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विदाई कैसे करी (Vidai Kaise Kari Lyrics in Hindi) - Pawan Singh Superhit Bhojpuri Vidai Geet - Bhaktilok

162 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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विदाई की सुमधुर अनुगूँज: एक भावपूर्ण भजन

इस भजन में विदाई के क्षणों की भावनाएँ और माता के प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त किया गया है।

विदाई कैसे करी, माई अंचल में हमको, धोती चूड़ी में बास, बड़ा काजल छूटी, माई अंचल में हमको। जियरा यार है, जियरा यार है, जैसे अवधिया की सुनते, माई अंचल में हमको। कंचन गहनो में, जियरा यार है, जिया में बास, घुटने चलाय दे दिया, माई अंचल में हमको। माई अंचल में हमको, धोती चूड़ी में बास, जियरा यार है, जियरा यार है। आँखों में आंसू, आँखों में आंसू, माई अंचल में हमको, लायक जी न आ सके। जिया में बास, माई अंचल में हमको, छोड़ के अब चली जाऊँ। जदब जदब में जदधर, माई अंचल में हमको, गाँठना पर कुर्बान होई। धोती चूड़ी में बास, जियरा यार है, जियरा यार है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्य थीम विदाई के क्षणों की गहन भावनाएँ हैं। 'विदाई कैसे करी' का आधार भावुकता और त्याग है। विदाई के समय में व्यक्ति अपनी मातृभूमि और उसके आंचल के प्रति अपनी गहरी प्रेम और समर्पण की बातें करता है। गाने में 'माई अंचल में हमको' का बार-बार उल्लेख इस भावना को और भी गहरा करता है। यह द्रव्यमान के साथ-साथ आत्मिक जुड़ाव को दर्शाता है, जहां व्यक्ति यह सोचता है कि अब उनका जीवन उस आंचल से दूर जा रहा है, जो उन्हें हमेशा सुरक्षा और प्रेम प्रदान करता था।

भावार्थ में यह भजन जीवन के अनिवार्य सत्य को उजागर करता है कि विदाई जीवन का अभिन्न हिस्सा है। 'आंखों में आंसू' और 'जिया में बास' जैसी पंक्तियाँ प्रेम के आँसू और उसी समय की गहन आत्मीयता का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब व्यक्ति अपने प्रियजनों से दूर होता है, तो मन अत्यंत संवेदनशील हो जाता है। यह विदाई एक साथ जीवन और मृत्यु के अनियोजित चक्र को दर्शाती है, जो सभी को गहराई से प्रभावित करती है। यह अनिवार्य भावना भक्ति और प्रेम का एक अद्वितीय संयोग है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का स्वरूप स्पष्ट है। यह विदाई के समय में ध्यान और श्रद्धा का संचार करता है, जो लौकिक जीवन की सीमाओं के भीतर एक दिव्य तत्व का अनुभव प्रदान करता है। 'धोती चूड़ी में बास' का अर्थ है कि भक्ति का मार्ग सदा आध्यात्मिक यात्रा को समर्पित रहता है, भले ही विदाई का क्षण कितना भी कठिन क्यों न हो। यह भजन हमें यह सिखाता है कि विदाई के बावजूद प्रेम और भक्ति जीवन के सभी बंधनों से परे होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय संस्कृति में गहरा है। विदाई केवल एक भौतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह जीवन के विभिन्न चरणों की आध्यात्मिकता का प्रतीक है। विभिन्न पुराणों और शास्त्रों में विदाई के महत्व को रेखांकित किया गया है। विशेष रूप से रामायण में जब श्री राम माता सीता को वनवास देकर विदाई देते हैं, वह क्षण एक सीख है कि प्रेम, सम्मान और त्याग हमेशा विदाई के साथ चलते हैं। यह भजन इसी भावनात्मक और धार्मिक प्रक्रिया का स्वर्णिम उदाहरण प्रस्तुत करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का गहन साधना करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह श्रद्धा और समर्पण को बढ़ावा देने के साथ-साथ चिंता और तनाव को कम करता है। नियमित अध्ययन से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आंतरिक शक्ति का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। भजन गाते समय एक दिया जलाना और पूजा स्थल पर पुष्प अर्पित करना उपयुक्त है। उसी समय, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ गाने का प्रयास करें। ध्यान दें कि आपका मन भजन की भावनाओं में डूबा हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन की मूल भावना क्या है?

इस भजन की मूल भावना विदाई के समय की गहन संवेदनाएँ और मातृभावना का सम्मान करना है। यह हमें जीवन के कठिन क्षणों को समझने में मदद करता है।

विदाई के इस भजन का अन्य धार्मिक ग्रंथों से क्या संबंध है?

यह भजन विदाई के भाव को दर्शाता है, जैसे रामायण में श्री राम का सीता को वनवास देना, जो जीवन के अनिवार्य सत्य को दर्शाता है।

इस भजन का पाठ किस समय करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह के समय करना विशेष लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह दिन की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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