श्री कृष्ण महामंत्र - हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे सम्पूर्ण भावार्थ व कीर्तन
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों को दूर करने वाले) भगवान कृष्ण! और हे रमण करने वाले भगवान राम! कृपया मुझे अपनी अनन्य भक्ति प्रदान…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
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शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों को दूर करने वाले) भगवान कृष्ण! और हे रमण करने वाले भगवान राम! कृपया मुझे अपनी अनन्य भक्ति प्रदान…
भावार्थ: हे हरण करने वाले, आकर्षित करने वाले सर्वेश्वर कृष्ण और आनंदस्वरूप राम! कृपया मुझे अपनी भक्ति प्रदान करें।
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों और कर्म बंधनों के), हे कृष्ण (सर्वआकर्षक सच्चिदानंद स्वरूप), हे राम (परम आनंद के आधान), मुझ पर क…
भावार्थ: हे भगवान! हे सर्वआकर्षक कृष्ण! हे सर्वानंद प्रदाता राम! कृपया मुझे अपनी भक्ति में संलग्न करें।
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों को दूर करने वाले) और हे सर्वआकर्षक भगवान कृष्ण! हे आनंद के स्रोत भगवान राम! मुझ पर कृपा करें और …
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों और पापों को), हे सर्वआकर्षक भगवान कृष्ण! हे रमण करने वाले आनंदस्वरूप भगवान राम! कृपा करके मुझे अ…
भावार्थ: भगवान श्री कृष्ण के वास्तु दोष नाशक शाबर मंत्र का अर्थ, विधि और महत्व जानें। नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए गुरु गोरखना…
भावार्थ: भगवान श्री कृष्ण के शक्तिशाली शाबर मंत्र का अर्थ, जाप विधि और महत्व जानें। शत्रु बाधा और नजर दोष से मुक्ति के लिए गुरु ग…
भावार्थ: भगवान श्री कृष्ण के वास्तु दोष नाशक शाबर मंत्र का अर्थ, विधि और महत्व जानें। नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए यह एक पारंप…
भावार्थ: भगवान श्री कृष्ण के शक्तिशाली शाबर रक्षा मंत्र का अर्थ, विधि और महत्व जानें। शत्रु बाधा और नजर दोष से मुक्ति के लिए यह ए…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।