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महाबली हनुमान कृपा · श्री हनुमान जी Mantra

श्री हनुमान मूल मंत्र - ॐ हं हनुमते नमः सम्पूर्ण सिद्ध जप विधि, लाभ एवं भय निवारण

श्री हनुमान मूल मंत्र (ॐ हं हनुमते नमः) की सम्पूर्ण सिद्ध जप विधि, विनियोग, न्यास, ध्यान, नियम और चमत्कारी लाभ पढ़ें।

इष्ट देव श्री हनुमान जी
शास्त्र स्रोत वैदिक सनातन धर्मग्रंथ एवं संहिता
उत्तम जप समय ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त के पश्चात
अनुशंसित माला रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला

मूल संस्कृत महामंत्र

शुद्ध शास्त्रीय पाठ एवं उच्चारण स्वरूप

॥ ॐ तत्सत् · सिद्ध वैदिक महामंत्र ॥
ॐ हं हनुमते नमः
सरल हिंदी भावार्थ:

उन हनुमान जी को मेरा बारंबार नमस्कार है, जिनका बीज मंत्र 'हं' है और जो महान शक्ति के भंडार हैं।

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विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं शास्त्रीय विवेचन

मंत्र का गूढ़ रहस्य एवं साधना विधि

मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता

सनातन वैदिक परंपरा में भगवान हनुमान को अष्टचिरंजीवी, संकटमोचन और महाप्राण के रूप में पूजा जाता है। हनुमान जी केवल कलयुग के जागृत देवता ही नहीं हैं, अपितु वे रुद्रावतार, ज्ञानियों में अग्रगण्य (अग्रणी) और अतुलित बलधाम हैं। उनके मूल मंत्र 'ॐ हं हनुमते नमः' का तांत्रिक एवं वैदिक दोनों पद्धतियों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह मंत्र बीज मंत्र 'हं' से युक्त है, जो आकाश तत्व और विशुद्ध चक्र से संबंधित है, जिससे साधक की वाणी और आत्मबल में अलोकिक वृद्धि होती है।

इस मूल मंत्र के ऋषि श्री रामदास अथवा परंपरा अनुसार वाल्मीकि ऋषि माने जाते हैं। इसके छंद 'अनुष्टुप' या 'बृहती' श्रेणी के अंतर्गत आते हैं और इसके अधिष्ठाता देवता साक्षात महावीर श्री हनुमान हैं। इस मंत्र का स्मरण करते ही व्यक्ति के भीतर से अकारण भय, अज्ञात चिंता, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संताप छिन्न-भिन्न होने लगते हैं।

मूल शुद्ध मंत्र एवं लिपि

इस मंत्र का उच्चारण अत्यंत स्पष्ट और शुद्धता के साथ किया जाना चाहिए। संस्कृत की वर्णमाला और हलंत का विशेष ध्यान रखना साधक के लिए अनिवार्य है।

ॐ हं हनुमते नमः

रोमन लिप्यंतरण : Om Ham Hanumate Namah

इस मंत्र में 'ॐ' प्रणव मंत्र है जो ब्रह्मांडीय चेतना का प्रतीक है। 'हं' हनुमान जी का एकाक्षरी बीज मंत्र है जो उनकी प्रचंड अग्नि ऊर्जा और वायु वेग का प्रतिनिधित्व करता है। 'हनुमते' चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग है जिसका अर्थ 'हनुमान के लिए' या 'हनुमान को समर्पित' है, और 'नमः' का अर्थ समर्पण या नमन है।

पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ

मंत्र के प्रत्येक शब्द की अपनी गहरी आध्यात्मिक और दार्शनिक थाती है:

  • ॐ : यह अनाहत नाद है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के कंपन को अपने भीतर समेटे हुए है। यह चेतना का सर्वोच्च शिखर है।
  • हं : यह हनुमान जी का बीज मंत्र है। यह बीज मंत्र शरीर की ऊर्जा को जागृत कर कुण्डलिनी शक्ति को ऊर्ध्वगामी बनाता है। इससे साधক के चक्र संतुलित होते हैं।
  • हनुमते : इसका अर्थ है 'हनुमान जी के लिए'। हनुमान शब्द 'हनु' (हड्डी या ठुड्डी) से बना है, जिनका इंद्र के वज्र से हनु टूटने के कारण नाम हनुमान पड़ा था। यह उनकी अटूट सहनशक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
  • नमः : अहंकार का पूर्ण समर्पण और भगवान के चरणों में शरणागत होना।

सम्पूर्ण भावार्थ: हे सर्वशक्तिमान, संकटमोचन हनुमान जी! आपके बीज मंत्र 'हं' का स्मरण करते हुए मैं अपने आपको आपके चरणों में समर्पित करता हूँ। आप मेरे सभी भयों का नाश करें और मुझे अपनी अनन्य भक्ति व बल प्रदान करें।

विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक

किसी भी मंत्र की साधना को फलीभूत करने के लिए विनियोग और अंगन्यास का विधान शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।

विनियोग

दाएं हाथ में जल लेकर मंत्र का विनियोग पढ़ा जाता है और जल को जमीन पर छोड़ दिया जाता है:

अस्य श्री हनुमान मूल मंत्रस्य रामदास ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्री हनुमान देवता, हं बीजं, स्वाहा शक्तिः, मम सर्वापशान्त्यर्थं जपे विनियोगः।

करन्यास एवं हृदयादि न्यास

अंगुलियों और हृदय पर स्पर्श करते हुए न्यास करें:

