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kali mata bhajan

सुनने के पुकार माँ दौड़ चली तू आई रण मे काली (Sunane Ke Pukaaro Maan Daudi Chali Tu Aai Ran Mein Kali Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

135 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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काली माँ का महाकाल रुद्र स्वरूप

इस भजन के माध्यम से माँ काली के प्रति भक्ति और श्रद्धा का संचार करें।

सुनने के पुकार माँ दौड़ चली तू आई रण मे काली माँ कालीचंड मुंड को मार गिरायामुंडे माल का हार बनायाआई आंधी कालीआई रण मे काली माँ काली रक्त बीज का सिर है उड़ायारूप भयंकर आज दिखायाआई बन विकरालीआई रण मे काली माँ काली लकी चरण में शीश झुकावेप्रतिदिन मैया ध्यान लगावेआई मां मेरी काली ये कालीआई रण मे काली माँ काली

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन की शुरुआत माँ काली के प्रति पुकार से होती है, जिसमें भक्त माँ से प्रार्थना कर रहा है कि वह रणभूमि में तेज गति से दौड़कर आयें। यह एक अद्भुत राग है जिसमें माँ काली के विजय और रौद्र स्वरूप का गौरवशाली वर्णन है। 'माँ कालीचंड मुंड को मार गिराया' इस पंक्ति से समझ में आता है कि माँ काली शत्रुओं पर विजय पाने की शक्ति रखती हैं। यह उनका दानवों के सिर को छिन्न-भिन्न करने का प्रतीक है, जो कि धारणाएं और अ असुरता के प्रतीक होते हैं। इस भजन के माध्यम से एक साधक अपने भीतर से अज्ञान और अंधकार को समाप्त करने के लिए माँ काली की कृपा की कामना कर रहा है।

इसके आगे 'रक्त बीज का सिर है उड़ाया' जैसी पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि कैसे माँ काली ने रक्त बीज, जो कि एक दुष्ट दानव था, का संहार किया। यहाँ भक्त की भक्ति में गहरी भावना और अनुभूति दिखाई देती है, जहाँ वह माँ से प्रार्थना कर रहा है कि वे उनके चरणों में अपने शीश को झुकाने की क्षमता दें। माँ का विकराल रूप यहाँ सृजन और संहार दोनों के कॉस्मिक सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन के द्वंद्व को दर्शाता है। भक्त की चाहत है कि माँ हमेशा उनके साथ रहें और उनकी रक्षा करें।

यह भजन भक्ति मार्ग, विशेषकर माँ काली की आराधना के लिए एक मार्ग प्रदर्शित करता है। यह उन भक्तों के लिए प्रेरक है, जो जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। 'हर दिन मैया ध्यान लगावे' यह संदेश देता है कि नियमित ध्यान और सच्ची श्रद्धा से भक्त अपनी जीवन की समस्याओं का समाधान कर सकता है। काली माँ सृष्टि और संहार की देवी हैं, उनका प्रार्थना में यह रदीफ बताता है कि भक्तों को सच्चे मन से उनकी आराधना करनी चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

काली माता की पूजा की परंपरा भारतीय संस्कृति में काफ़ी पुरानी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काली माँ का रूप कालिका पुराण में विशेष रूप से वर्णित है। महाकाली ने न केवल दुष्ट शक्तियों का नाश किया है, बल्कि धर्म की रक्षा भी की है। यही कारण है कि उन्हें महाकाल के रूप में पूजा जाता है। ये दो आसनों का संयोजन, जो धर्म और अधर्म के बीच की लड़ाई का प्रतीक है, भक्ति के अनंत मार्ग को दर्शाता है। काली माँ की आराधना से तात्पर्य है शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक बल प्राप्त करना।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। माँ काली का यह भजन साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और भय से मुक्ति प्रदान करता है। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मकता और शक्ति का अनुभव करता है। माँ काली की कृपा से साधक अपने भीतर के अंधकार को दूर कर सकता है और आंतरिक शक्ति को जागरूक कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय से पहले या रात को देवी की आरती के समय करना सबसे लाभकारी होता है। भक्त को चाहिए कि वह ध्यानपूर्वक देवी के चित्र के सामने दीप जलाए और फल या फूल अर्पित करे। सच्चे मन से भक्ति भाव में बैठकर इस भजन का जाप करें। ध्यान रखें कि मन में केवल माता का ध्यान रहे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

काली माँ की आराधना किस प्रकार करनी चाहिए?

काली माँ की आराधना के लिए भक्त को नियमिततः पूजा-पाठ करना चाहिए। विशेष रूप से नवरात्रि में उनकी पूजा अधिक फलदायी होती है।

काली माँ का महत्त्व क्या है?

काली माँ को सृष्टि और संहार की देवी माना जाता है। वे भक्तों को जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती हैं।

क्या यह भजन केवल नवरात्रि में ही गाया जाता है?

इस भजन का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान इसकी विशेष महत्ता होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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