श्री अश्विनी कुमार आरोग्य मंत्र: ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः - असाध्य रोगों से मुक्ति और कायाकल्प साधना
भावार्थ: हे अश्विनी कुमारों! आपको मेरा नमन है।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
अपनी अभीष्ट साधना एवं आवश्यकतानुसार अभीष्ट मंत्र श्रेणी का चयन करें।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे अश्विनी कुमारों! आपको मेरा नमन है।
भावार्थ: सृष्टि के आदि स्रोत परमेश्वर स्वरूप हमारे समस्त दिव्य पितरों और पूर्वजों को मैं आदरपूर्वक नमन करता हूँ। वे हमें आशीर्वाद…
भावार्थ: हे राहु देव, मैं आपको नमन करता हूँ। आपके बीज मंत्रों के माध्यम से मैं आपकी कृपा और शांति की प्रार्थना करता हूँ।
भावार्थ: समस्त देवताओं की जननी, पवित्रता की मूर्ति और समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी सुरभि (कामधेनु) को मेरा नमस्कार है।
भावार्थ: सहस्र भुजाओं वाले राजा कार्तवीर्य अर्जुन का स्मरण करने मात्र से ही खोई हुई या चोरी हुई वस्तु पुनः प्राप्त हो जाती है।
भावार्थ: जो व्यक्ति चाहे अपवित्र स्थिति में हो या पवित्र स्थिति में, अथवा किसी भी अवस्था को प्राप्त हो, जो भगवान पुण्डरीकाक्ष (वि…
भावार्थ: हे महामाया, हे महायोगिनियों की अधीश्वरी मां कात्यायनी! आप नन्दगोप के सुत (श्रीकृष्ण) को जिस प्रकार अपनी पुत्री या भक्तों…
भावार्थ: महर्षि अगस्त्य के सिद्ध मूल मंत्र 'ॐ श्री अगस्त्याय नमः' से आरोग्य, लंबी आयु और समस्त बाधाओं का निवारण करने की संपूर्ण व…
भावार्थ: हे भगवान गणेश! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्म तत्व हैं। आप ही केवल सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता …
भावार्थ: हे गणपति भगवान! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्व हैं। आप ही केवल कर्ता, धर्ता और संहारक हैं। आप ही यह संपूर्ण ब्रह्…
भावार्थ: भगवान गणेश को ब्रह्मांड का सर्वोच्च ईश्वर, परम ब्रह्म और समस्त सिद्धियों का दाता स्वीकार करते हुए की गई अमोघ स्तुति।
भावार्थ: हे जातवेद अग्नि! आप ऐसी सुवर्ण के समान कांति वाली, हरिणी, सोने और चांदी की मालाओं से अलंकृत, चंद्रमा के समान कांतिमान और…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।