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माँ भगवती शक्ति कृपा · माँ बगलामुखी देवी Mantra

श्री बगलामुखी मंत्र - ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रु स्तम्भन

श्री बगलामुखी मंत्र (ॐ ह्लीं बगलामुखि...) का संपूर्ण विधान, पद-दर-पद अर्थ, ध्यान श्लोक, माला और जप नियम पढ़ें। माँ बगलामुखी की कृपा प्राप्त करें।

इष्ट देव माँ बगलामुखी देवी
शास्त्र स्रोत वैदिक सनातन धर्मग्रंथ एवं संहिता
उत्तम जप समय मध्य रात्रि या ब्रह्म मुहूर्त (निशीथ काल)
अनुशंसित माला हल्दी की माला / रुद्राक्ष माला

मूल संस्कृत महामंत्र

शुद्ध शास्त्रीय पाठ एवं उच्चारण स्वरूप

॥ ॐ तत्सत् · सिद्ध वैदिक महामंत्र ॥
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रु स्तम्भन...
सरल हिंदी भावार्थ:

हे माँ बगलामुखी! सभी दुष्टों की वाणी, मुख और पैरों को स्तम्भित कर दीजिए तथा शत्रु के कुप्रयासों को रोक दीजिए।

विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं शास्त्रीय विवेचन

मंत्र का गूढ़ रहस्य एवं साधना विधि

मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता

सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में दस महासविद्याओं का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इन दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पीतवर्णा माँ बगलामुखी की उपासना की जाती है। माँ बगलामुखी को ब्रह्मांड की स्तंभन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। 'बगला' शब्द असल में 'बल्गा' (लगाम) का अपभ्रंश है, जो माँ को संसार की समस्त गतियों, शत्रुओं की कुबुद्धि और बुरी ताकतों को नियंत्रित करने वाली शक्ति के रूप में स्थापित करता है। इनका वर्ण पीला है, ये पीले वस्त्र धारण करती हैं और इनका प्राकट्य स्थल गुजरात के हरिद्रा सरोवर (हल्दी की झील) को माना जाता है।

वैदिक और तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार, जब सतयुग में महाविनाशक ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे समस्त चराचर जगत नष्ट होने लगा, तब भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र देश के हरिद्रा सरोवर के तट पर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ बगलामुखी अवतरित हुईं और उन्होंने इस भयंकर संकट को स्तंभित (रोक) कर ब्रह्मांड की रक्षा की। इसी कारण इन्हें स्तंभन की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है। इस महाविद्या के ऋषि नारद मुनि हैं, छंद त्रिष्टुप है, और देवता स्वयं पीताम्बरा माँ बगलामुखी हैं।

मूल शुद्ध मंत्र एवं लिप्यंतरण

माँ बगलामुखी का यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली और तांत्रिक दृष्टि से अचूक माना जाता है। इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर एक ब्रह्मांडीय बीज है, जो साधक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण करता है और विरोधी ताकतों को निष्क्रिय कर देता है।

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रु स्तम्भन। जिह्वयां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्लीं ॐ नमः॥

पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र के प्रत्येक शब्द का गहरा आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ है। जब साधक इन शब्दों का उच्चारण करता है, तो ब्रह्मांडीय ऊर्जा सक्रिय हो जाती है:

