श्री शिव पंचाक्षर मंत्र - ॐ नमः शिवाय सम्पूर्ण 5 तत्वों का रहस्य एवं ध्यान विधि
भावार्थ: भगवान शिव के षडक्षर और पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' में सृष्टि के पाँचों महाभूतों (तत्वों) का रहस्य छिपा है। इसके नियमित…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: भगवान शिव के षडक्षर और पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' में सृष्टि के पाँचों महाभूतों (तत्वों) का रहस्य छिपा है। इसके नियमित…
भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दीजिए, शत्रुओं का पूर्ण स्तम्भन हो।
भावार्थ: उन भगवान वासुदेव स्वरूप श्री धन्वंतरि को नमस्कार है, जिनके हाथों में अमृत कलश है, जो समस्त रोगों का नाश करने वाले हैं और…
भावार्थ: हम उन उग्र, वीर, महाविष्णु रूपी, प्रज्वलित, सर्वतोमुखी, भीषण, कल्याणकारी और मृत्यु के भी मृत्यु रूप भगवान नरसिंह को नमस्…
भावार्थ: सर्वोच्च वाणी, बुद्धि और विद्या की देवी भगवती सरस्वती को मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: उन भगवान शनैश्चर को मेरा बार-बार नमस्कार है, जो धीरे-धीरे चलते हैं और जगत के कर्मों का निष्पक्ष न्याय करते हैं।
भावार्थ: हे भैरव देव! आपको मेरा बारंबार प्रणाम है, आप मेरे जीवन के समस्त भयों और शत्रुओं का नाश करें।
भावार्थ: हम भगवान आदित्य (अदिति के पुत्र सूर्य) को जानते हैं, प्रभाकर (प्रकाश करने वाले) का ध्यान करते हैं। वे सूर्य देव हमारी बु…
भावार्थ: माँ दुर्गा का नवार्ण मंत्र नौ अक्षरों वाला अत्यंत शक्तिशाली महामंत्र है। इस विस्तृत गाइड में जानें नवार्ण मंत्र का उद्गम…
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों को दूर करने वाले) भगवान कृष्ण! और हे रमण करने वाले भगवान राम! कृपया मुझे अपनी अनन्य भक्ति प्रदान…
भावार्थ: मैं भगवान राम को नमन करता हूँ, जो इस भवसागर से तारने वाले परम तारक ब्रह्म हैं।
भावार्थ: भगवान वासुदेव को मेरा बारम्बार नमस्कार है, जो संपूर्ण ऐश्वर्य, शक्ति, यश, और ज्ञान से परिपूर्ण हैं।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।