श्री राम तारक मंत्र - ॐ रां रामाय नमः एवं राम नाम की अनंत महिमा व जप रहस्य
भावार्थ: मैं भगवान राम को नमन करता हूँ, जो इस भवसागर से तारने वाले परम तारक ब्रह्म हैं।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
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शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: मैं भगवान राम को नमन करता हूँ, जो इस भवसागर से तारने वाले परम तारक ब्रह्म हैं।
भावार्थ: श्री राम तारक मंत्र 'ॐ रां रामाय नमः' समस्त पापों का नाश करने वाला और जीव को भवसागर से तारने वाला परम सिद्ध वैदिक व तांत…
भावार्थ: उन परम ब्रह्म स्वरूप भगवान श्री राम को मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है, जो भवसागर से तारने वाले तारक मंत्र के अधिष्ठान हैं।
भावार्थ: उन भगवान राम को मेरा बारंबार नमस्कार है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के आधार और भवसागर से तारने वाले हैं।
भावार्थ: परब्रह्म स्वरूप श्री राम को मेरा बारंबार प्रणाम है। यह बीज मंत्र अग्नि तत्त्व को प्रज्वलित कर समस्त पापों एवं बंधनों का …
भावार्थ: मैं बीज मंत्र 'रां' से युक्त भगवान श्री राम को सादर नमन करता हूँ, जो इस भवसागर से तारने वाले हैं।
भावार्थ: भगवान श्री राम के शीघ्र विवाह मंत्र और सुरक्षा कवच की संपूर्ण विधि जानें। मनचाहा जीवनसाथी पाने और घर की दैवीय सुरक्षा के…
भावार्थ: भगवान श्री राम के व्यापार वृद्धि मंत्र और सुरक्षा कवच का संपूर्ण विवरण। जानें विधि, अर्थ और आध्यात्मिक महत्व। Shri Ram M…
भावार्थ: भगवान श्री राम के शीघ्र विवाह मंत्र और सुरक्षा कवच का संपूर्ण विवरण। जानें विवाह बाधा निवारण, मनचाहा जीवनसाथी और दैवीय स…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।