  • ॐ: प्रणव मंत्र, संपूर्ण ब्रह्मांड की मूल ध्वनि और परमात्मा का प्रतीक।
  • ह्लीं: बगलामुखी का मुख्य बीज मंत्र, जिसे माया बीज या लज्जा बीज भी कहा जाता है। यह आकर्षण, स्तंभन और उच्च चेतना को जागृत करता है।
  • बगलामुखि: हे माँ बगलामुखी! (जो ब्रह्मांड की हर गतिविधि को नियंत्रित करती हैं)।
  • सर्वदुष्टानां: सभी प्रकार के दुष्टों, शत्रुओं, और नकारात्मक ऊर्जाओं के।
  • वाचं: वाणी को (अर्थात शत्रु के बोलने की शक्ति को)।
  • मुखं: मुख को (अर्थात उसके तर्क और कुतर्क को)।
  • पदं: पैरों को (अर्थात उसकी चाल और गति को)।
  • स्तम्भय: स्तंभित कर दीजिए (जड़ या गतिहीन कर दीजिए)।
  • शत्रु स्तम्भन: शत्रु के समस्त षड्यंत्रों और आक्रमणों को रोक दीजिए।
  • जिह्वयां कीलय: उसकी जीभ को कीलित (बांध) दीजिए ताकि वह असत्य या अनर्थ न बोल सके।
  • बुद्धिम विनाशय: उसकी दुष्ट बुद्धि का नाश कीजिए (उसे सद्बुद्धि दें या उसकी कुटिलता समाप्त करें)।
  • नमः: देवी को मेरा बारंबार प्रणाम है।

विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक

किसी भी मंत्र के अनुष्ठान से पहले उसका विनियोग और ध्यान करना अनिवार्य माना जाता है ताकि मंत्र की ऊर्जा सही दिशा में प्रवाहित हो सके।

विनियोग

अस्य श्री बगलामुखी महामंत्रस्य नारद ऋषिः, त्रिष्टुप छन्दः, बगलामुखी देवता, ह्लीं बीजम्, स्वाहा शक्तिः, सर्व-दुष्ट-स्तम्भनार्थे जपे विनियोगः॥

ऋषि आदि न्यास

नारद ऋषये नमः शिरसि। त्रिष्टुप छन्दसे नमः मुखे। बगलामुखी देवतायै नमः हृदि। ह्लीं बीजाय नमः गुह्ये। स्वाहा शक्तये नमः पादयोः। विनियोगः नमः सर्वांगे॥

ध्यान श्लोक

द्योताभासामलकांतिकान्तिरुचिरां नागेन्द्रफाणोज्ज्वलाम्,
व्याघ्राजीनधरां सुरासुरमनः संतापहरां सुव्रताम्。
हस्ताभ्यां मुदगर्विदारितरिपुं देव्यायुधैर्भूषिताम्,
पीताम्बरां त्रिनेत्रां भजतु भगवतीं स्तंभिनीं सर्वविद्याम्॥

ध्यान का भावार्थ: जिनका शरीर पीले रंग की कांति से चमक रहा है, जो नागराज के फण से सुशोभित हैं, बाघ की खाल धारण करती हैं, जो देवताओं और असुरों का संताप हरने वाली हैं, जिनके हाथ में शत्रुओं का नाश करने वाला मुदगर (गदा) है, जो पीतांबर वस्त्र पहने हैं और तीन नेत्रों वाली हैं—ऐसी सर्वविद्याओं की स्तंभिनी देवी भगवती बगलामुखी का हम भजन करते हैं।

जप विधि व नियम

माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत गोपनीय और अनुशासन प्रिय होती है। इसके लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना अति आवश्यक है:

  • दिशा: साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
  • आसन: पीले रंग का ऊनी या कुशा का आसन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • वस्त्र: पीले रंग के वस्त्र पहनना अनिवार्य है क्योंकि पीला रंग माँ बगलामुखी को अत्यंत प्रिय है।
  • माला: हल्दी की गांठों से बनी माला (हरिद्रा माला) या स्फटिक की माला का प्रयोग करना चाहिए।
  • समय: इस मंत्र का जप अर्धरात्रि (निशीथ काल) या ब्रह्म मुहूर्त में करना सबसे अधिक फलदायी होता है।
  • संख्या: प्रतिदिन कम से कम 1 माला (108 बार) का जप करें। विशेष सिद्धि के लिए संकल्प लेकर सवा लाख मंत्रों का अनुष्ठान किया जाता है।

