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छठी मैया के होता आगमनी (Chhathi Maiya Ke Hota Aagman) - Pawan Singh Chhath Geet - Bhaktilok

95 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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छठी मैया की आगमन: भक्ति का महापर्व

छठी मैया के स्थायी और अपार कृपाओं का गुणगान करते हुए भक्ति गीत का जाप करें।

छठी मैया के होता आगमनी, छठी मैया के होता आगमनी। हमरे आँगन में भरके आई, छठी मैया के होता आगमनी। सूर्य देव की आराधना, भक्ति से करनी है सच्ची। छठी मैया के होती सावनी, छठी मैया के होता आगमनी। संग संग बेटी आओ प्यारी, छठी मैया को चढ़ाओ हार। फल फूल, खीर और छठी, सबको लाकर चढ़ाओ प्यारी। डीह की पूजा, ना छोड़े कोई, दिल से की प्रार्थना, नजर ना लगे। बूढ़ी झोली में लेकर आई, छठी मैया के होता आगमनी। हमरे आँगन में भरके आई, छठी मैया के होता आगमनी।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन छठी मैया के आगमन की खुशी को दर्शाता है, जो विशेष रूप से लोक आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। भक्ति भाव से गाए जा रहे इस गीत में देवी माता को आशीर्वाद देने और उनकी कृपा से जीवन की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जा रही है। इस भजन में 'छठी मैया' का जिक्र करते हुए यह बताया गया है कि कैसे भक्त अपने घर के आँगन में उनकी पूजा अर्चना करते हैं, और यह बताता है कि सूर्य देव की आराधना का क्या महत्व है। भक्त अपने हृदय से छठी मैया की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं।

इस भजन का भावार्थ भक्तों के हृदय में गहरी सच्ची भक्ति का संचार करता है। आने वाली छठी मैया की पूजा को मन से सम्पूर्ण करने की भावना को इस भजन में उजागर किया गया है। यह बताता है कि जब हम छठी मैया को आमंत्रित करते हैं, तब हमें न केवल वस्त्र-आभूषण से उनका स्वागत करना चाहिए बल्कि दिल से भी उनकी आराधना करनी चाहिए। 'प्यारी बेटी' का जिक्र यह भी दर्शाता है कि यह पर्व पारिवारिक एकता और भक्ति का संकेत है, जिसमें परिवार एक साथ आकर देवी की पूजा करते हैं।

भक्ति मार्ग का यह भजन सिखाता है कि हमें अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ साथ सही दान भी करना चाहिए। देवी माँ की पूजा में अनेकों प्रकार के फल, फूल, और मीठे भोग चढ़ाए जाते हैं, जो हमारे हृदय की शुद्धि का प्रतीक हैं। यह भजन बताता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और प्रेम के साथ देवी की पूजा में अपार फलदायी होती है। यहाँ छठी मैया का स्वरूप मातृत्व और पोषक तत्वों का प्रतीक है, जो हमें समर्पण एवं सेवा की भावना को समझाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का पौराणिक संदर्भ सूर्य देव और छठी मैया की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह त्योहार विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। छठ पर्व का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है, जहां सूर्य देवता को जल में जाकर उनकी आराधना की जाती है। इस प्रकार भजन भक्तों को प्राचीन परंपराओं से जोड़ता है और हमारे अतीत की संस्कृति को समझने का अवसर देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, भक्ति और आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। इसके नियमित जाप से मन की अशांति दूर होती है और भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। छठी मैया की कृपा से जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह-सुबह सूर्योदय से पहले करना सबसे उत्तम होता है। पूजा स्थान पर एक दीया जलाएं और वहां साफ-सफाई रखें। चढ़ाने के लिए फल, फूल और मिठाई तैयार करें। बैठने का सही समाधान है कि आप पद्मासन की मुद्रा में बैठें और मन को एकाग्र करके भजन का चिंतन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

छठी मैया का महत्व क्या है?

छठी मैया को सूर्य देवता की बहन माना जाता है और उनके प्रति भक्ति का भाव रखने वाले भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

छठ पर्व कब मनाया जाता है?

छठ पर्व मुख्यतः कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है, जिसमें भक्ति भाव से सूर्य देव की पूजा की जाती है।

क्या इस भजन का जाप जरूरी है?

भजन का जाप करने से माता की कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जो भक्त को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर लाभ पहुंचाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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