श्री कुबेर मंत्र - ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः अष्ट लक्ष्मी व धन वृद्धि
भावार्थ: हे यक्षराज, कुबेर, वैश्रवण (विश्वश्रवा के पुत्र), समस्त धन और धान्य के आधिपत्य (स्वामी) आपको मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे यक्षराज, कुबेर, वैश्रवण (विश्वश्रवा के पुत्र), समस्त धन और धान्य के आधिपत्य (स्वामी) आपको मेरा कोटि-कोटि प्रणाम है।
भावार्थ: भगवती महालक्ष्मी के त्रिबीजात्मक महामंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' का शास्त्रोक्त साधना विधान, बीज मंत्रों…
भावार्थ: हम समस्त विघ्नों के निवारक, गणों के स्वामी श्री गणेश को नमस्कार करते हैं और उनके बीज मंत्र 'गं' का आह्वान करते हैं।
भावार्थ: मैं बीज मंत्र 'हं' के स्वरूप, भगवान हनुमान को सादर नमन करता हूँ।
भावार्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक देवस्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं। वह परमात्मा हमार…
भावार्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर श्वास में सुगंध फैलाते हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे ककड़ी पकने…
भावार्थ: समस्त गुरुओं को मेरा बारंबार नमस्कार है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
भावार्थ: हे महालक्ष्मी स्वरूपा श्री राधा रानी! आपको मेरा कोटि-कोटि नमन है, मेरी समस्त साधना आपके चरणों में समर्पित हो।
भावार्थ: मैं भगवान शिव को नमस्कार करता हूँ, जो इस ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त हैं।
भावार्थ: हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दीजिए तथा शत्रु के कुप्रयासों को रोक दीजिए।
भावार्थ: भगवान वासुदेव रूपी धन्वंतरि, जो अपने हाथों में अमृत कलश धारण किए हैं, जो समस्त व्याधियों (रोगों) के नाशक और त्रैलोक्य के…
भावार्थ: मैं उन परम पराक्रमी, महाविष्णु स्वरूप, प्रदीप्त अग्नि के समान देदीप्यमान, सर्वव्यापी, अत्यंत भयानक एवं साथ ही भक्तों के …
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।