विशिष्ट लाभ एवं फलश्रुति

माँ बगलामुखी के इस मंत्र के नियमित और अनुशासित जप से साधक को अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • शत्रु विजय: गुप्त शत्रुओं, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है।
  • वाक् सिद्धि: साधक की वाणी में प्रभाव उत्पन्न होता है, सभा या वाद-विवाद में कोई उसे हरा नहीं सकता।
  • स्तम्भन शक्ति: बुरी नजर, बाधाएं, आपदाएं और दुर्घटनाएं स्वतः शांत हो जाती हैं।
  • मानसिक स्थिरता: भय, चिंता और मानसिक अशांति दूर होकर आत्मबल में वृद्धि होती है।

सावधानियां एवं नियम

बगलामुखी साधना एक उग्र साधना मानी जाती है, इसलिए इसमें कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • साधना काल में पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और लहसुन-प्याज या तामसिक आहार से दूर रहें।
  • मंत्र का जाप शुद्ध उच्चारण के साथ करें, अन्यथा विपरीत परिणाम भी आ सकते हैं।
  • किसी का अहित करने या बदला लेने की भावना से यह मंत्र न जपें, यह केवल आत्मरक्षा और न्याय के लिए है।
  • साधना की बातें किसी को भी उजागर न करें, इसे अत्यंत गुप्त रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या स्त्रियां माँ बगलामुखी का यह मंत्र जप सकती हैं?
उत्तर: हाँ, स्त्रियां भी माँ बगलामुखी की साधना कर सकती हैं। वे मानसिक रूप से या सामान्य नियमों का पालन करते हुए इस मंत्र का जप कर सकती हैं।

प्रश्न 2: हल्दी की माला का ही प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर: माँ बगलामुखी का वर्ण पीला है और उनका प्राकट्य हल्दी की झील से हुआ था। पीला रंग और हल्दी उन्हें अत्यंत प्रिय है, जो समृद्धि और स्तम्भन का प्रतीक है।

प्रश्न 3: क्या यह मंत्र हर कोई बिना गुरु के जप सकता है?
उत्तर: सामान्य जप (जैसे दैनिक 108 बार सुरक्षा के लिए) कोई भी कर सकता है, परंतु बड़े अनुष्ठान या तांत्रिक सिद्धि के लिए किसी योग्य गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक होता है।

प्रश्न 4: इस मंत्र के जप का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
उत्तर: रात्रि 10 बजे के बाद या प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (3 बजे से 5 बजे के बीच) का समय इस साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

जाप के सिद्ध फल व सावधानियां

पुण्य लाभ एवं साधना के महत्वपूर्ण नियम

प्राप्त होने वाले पुण्य लाभ
शत्रु विजय, वाद-विवाद में सफलता, वाक् सिद्धि और बुरी नजर से रक्षा
साधना में ध्यान रखने योग्य नियम
पीतांबर वस्त्र धारण करें, साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य व सात्विकता रखें

मंत्र से जुड़े मुख्य प्रश्न व समाधान (FAQs)

श्रद्धालुओं द्वारा पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न

इस पावन मंत्र का जप मध्य रात्रि या ब्रह्म मुहूर्त (निशीथ काल) में हल्दी की माला / रुद्राक्ष माला से १०८ बार करना सबसे शुभ व फलदायी माना गया है।
हाँ, मानसिक जप (मानस जप) को शास्त्रों में वाचिक जप से भी अधिक प्रभावशाली और फलदायी माना गया है। इसे आप शांत चित्त होकर कभी भी कर सकते हैं।
नियमित जप से अकाल मृत्यु व नकारात्मकता का भय समाप्त होता है, मानसिक शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इष्टदेव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख वेदों, उपनिषदों एवं सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन हेतु तैयार किया गया है।

मंत्र जप के ५ स्वर्णिम नियम
शुद्धता: स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर पवित्र आसन पर बैठें।
दिशा: पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके जप करना सर्वोत्तम है।
माला का नियम: जप करते समय माला पर तर्जनी उंगली का स्पर्श न होने दें।
एकाग्रता: मंत्र के शब्दों के भावार्थ का हृदय में निरंतर ध्यान करें।
नियमितता: प्रतिदिन निश्चित समय और संख्या में जप करने से सिद्धि मिलती है।
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