ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै – The 18-Syllable Mahalakshmi Mantra: Meaning, Benefits & Chanting
भावार्थ: ॐ, तीनों लोकों की महालक्ष्मी को नमन। हमारी दरिद्रता का नाश करें और हमें प्रचुर धन प्रदान करें, प्रदान करें।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
अपनी अभीष्ट साधना एवं आवश्यकतानुसार अभीष्ट मंत्र श्रेणी का चयन करें।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: ॐ, तीनों लोकों की महालक्ष्मी को नमन। हमारी दरिद्रता का नाश करें और हमें प्रचुर धन प्रदान करें, प्रदान करें।
भावार्थ: जो मेरी कृपा प्राप्त कर लेता है, वह मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त हो जाता है, धन-धान्य से परिपूर्ण होता है, और संतान सुख प्…
भावार्थ: हे मधुसूदन (मधु नामक दैत्य के वधकर्ता) की प्रियतमा, देवताओं को प्रसन्न करने वाली, सभी दुखों को दूर करने वाली, नौ प्रकार …
भावार्थ: कमल पर विराजमान, मोक्ष प्रदान करने वाली और ज्ञान का विस्तार करने वाली विजयलक्ष्मी की जय हो। यह मंत्र सभी कार्यों में सफल…
भावार्थ: गरुड़ पर विराजमान मोहिनी (लक्ष्मी) से प्रार्थना है कि वे हमारी रक्षा करें और हमें संतान और परिवार का आशीर्वाद प्रदान करे…
भावार्थ: जय-जय हे मधुसूदन (विष्णु) की प्रियतमा, गजलक्ष्मी (हाथियों, रथों और घोड़ों की सेना से घिरी हुई राजसमृद्धि की देवी), जिनकी…
भावार्थ: जय-जय हे मधुसूदन (विष्णु) की प्रियतमा, धैर्यलक्ष्मी (साहस की देवी), सदा मेरी रक्षा करो।
भावार्थ: जय-जय हे मधुसूदन (विष्णु) की प्रियतमा, धान्यलक्ष्मी (अन्न की देवी), सदा मेरी रक्षा करो।
भावार्थ: जय-जय हे मधुसूदन (विष्णु) की प्रियतमा, आदिलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करो।
भावार्थ: हे महालक्ष्मी, जो ह्रीं (हृदय) और क्लीं (इच्छा) के बीज मंत्रों से आवाहन की जाती हैं, आपको नमस्कार है।
भावार्थ: ॐ, ह्रीं, श्रीं, क्रीं, श्रीं, क्रीं, क्लीं, श्रीं। हे महालक्ष्मी, मेरे घर को धन से परिपूर्ण करें, परिपूर्ण करें और मेरी…
भावार्थ: हे महामाया, श्रीपीठ (क्षीरसागर) में निवास करने वाली तथा देवताओं द्वारा पूजित देवी, शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।