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हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन (Hey Prathmeshwar Gauri Ke Nandan Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan Pamela Jain - Bhaktilok

452 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणपति के प्रति भक्ति: श्री गणेश वंदना

जय श्री गणेश! इस भजन के माध्यम से गणेश जी की कृपा प्राप्त करें और अपने जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करें।

हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन (Hey Prathmeshwar Gauri Ke Nandan Lyrics in Hindi) - ॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदनतेरी पूजा करता जो पहले भरता भंडारे शिव नंदनहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||हर पूजा में सबसे पहले तेरा जो वंदन करता देवाउसके सिद्ध काज सब करके बाधाएँ तू हरता देवाॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःभुवन पति है बुद्धि विधाता सुमिरे तुमको शुभगुणकाननहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदनतेरी पूजा करता जो पहले भरता भंडारे शिव नंदनहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||मात पिता का फेरा लगाया तूने उन्हें ब्रह्माण्ड मान केप्रसन्न हुए तब मात पिता उन्हें अद्भुद बुद्धिमान जान केॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःमाटी तेरा जो सानिध्य पाए बन जाएँ प्रभु क्षण में चन्दनहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदनतेरी पूजा करता जो पहले भरता भंडारे शिव नंदनहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||तेरी अर्चना जग में निराली सिद्ध काज कर देने वालीभक्तों को देकर तूने शुभ वर क्षण में उनकी विघ्न है टालीॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःॐ गं गणपतये नमः ॐ गं गणपतये नमःविघ्न हमारे भी सब हर लेना विघ्न विनाशक मेरे भगवान्हे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदनतेरी पूजा करता जो पहले भरता भंडारे शिव नंदनहे प्रथमेश्वर गौरी नंदन सौ सौ बार करूँ तुझे वंदन.....||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान गणेश को 'प्रथमेश्वर गौरी नंदन' कहा गया है, जो उनकी महिमा और शक्तियों का परिचायक है। प्रत्येक stanza में भजनकर्ता गणेश जी के प्रति अपने असीम भक्तिभाव का प्रदर्शन कर रहा है। पहले श्लोक में, भक्त ने सौ बार भगवान गणेश को ध्यान करते हुए उन्हें वंदन करने की इच्छा व्यक्त की है, जो उनकी शरण में होने का संकेत है। इसके बाद, 'हर पूजा में सबसे पहले तेरा जो वंदन करता देव' कहकर यह स्पष्ट किया गया है कि सभी धार्मिक क्रियाओं में गणेश जी का पूजन सर्वोपरि है, क्योंकि वे विघ्नों को दूर करते हैं। इस प्रकार, भजन के माध्यम से भक्त गणेश जी को अपने जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं।

गणेश जी को माता पार्वती और भगवान शिव का पुत्र माना जाता है, और इसलिए इस भजन में उनकी पारिवारिक महिमा का भी खास ध्यान रखा गया है। विशेषकर 'माता पिता का फेरा लगाया' यह पंक्ति दर्शाती है कि वे माता-पिता का आदर करते हैं और उन्हें ब्रह्माण्ड के रूप में सम्मान देते हैं। भक्त इस भजन के माध्यम से यह प्रेरणा लेते हैं कि अद्भुत बुद्धिमानता केवल पूजा और श्रवण करने से प्राप्त होती है। इस प्रकार, भक्ति का हर कर्म गणेश जी के प्रति एक नये रूप में प्रेम और श्रद्धा के साथ किया जाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग को भी दर्शाया गया है, जिसमें भक्त का मन गणेश जी के प्रति समर्पित रहता है। उनकी कृपा से सभी बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं और सूख-समृद्धि का आगमन होता है। भजन में 'सिद्ध काज कर देने वाली' जैसे शब्द गणेश जी की शक्ति को दर्शाते हैं, जो उन्हें विघ्न विनाशक के रूप में स्थापित करते हैं। भक्त इस भजन के माध्यम से अपने जीवन की हर समस्या और दुविधा में गणेश जी की कृपा की कामना करते हैं, जो वास्तविक में भक्ति का उच्चतम स्वरूप है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी की पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। हिन्दू धर्म में उन्हें सभी शुभ कार्यों की शुरुआत में पूजा जाता है क्योंकि उन्हें 'विघ्नहरता' माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि उनकी कृपा से सभी कार्य सफल हो जाते हैं। यह भजन भी इसी भाव को प्रकट करने वाला है। पुराणों में वर्णित पुरानी कथाएँ दिखाती हैं कि गणेश जी ने अपने अनोखे और कठिन समय में अपने भक्तों को हमेशा सच्चाई और बुद्धिमत्ता की राह दिखाई है। इस प्रकार, यह भजन उनकी सम्पूर्णता और कृपा का प्रतीक है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और स्थिरता मिलती है। इसके अलावा, भक्तों को भक्ति के माध्यम से आंतरिक ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे नकारात्मकता समाप्त होती है। विशेष रूप से, गणेश जी की आराधना से जीवन में सुख, समृद्धि और समर्पण का संचार होता है। यहां तक कि भौतिक स्वास्थ्य में भी सुधार देखा जाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। पूजा के दौरान, एक दीपक जलाना चाहिए और भगवान गणेश को मोदक जैसे प्रसाद का भोग अर्पित करना चाहिए। भक्तों को ध्यान की मुद्रा में बैठकर मन और अंतःकरण को शुद्ध करना चाहिए और गणेश जी का नाम लेकर वंदना प्रारम्भ करनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन गणेश जी को क्यों समर्पित है?

यह भजन भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा करता है और भक्तों की सभी समस्याओं का समाधान चाहता है।

कौन सी विशेषताएँ इस भजन में वर्णित हैं?

भजन में गणेश जी की बुद्धिमत्ता, बलिदान और माता-पिता के प्रति प्रेम का वर्णन है, जो उनके चरित्र की विशेषताएँ हैं।

इस भजन का पाठ करने का सही समय क्या है?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना चाहिए, जब मन स्थिर और एकाग्र होता है, ताकि भक्त गणेश जी से अधिक सच्चे मन से जुड़ सकें।

श्रेणियां: Mahagauri Stotra gauri Mata Chalisa

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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