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जय काली जय काली रण में आयी देखो काली लिरिक्स (Jai Kali Jai Kali Ran Me Aayi Dekho Kali Lyrics in Hindi) - Kali Mata Bhajan Hemant Brijwasi - Bhaktilok

122 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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काली माता: शक्ति और विजय की प्रतीक

जय काली का यह भजन मातृ शक्ति में विश्वास और दुष्टों पर विजय की प्रेरणा देता है।

जय काली जय काली रण में आयी देखो काली रण में आयी देखो काली खून से भरने खप्पर खाली दुष्टो को तू मारने वाली जय काली काली......|| अष्ट भुजाओं वाला लहंगा पहन के मैया आई है काट के दुष्टो का सर मैया ने माला बनाई है चंडी रूप बात निराली सजती है मेरी मैया काली दुष्टो को तू मारने वाली जय काली काली......|| देख के रूप विराट माँ तेरा कई देवता भी हारे तेरे आगे विनती करते हाथ जोड़ते है सारे आखिर में शिव शंकर जी ने किया है शांत तुझे माँ काली दुष्टो को तू मारने वाली जय काली काली......|| जैसे भैरव बाबा की मुक्ति की तूने अम्बे माँ महिषासुर को सबक सिखाने वाली तू जगदम्बे माँ ऐसे ही ‘आशीष बागड़ी’ चरणों में तेरे आया माँ ‘हेमंत ब्रजवासी’ ने मैया तेरा ही गुण गाया माँ खुशियों सबको देने वाली जय काली काली......|| रण में आयी देखो काली खून से भरने खप्पर खाली दुष्टो को तू मारने वाली जय काली काली......||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में, 'जय काली जय काली रण में आयी देखो काली' हमें माता काली की शक्तिशाली छवि का परिचय कराता है। ये पंक्तियाँ न केवल उनकी विनाशकारी शक्तियों का कथन करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि वे दुष्टों का नाश करने हेतु प्रकट होती हैं। 'खून से भरने खप्पर खाली' का अर्थ है कि वे अपने शत्रुओं का रक्त लेकर आयी हैं, जो उनकी युद्ध में विजय की प्रतीक है। 'अष्ट भुजाओं वाला लहंगा' यह दिखाता है कि माता काली अजेय हैं, और उनकी अनेक शक्तियाँ हैं। 'चंडी रूप बात निराली' उनकी अद्वितीयता को दर्शाती है। यह स्पष्ट है कि माता काली केवल नाशक नहीं, बल्कि सृष्टि और संतुलन की भी देवी हैं।

इस भजन में काली माँ की महिमा का वर्णन अत्यंत भावुक है। 'देख के रूप विराट माँ तेरा कई देवता भी हारे' इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि काली माता का दिव्य रूप स्वीकार करने में देवताओं को भी कठिनाई होती है। इसके साथ ही, 'तेरे आगे विनती करते हाथ जोड़ते हैं' इस भाव से भक्तों के मन में अद्भुत श्रद्धा का बोध होता है। माता काली के प्रताप से ही शिव शंकर ने उन्हें 'शांत' कहा है, जो कि उनके संतोष का प्रतीक है। इस भजन में भक्त 'हेमंत ब्रजवासी' ने उन्हें समर्पित होकर उनके गुणों का गुणगान किया है, जो भक्त की सच्ची भक्ति को दिखाता है।

इस भजन में भारतीय दर्शन के महत्वपूर्ण तत्व प्रकट होते हैं, जैसे कि 'दुष्टों का नाश' और 'धर्म की रक्षा'। काली माता का स्वरूप अनेकता में एकता का प्रतीक है, क्योंकि उन्होंने विभिन्न रूपों में दुष्टों का संहार किया है। इसी प्रकार, भक्तिपथ में उनकी उपासना हमें भक्ति और विघटन के पारस्परिक संबंध को समझने में सहायता करती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भक्ति का मार्ग कठिनाइयाँ एवं संघर्षों से भरा है, लेकिन जब हम सच्चे मन से माता की ओर लौटते हैं, तो हमारी समस्याएँ स्वयं समाप्त हो जाती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

काली माता का यह भजन पौराणिक कथाओं से गहरे जुड़े हुए हैं। देवी महात्म्य में महिषासुर मर्दिनी के रूप में काली का वर्णन है, जो दुष्टों का संहार करती हैं। काली का चरित्र विविध पौराणिक ग्रंथों, जैसे देवी भागवत, और शतचंडी में विस्तृत रूप से वर्णित है। यहाँ वे शक्ति के प्रतीक के तौर पर पूजा जाती हैं। काली का दर्शन हमें सिखाता है कि विकास और विनाश का चक्र निरंतर चलता रहता है, और सदाचार की विजय ही अंतिम लक्ष्य है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आत्मबल एवं नकारात्मकता को दूर करने में सहायक होता है। काली माता का स्मरण जीवन में शक्ति, साहस, और आशा का संचार करता है। नियमित रूप से यह भजन गाने से भावनात्मक स्थिरता एवं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आने की संभावना बढ़ती है। काली माता की कृपा से कठिन समय में भी भक्त को आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन सुबह या शाम के समय गाया जा सकता है, जब मन शांत हो। पूजा करते समय एक दीया जलाना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। भजन गाने से पहले ध्यान लगाना और अपनी मनोकामनाएँ रखनी चाहिए। उचित स्थान पर बैठकर ध्यानपूर्वक माता काली का स्मरण करना, उनकी मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर भजन का पाठ करना विशेष फलदायी है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

काली माता की पूजा का महत्व क्या है?

काली माता की पूजा जीवन में शक्ति, साहस और保护 प्रदान करती है, जिससे भक्त अपनी चुनौतियों का सामना कर सकें।

क्या इस भजन का जाप रोज करना चाहिए?

हां, 'जय काली जय काली' का नियमित जाप मानसिक शांति और आत्मविश्वास का संचार करता है, जिससे भक्तों को समस्याओं का सामना करने में मदद मिलती है।

काली माता की उपासना कैसे करें?

काली माता की उपासना के लिए अच्छा समय सुबह या शाम है। पूजा स्थल पर एक दीया जलाएं, और संपूर्ण मन के साथ भजन का पाठ करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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