श्री सूर्य गायत्री मंत्र - ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्
भावार्थ: हे आदिति पुत्र सूर्य देव! हम आपको जानते हैं, हे प्रभाकर (प्रकाश देने वाले)! हम आपका ध्यान करते हैं। वह सूर्य देव हमारी ब…
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे आदिति पुत्र सूर्य देव! हम आपको जानते हैं, हे प्रभाकर (प्रकाश देने वाले)! हम आपका ध्यान करते हैं। वह सूर्य देव हमारी ब…
भावार्थ: हे महामाया! वाग्देवी (ऐं), माया (ह्रीं) और कामराज (क्लीं) बीज मंत्रों से युक्त होकर आप चामुण्डा रूप में प्रकट हों और हमा…
भावार्थ: हे हरण करने वाले (दुखों को दूर करने वाले) और हे सर्वआकर्षक भगवान कृष्ण! हे आनंद के स्रोत भगवान राम! मुझ पर कृपा करें और …
भावार्थ: परब्रह्म स्वरूप श्री राम को मेरा बारंबार प्रणाम है। यह बीज मंत्र अग्नि तत्त्व को प्रज्वलित कर समस्त पापों एवं बंधनों का …
भावार्थ: भगवान वासुदेव को मेरा बारम्बार नमस्कार है, जो संपूर्ण ऐश्वर्य, शक्ति, यश, वैभव, ज्ञान और वैराग्य से युक्त हैं।
भावार्थ: यक्षों के आधिपत्य, धन के संरक्षक और विश्व के समस्त धन-धान्य के स्वामी भगवान कुबेर को मेरा बारंबार नमस्कार है। हे प्रभु, …
भावार्थ: परमब्रह्म स्वरूप ॐ, लक्ष्मी बीज श्रीं, माया बीज ह्रीं, तथा कामराज बीज क्लीं से युक्त महालक्ष्मी देवी को मेरा बारंबार प्र…
भावार्थ: परब्रह्म स्वरूप श्री गणेश, जो समस्त गणों और ऊर्जाओं के स्वामी हैं, मैं उनके बीज तत्व 'गं' को नमन करता हूँ।
भावार्थ: उन हनुमान जी को मेरा बारंबार नमस्कार है, जिनका बीज मंत्र 'हं' है और जो महान शक्ति के भंडार हैं।
भावार्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक देवस्वरूपी परमात्मा का हम ध्यान करते हैं; जो हमारी बुद्धि…
भावार्थ: हम भगवान शिव (त्रिनेत्रधारी) की पूजा करते हैं, जो हर कण में सुगंध फैलाते हैं और संपूर्ण जगत का पोषण करते हैं। जिस प्रकार…
भावार्थ: मैं उन हनुमान जी को नमस्कार करता हूँ जिनकी ठुड्डी (हनु) बढ़ी हुई है और जो समस्त संकटों का नाश करने वाले हैं।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।