वैदिक नाद एवं मंत्र सागर सम्पूर्ण मंत्र संग्रह 108 जप काउंटर

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र सूची एवं साधना निर्देशिका

सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।

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पावन मंत्र संग्रह (Mantra Directory)

शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।

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केतु ग्रह देवता 110

कृष्ण मूल मंत्र एवं केतु ग्रह देवता के प्राचीन मंत्र

ॐ स्रां स्रीं सौं सः केतवे नमः

भावार्थ: ॐ ब्रह्म स्वरूप परमात्मा को नमस्कार है। स्रां स्रीं सौं सः (बीज मंत्र) केतु ग्रह की ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक हैं। हे केत…

माँ प्रत्यंगिरा 102

श्री प्रत्यंगिरा देवी मंत्र - ॐ अपराजितायै विद्महे शत्रु निषूदिल्यै धीमहि तन्नो शक्तिः प्रचोदयात् घोर शत्रु बाधा व तंत्र दोष निवारण

ॐ अपराजितायै विद्महे शत्रु निषूदिल्यै धीमहि तन्नो शक्तिः प्रचोदयात्

भावार्थ: हम अपराजिता स्वरूपा माँ प्रत्यंगिरा को जानते हैं, शत्रुओं का नाश करने वाली देवी का ध्यान करते हैं। वह शक्ति स्वरूपा हमें…

माँ तारा 52

श्री तारा महाविद्या मंत्र - ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् अमोघ संकट मुक्ति, धन लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति साधना

ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्

भावार्थ: हे माँ तारा, आप समस्त ब्रह्मांड की शक्ति हैं। आप मेरे अज्ञान, दरिद्रता और संकटों का विनाश करें और मुझे मोक्ष प्रदान करें…

भगवान विष्णु एवं सुदर्शन चक्र 44

श्री सुदर्शन चक्र महामंत्र - ॐ क्लीं कृष्णाय क्लीं गोविन्दाय क्लीं गोपीजन वल्लभाय स्वाहा एवं सुदर्शन चक्र सुरक्षा कवच साधना

ॐ क्लीं कृष्णाय क्लीं गोविन्दाय क्लीं गोपीजन वल्लभाय स्वाहा

भावार्थ: हे कृष्ण, हे गोविंद, हे गोपीजन वल्लभ! हम आपको बार-बार नमन करते हैं और सर्वस्व समर्पण करते हैं।

भगवान महाविष्णु / विराट पुरुष 58

पुरुष सूक्त अर्थ सहित

ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्। स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम्।। (प्रथमा ऋचा)

भावार्थ: उस विराट पुरुष (परमात्मा) के हजारों सिर, हजारों नेत्र और हजारों पैर हैं। उन्होंने सम्पूर्ण पृथ्वी को चारों ओर से व्याप्त…

भगवान शिव (महामृत्युंजय) 37

श्री महामृत्युंजय त्रयोदशाक्षर मंत्र - ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय सः जूं हौं अमोघ आयु रक्षा और आरोग्य महामंत्र

ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय सः जूं हौं

भावार्थ: हे सर्वव्यापिन् और त्रयोदशाक्षर रूपी प्राणस्वरूप शिव! आप मेरी रक्षा करें, मेरी रक्षा करें।

भगवान मंगल (भौम, अंगारका) 35

मंगल ग्रह शांति मंत्र: ॐ भौं भौमाय नमः एवं ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

ॐ भौं भौमाय नमः एवं ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

भावार्थ: मंगल देव को बारम्बार नमस्कार है, जो ऊर्जा, साहस, भूमि और पराक्रम के स्वामी हैं।

माता महालक्ष्मी 53

श्री सूक्तम: ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् (16 ऋचाएं एवं अर्थ)

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

भावार्थ: हे जातवेद अग्नि देव! सोने के समान कांति वाली, हरिणी (मन को आकर्षित करने वाली), स्वर्ण और रजत की मालाओं से सुसज्जित, चंद्…

भगवान शिव 42

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् (अर्थ, विधि व लाभ)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध (दिव्य ज्ञान और यश) फैलाते हैं और हमारा पोषण करते …

भगवान चंद्र देव 25

चंद्र ग्रह शांति मंत्र: ॐ सों सोमाय नमः एवं ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः

ॐ सों सोमाय नमः एवं ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः

भावार्थ: सोम (चंद्रमा) को हमारा बारंबार नमस्कार है, जो हमारे मन को शीतलता, शांति और अमृत तत्व प्रदान करते हैं।

माता सरस्वती 124

सरस्वती विद्या मंत्र: अर्थ, महत्व और जाप विधि

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः एवं ॐ ऐं वाग्देव्यै च विद्महे

भावार्थ: सरस्वती विद्या मंत्र का अर्थ है कि हम उन वाग्देवी, माता सरस्वती को बारम्बार नमस्कार करते हैं जो विद्या, बुद्धि, कला और स…

अनंत, वासुकी एवं समस्त नाग देवता 25

श्री कूर्म वासुकी नाग मंत्र - ॐ अनन्ताय वासुकये च पद्मनाभाय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात् भूमि दोष एवं नाग दोष निवारण

ॐ अनन्ताय वासुकये च पद्मनाभाय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्

भावार्थ: हम अनंत, वासुकी और पद्मनाभ स्वरूप नाग देवताओं का ध्यान करते हैं। वे नाग देवता हमें सन्मार्ग की प्रेरणा दें और हमारी बुद्…

वैदिक मंत्र विज्ञान, साधना विधि एवं 108 जप रहस्य

सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।

1. नाद और ध्वनि तरंगों का प्रभाव

संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।

2. 108 बार जप का खगोलीय रहस्य

वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।

मंत्र जप के तीन प्रमुख प्रकार (Types of Mantra Japa)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

भक्तिलोक पर प्रस्तुत समस्त मंत्र एवं साधना सामग्री उपलब्ध सनातन धर्मग्रंथों एवं परंपराओं के संदर्भ पर आधारित संपादकीय रूप से तैयार की गई है।
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