मैया की कृपा के लिए उनकी स्तुति करें। बंसुरी बजाने का उल्लेख इस बात का प्रतीक है कि छठी मैया आनंद और उल्लास लेकर आती हैं, जिससे भक्तों के जीवन में सुख, संवृद्धि और खुशहाली आती है।

इस भजन के भावार्थ में गहराई से यह संदेश निहित है कि छठी मैया केवल एक देवी नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संरक्षण और आशीर्वाद देने वाली मां हैं। भजन में 'गोपियाँ हंसते खेलते आगे' का भावार्थ यह है कि जब भक्त पूरी श्रद्धा से छठी मैया की आराधना करते हैं, तब उनके जीवन में उल्लास और खुशियों का संचार होता है। यह भजन श्रद्धा और भक्ति के साथ गाया जाने पर भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है।

छठी मैया की आराधना में भक्ति मार्ग का अनुपम दर्शन होता है। इस भजन में 'मारगजरी सोने चाँद के' की पंक्ति साधना के मार्ग को दर्शाती है। यह हमें यह प्रेरणा देती है कि जब हम अपने लक्ष्य की ओर निष्ठा से चलते हैं, तब माँ की कृपा सदैव हमारे साथ होती है। फलों की प्राप्ति और सफलता के लिए यह आवश्यक है कि भक्तिपूर्वक छठी मैया का ध्यान किया जाए। इससे भक्तों को सर्वांगीण सुख एवं शांति मिलती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

छठ पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अद्वितीय है। यह पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के लिए होती है। पुराणों में वर्णित है कि छठी मैया, सूर्य देव की बहन हैं और उनका पूजन विशेष रूप से कार्तिक माह में की जाती है। इस पूजा का उद्देश्य समृद्धि, सुख और स्वास्थ्य प्राप्त करना है। भक्त अपने संतान के सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए छठी मैया से आशीर्वाद माँगते हैं। इस प्रसंग में उपासना का सांस्कृतिक पक्ष भी है, जो भारतीय सभ्यता के उत्सव और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ अत्यधिक है। chant करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक संतुलन मिलता है। यह भक्तों में एकाग्रता और संपूर्णता की भावना को जागृत करता है, जिससे वे जीवन के विभिन्न परीक्षणों का सामना कर सकते हैं। साथ ही, छठी मैया की भक्ति से सांसारिक समस्याओं का समाधान भी मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन विशेष रूप से सुबह की आरती या संध्या के समय गाए जाने योग्य है। पूजा के दौरान दिव्य आभा के लिए दींया जलाना और मिठाइयों का भोग लगाना उत्कृष्ट रहता है। भक्तों को ध्यान मुद्रा में बैठकर पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ भजन का जाप करना चाहिए। इस दौरान मन में भगवान और माता का ध्यान रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

छठी मैया कौन हैं?

छठी मैया सूर्य देव की बहन मानी जाती हैं, जिनकी पूजा कार्तिक मास में कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक की जाती है। उनकी आराधना संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए की जाती है।

इस भजन का गाने का सही समय कब है?

यह भजन सुबह की आरती या संध्या वेला के समय गाने में अधिक फलदायी होता है, जब भक्त अपनी श्रद्धा के साथ छठी मैया की कृपा की कामना करते हैं।

छठी मैया की पूजा में क्या विशेष बातें हैं?

छठी मैया की पूजा में कई विशेष सामग्रियों का उपयोग होता है जैसे कि फलों, मिठाइयों और दुर्वा। इसके साथ ही, स्वास्थ्य और भौतिक समृद्धि की कामना की जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Sep 2026

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