श्री सरस्वती बीज मंत्र - ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः विद्या, ज्ञान व तीव्र स्मरण शक्ति प्राप्ति
भावार्थ: हे वाग्देवी माँ सरस्वती! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आपके बीज 'ऐं' से मुझ में ज्ञान, वाणी और मेधा शक्ति का संचार हो।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे वाग्देवी माँ सरस्वती! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आपके बीज 'ऐं' से मुझ में ज्ञान, वाणी और मेधा शक्ति का संचार हो।
भावार्थ: उन भगवान शनैश्चर को मेरा बारम्बार नमस्कार है, जो धीरे-धीरे चलते हैं और समस्त कर्मों के न्यायधीश हैं।
भावार्थ: हे भैरव देव! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है। आपके बीज मंत्र 'भ्रं' के प्रभाव से मेरे समस्त भय और शत्रुओं का नाश हो।
भावार्थ: हम आदित्यों के मुख्य स्वरूप भगवान सूर्य को जानते हैं, प्रभाकर (प्रकाश करने वाले) का हम ध्यान करते हैं। वे सूर्य देव हमार…
भावार्थ: हे माँ दुर्गा! आप महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली के रूप में हमारी बुद्धि, धन और कर्म की रक्षा करें तथा हमारे अज्ञान क…
भावार्थ: हे भगवान! हे सर्वआकर्षक कृष्ण! हे सर्वानंद प्रदाता राम! कृपया मुझे अपनी भक्ति में संलग्न करें।
भावार्थ: उन भगवान राम को मेरा बारंबार नमस्कार है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के आधार और भवसागर से तारने वाले हैं।
भावार्थ: मैं भगवान वासुदेव को नमस्कार करता हूँ।
भावार्थ: यक्षों के राजा, विश्व के धनाधीश और महर्षि विश्रवा के पुत्र भगवान कुबेर को मेरा बारंबार प्रणाम है। वे मुझे धन और धान्य का…
भावार्थ: माता लक्ष्मी के बीज मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' के विधिवत जाप से जीवन में धन, धान्य, ऐश्वर्य और आध्यात्…
भावार्थ: सच्चिदानंद परब्रह्म स्वरूप, मूलाधार चक्र में स्थित, समस्त गणों के स्वामी भगवान श्री गणेश को मेरा बारंबार प्रणाम है।
भावार्थ: हे हनुमान जी! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है, आप मेरे सभी संकटों का निवारण करें।
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।