Mantra Background & Vedic Origin (मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता)
वैदिक एवं तांत्रिक वांग्मय में भगवान श्री राम का नाम केवल एक नाम नहीं, अपितु संपूर्ण ब्रह्मांड की चेतना का प्रतीक है। रामतापनीय उपनिषद्, पद्म पुराण, अगस्त्य संहिता तथा श्री रामचरितमानस में राम नाम तथा राम तारक मंत्र की अनंत महिमा का वर्णन किया गया है। 'तारक' शब्द का अर्थ है — 'जो जीव को इस संसार-सागर अथवा भवसागर से तार दे'।
काशी के अविमुक्त क्षेत्र में जब किसी जीव का देहांत होता है, तो स्वयं भगवान देवाधिदेव महादेव उसके दाहिने कान में जिस महामंत्र का उपदेश देकर उसे मोक्ष प्रदान करते हैं, वह राम तारक मंत्र ही है। शास्त्र कहते हैं:
काशी क्षेत्रे मरिष्याणां रुद्रो मन्त्रं प्रदास्यति।
तारकं ब्रह्म परमं येन मुक्ता भवन्त्यपि॥
तारक मंत्र 'ॐ रां रामाय नमः' का उद्गम परब्रह्म की नाद-चेतना से हुआ है। इसमें प्रयुक्त बीज 'रां' (Rām) केवल एक वर्ण नहीं है, बल्कि यह अग्नि तत्व का बीजाक्षर है। अग्नि जिस प्रकार समस्त अशुद्धियों और पापों को भस्म कर देती है, उसी प्रकार 'रां' बीज साधक के जन्मांतरों के संचित पाप-कर्मों को भस्म करने की सामर्थ्य रखता है।
श्री रामचरितमानस में महामुनि तुलसीदास जी ने राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा है:
राम नाम नर केसरी, कनककसिपु कलिकाल।
जापक जन प्रहलाद जिमि, पालिहि दलि सुरसाल॥
वैदिक परंपरा के अनुसार, इस मंत्र के ऋषि ब्रह्मा अथवा वशिष्ठ हैं, छंद गायत्री है, और देवता साक्षात् परब्रह्म स्वरूप श्री रामचंद्र जी हैं।
Complete Sanskrit Mantra & Phonetic Transliteration (मूल शुद्ध मंत्र)
श्री राम तारक मंत्र का मूल संस्कृत रूप अत्यंत प्रभावकारी और बीजाक्षर-युक्त है। साधक को इसके शुद्ध उच्चारण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मुख्य तारक षडाक्षरी मंत्र
ॐ रां रामाय नमः॥
Om Ram Ramaya Namah||
अन्य प्रमुख राम तारक मंत्र रूप
साधना भेद एवं परंपरा के अनुसार राम तारक मंत्र के कुछ अन्य रूप भी अत्यंत प्रचलित हैं:
- एकाक्षरी राम बीज मंत्र:
रां(Rāṁ) - त्र्याक्षरी राम मंत्र:
ॐ रामाय नमः(Om Rāmāya Namaḥ) - त्रयोदशाक्षरी (13 अक्षरी) महामंत्र:
श्री राम जय राम जय जय राम(Śrī Rāma Jaya Rāma Jaya Jaya Rāma)
Word-by-Word Meaning & Spiritual Bhavarth (पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ)
तारक मंत्र के प्रत्येक अक्षर में संपूर्ण वेद और तंत्र का सार निहित है। इसका पद-दर-पद विश्लेषण इस प्रकार है:
| पद | अक्षर एवं बीज | शब्दार्थ व आध्यात्मिक रहस्य |
|---|---|---|
| ॐ | प्रणव | अनाहत नाद, परमेश्वर का सर्वव्यापी स्वरूप जो अ-कार (सृष्टि), उ-कार (स्थिति) और म-कार (लय) का प्रतीक है। |
| रां (Rām) | रामेति बीजम् | 'र' (अग्नि बीज - पापदाहक) + 'आ' (सूर्य कला - अज्ञाननाशक) + 'म' (चंद्र कला - शांतिप्रद)। यह कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करने वाला महाबीज है। |
| रामाय (Rāmāya) | चतुर्थी विभक्ति | 'रमन्ते योगिनो यस्मिन् स रामः' — जिसमें योगी जन रमण करते हैं, उस परब्रह्म श्री राम के लिए। |
| नमः (Namaḥ) | नमस् (न + मम) | 'न मम' अर्थात 'यह मेरा नहीं है, सब कुछ ईश्वर का है'। यह अहंकार का पूर्ण समर्पण दर्शाता है। |
गहन आध्यात्मिक भावार्थ
ॐ रां रामाय नमः का गूढ़ भावार्थ यह है: