मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता
सनातन संस्कृति में 'राम' नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्म का स्पंदन है। राम तारक मंत्र, विशेष रूप से बीज मंत्र 'ॐ रां रामाय नमः', वेदों और उपनिषदों का सार है। तारक का अर्थ होता है - जो भवसागर से पार उतार दे। जिस प्रकार नौका नदी पार कराती है, उसी प्रकार श्री राम का यह तारक मंत्र जीव को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाकर परमधाम की प्राप्ति कराता है।
तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है— 'महामंत्र जोइ जपत महेश्वर, केसा नाम तारक अविनाशी।' अर्थात, भगवान शंकर स्वयं जिस महामंत्र का जप करते हैं, वह अविनाशी तारक 'राम' नाम ही है। इस मंत्र के ऋषि वशिष्ठ या वाल्मीकि माने जाते हैं, अनुष्टुप या गायत्री इसका छंद है, और परमात्मा श्री राम इसके अधिष्ठाता देवता हैं। इस मंत्र का स्मरण करते ही व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रस्फुटन होने लगता है।
मूल शुद्ध मंत्र एवं लिपि
साधना की दृष्टि से मंत्र का उच्चारण और उसकी वर्तनी अत्यंत शुद्ध होनी चाहिए। श्री राम तारक बीज मंत्र का देवनागरी और आंग्ल रूपांतरण निम्नलिखित है:
देवनागरी लिपि: ॐ रां रामाय नमः
रोमन लिपि : Om Raṁ Rāmāya Namaḥ
इस मंत्र में 'ॐ' प्रणव मंत्र है जो ब्रह्मांडीय नाद का प्रतीक है। 'रां' इसका बीज अक्षर है जो अग्नि तत्व और तेजस्विता को जाग्रत करता है। 'रामाय' चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग समर्पण और आदर भाव को दर्शाता है, तथा 'नमः' का अर्थ साधक के अहंकार का विसर्जन और पूर्ण शरणागति है।
पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ
मंत्र के प्रत्येक अक्षर और शब्द का अपना आत्मीय एवं दार्शनिक महत्व है। आइए इसके पद-दर-पद अर्थ को समझें:
- ॐ : यह सर्वोच्च ब्रह्मांडीय ध्वनि है, जिसमें त्रिगुण (सत्व, रज, तम) और तीनों लोक (भू, भुवः, स्वः) समाहित हैं।
- रां : यह राम मंत्र का बीज रूप है। यह सूर्य की भांति साधक के भीतर के अंधकार (अज्ञान) को जलाने की क्षमता रखता है।
- रामाय : इसका अर्थ है 'राम के लिए' अथवा 'राम को'। यह चतुर्थी विभक्ति है जो समर्पण का भाव प्रकट करती है।
- नमः : इसका अर्थ है प्रणाम या नमस्कार। यह साधक के अहम् को शून्य कर परमात्मा के चरणों में समर्पित होने की मुद्रा है।
समग्र भावार्थ: 'हे संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी श्री राम! मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। मेरे समस्त कर्म, विचार और जीवन आपके चरणों में समर्पित हैं। मुझे इस भवसागर के बंधनों से मुक्त कीजिए।'
विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक
किसी भी वैदिक या तांत्रिक मंत्र के अनुष्ठान से पूर्व विनियोग और न्यास का अत्यधिक महत्व होता है। यह साधना को एक निश्चित दिशा और सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
विनियोग
हाथ में जल लेकर निम्नलिखित मंत्र बोलें और जल को जमीन पर छोड़ दें:
अस्य श्री राम तारक मंत्रस्य वशिष्ठ ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीरामाचंद्रो देवता, रां बीजं, नमः शक्तिः, रामाय कीलकं, श्री रामचन्द्र प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।
ऋष्यादि न्यास
- शिरसि वशिष्ठ ऋषये नमः (सिर पर हाथ रखें)
- मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः (मुख का स्पर्श करें)
- हृदि श्रीरामाचंद्र देवतायै नमः (हृदय पर हाथ रखें)
- गुह्ये रां बीजाय नमः (गुह्य भाग पर ध्यान करें)
- पादयो नमः शक्तये नमः (चरणों में ध्यान करें)
- सर्वांगे कीलकाय नमः (पूरे शरीर पर हाथ फेरें)
ध्यान श्लोक
जप शुरू करने से पहले भगवान श्री राम के इस सुंदर स्वरूप का ध्यान करें:
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं, पीतं वासोनसानं नवददलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामङ्गे सीतायुक्तं सुमुखमरमं मणिकोटिनिभाभं, कान्तं कारुण्यरूपां गुणगणनिलयं रामचन्द्रं स्मरामि॥
जप विधि, नियम एवं माला चयन
श्री राम तारक मंत्र का जप अत्यधिक सरल होते हुए भी अत्यंत शक्तिशाली है। इसके लिए कुछ विशिष्ट नियमों का पालन करना आवश्यक है:
- शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक) या प्रदोष काल में जप करना सर्वश्रेष्ट फलदायी होता है।
- दिशा: साधक का मुख पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- आसन: कुश या ऊनी आसन पर बैठकर ही जप करना चाहिए। सीधे जमीन पर बैठकर जप न करें।
- माला का चयन: तुलसी की माला इस मंत्र के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा, रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का उपयोग भी किया जा सकता है।
- जप संख्या: कम से कम एक माला (108 बार) प्रतिदिन जप अवश्य करना चाहिए। विशेष अनुष्ठान में 11, 21 या 125100 आहुतियों का विधान है।
विशिष्ट लाभ एवं फलश्रुति
नियमित रूप से 'ॐ रां रामाय नमः' का जप करने से साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर असीम लाभ प्राप्त होते हैं:
- मानसिक शांति व स्थिरता: मन का भटकाव दूर होता है, तनाव, चिंता और डिप्रेशन से मुक्ति मिलती है।
- अकाल मृत्यु व भय का नाश: हनुमान जी और यमराज भी राम भक्त के सामने नतमस्तक होते हैं। भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं का भय समाप्त होता है।
- रोग मुक्ति एवं आरोग्य: भगवान राम के स्मरण मात्र से शारीरिक बीमारियां दूर होती हैं और ओज तथा तेज की वृद्धि होती है।
- मोक्ष की प्राप्ति: अंत समय में राम नाम का स्मरण करने वाले जीव को सीधे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है, जैसा कि शास्त्रों में वर्णित है कि स्वयं महादेव काशी में मरने वाले को तारक मंत्र का उपदेश देते हैं।
सावधानियां एवं नियम
मंत्र साधना की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- जप काल में सात्विक आहार (प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन का त्याग) का पालन करें।
- क्रोध, अहंकार और असत्य बोलने से बचें।
- मंत्र जप निश्चित समय और निश्चित स्थान पर करें ताकि ऊर्जा का संचय हो सके।
- यदि किसी दिन व्यवधान आ जाए, तो मानसिक रूप से जप जारी रखें।