श्री महामृत्युंजय त्रयक्षर रक्षा मंत्र - ॐ हौं जूं सः मृत्यंजयय नमः अमोघ स्वास्थ्य एवं दीर्घायु साधना विधि
भावार्थ: हे मृत्यु को जीतने वाले भगवान शिव! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आप मुझे आरोग्य, दीर्घायु और भवबंधन से मुक्ति प्रदान करे…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे मृत्यु को जीतने वाले भगवान शिव! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आप मुझे आरोग्य, दीर्घायु और भवबंधन से मुक्ति प्रदान करे…
भावार्थ: हे माता लक्ष्मी सहित नृसिंह भगवान! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आप मुझे धन, ऐश्वर्य और सभी प्रकार की आपदाओं से सुरक्षा …
भावार्थ: उन भगवान महाविष्णु, वासुदेव, महासुदर्शन रूपी, धन्वंतरि भगवान को नमस्कार है जिनके हाथों में अमृत कलश है, जो समस्त व्याधिय…
भावार्थ: हम दिगंबर स्वरूप भगवान दत्तात्रेय को जानते हैं, उन योगेश्वर का हम ध्यान करते हैं, वे दत्तात्रेय भगवान हमें तीव्र ज्ञान औ…
भावार्थ: हे हयग्रीव भगवान! जो ज्ञान, ऐश्वर्य, और आकर्षण के स्वरूप हैं, आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: हे माँ कूष्माण्डायै! आपको बारंबार नमस्कार है। हे देवी, हमें विद्या (ऐं), माया व शक्ति (ह्रीं) तथा ऐश्वर्य (श्रीं) प्रदान…
भावार्थ: हे माँ तारा! माया, आकर्षण, प्राण शक्ति और भेदन करने वाली अपनी ऊर्जा से मुझे वाक् सिद्धि और मोक्ष प्रदान करें।
भावार्थ: समस्त ब्रह्मांड की स्वामिनी माँ भुवनेश्वरी को मेरा बारम्बार नमस्कार है, जो मुझे ह्रीं (माया), श्रीं (संपदा) और क्लीं (आक…
भावार्थ: भूमि पुत्र मंगल और देवताओं के गुरु बृहस्पति को बारंबार नमस्कार है, जो जीवन के सभी प्रकार के ऋण और आर्थिक बाधाओं का नाश क…
भावार्थ: उन भगवान कूर्म (कछुए के रूप में स्थित विष्णु) को मेरा नमस्कार है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड और पृथ्वी को अपने पृष्ठ भाग पर धा…
भावार्थ: वज्र वैरोचणी स्वरूपा माँ छिन्नमस्ता को नमस्कार, जो हमारे भीतर के शत्रुओं का नाश कर दिव्य चेतना जाग्रत करती हैं।
भावार्थ: हम अपराजिता (जिसे कोई पराजित न कर सके) देवी को जानते हैं, उन प्रहार करने वाली प्रचण्ड शक्ति का हम ध्यान करते हैं। माता प…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।