  • ॐ हं अंगुष्ठाभ्याम् नमः
  • ॐ हनुमते तर्जनीभ्याम् नमः
  • ॐ नमः मध्यमाभ्याम् नमः
  • ॐ हं अनामिकाभ्याम् नमः
  • ॐ हनुमते कनिष्ठिकाभ्याम् नमः
  • ॐ नमः करतलकरपृष्ठाभ्याम् नमः

ध्यान श्लोक

मंत्र जप प्रारंभ करने से पूर्व भगवान हनुमान के इस दिव्य स्वरूप का मानसिक ध्यान करना चाहिए:

फाल्टीकुण्डलितं हेमसमप्रभं पाणिभ्यां च गदाभृतम्।
सर्वशत्रुहरं देवं वन्दे मारुतनन्दनम्॥

अर्थात: जिनके बाल कुंडलित हैं, जिनका शरीर स्वर्ण के समान कांतिवान है, जिनके दोनों हाथों में गदा है और जो सभी शत्रुओं का नाश करने वाले हैं, ऐसे मारुतिनंदन हनुमान जी की मैं वंदना करता हूँ।

जप विधि व नियम

इस मंत्र के श्रेष्ठतम परिणाम प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:

  • समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक) या प्रदोष काल (संध्याकाल) इस मंत्र के जप के लिए सर्वोत्तम है।
  • स्थान: पूजा घर, एकांत कक्ष या किसी पवित्र मंदिर में आसन लगाकर बैठें। आसन कुशा या ऊनी होना चाहिए।
  • दिशा: साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • माला: रुद्राक्ष की माला या लाल चंदन की माला का प्रयोग करें। स्फटिक की माला का प्रयोग भी किया जा सकता है।
  • संख्या: प्रतिदिन कम से कम 5 माला (540 बार) या 11 माला (1188 बार) का जप करें। अनुष्ठान के दौरान संकल्प लेकर कुल संख्या पूर्ण करें।

विशिष्ट लाभ एवं फलश्रुति

नियमित रूप से 'ॐ हं हनुमते नमः' का जप करने वाले साधक को निम्नलिखित अलौकिक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • भय निवारण: अज्ञात भय, भूत-प्रेत बाधा, नकारात्मक शक्तियां, और रात्रि के बुरे सपनों से तुरंत मुक्ति मिलती है।
  • आरोग्य प्राप्ति: शारीरिक दुर्बलता, गंभीर रोग, वात रोग और ऊर्जा की कमी दूर होती है। हनुमान जी की कृपा से दीर्घायु और आरोग्य प्राप्त होता है।
  • शत्रु बाधा का नाश: अदालती मुकदमों, गुप्त शत्रुओं और विरोधियों द्वारा रचे गए षड्यंत्र विफल हो जाते हैं।
  • मानसिक बल और आत्मविश्वास: निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, साहस में वृद्धि होती है और किसी भी परिस्थिति में विचलित न होने वाला मनोबल प्राप्त होता है।
  • मंगल दोष शांति: जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष या शनि की साढ़ेसाती/ढैय्या का प्रभाव होता है, उनके लिए यह मंत्र अत्यंत कल्याणकारी है।

सावधानियां एवं नियम

मंत्र साधना की पवित्रता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • साधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • सात्विक भोजन (प्याज, लहसुन, तामसिक आहार का त्याग) ग्रहण करें।
  • क्रोध, अहंकार, झूठ और परनिंदा से दूर रहें।
  • महिलाएं इस मंत्र का मानसिक जप कर सकती हैं, परंतु मासिक धर्म के दौरान उच्च अनुष्ठानिक विधि से बचें।
  • मंत्र जप के समय दीपक (घृत या तैल) और सुगंधित धूप अवश्य प्रज्वलित करें।
  1. प्रश्न: क्या महिलाएँ 'ॐ हं हनुमते नमः' मंत्र का जाप कर सकती हैं?
    उत्तर: हाँ, महिलाएँ इस मूल मंत्र का मानसिक या उपांश (धीमी आवाज में) जप कर सकती हैं। हनुमान जी माता अंजनी के पुत्र हैं और वे सभी महिलाओं का मातृवत आदर करते हैं, किंतु शारीरिक पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक है।
  2. प्रश्न: इस मंत्र के जप के लिए सबसे अच्छी माला कौन सी है?
    उत्तर: रुद्राक्ष की माला इस मंत्र के जप के लिए सर्वोत्तम मानी गई है क्योंकि हनुमान जी भगवान शिव के ही रुद्रावतार हैं। लाल चंदन की माला का प्रयोग भी किया जा सकता है।
  3. प्रश्न: क्या इस मंत्र का जाप बिना किसी गुरु के किया जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, यह एक मूल बीज मंत्र है जिसे कोई भी सामान्य साधक हनुमान जी को समर्पित होकर श्रद्धापूर्वक जप सकता है। परंतु यदि किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेकर किया जाए, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
  4. प्रश्न: भय और बुरे सपनों से मुक्ति के लिए इस मंत्र का प्रयोग कैसे करें?
    उत्तर: रात्रि को सोने से पूर्व इस मंत्र की 1 माला (108 बार) का जप करके अपने ऊपर जल छिड़क लें और हनुमान जी का ध्यान करें, इससे सारे भय और दुःस्वप्न समाप्त हो जाते हैं।
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जाप के सिद्ध फल व सावधानियां

पुण्य लाभ एवं साधना के महत्वपूर्ण नियम

प्राप्त होने वाले पुण्य लाभ
भय, भूत-प्रेत बाधा, शत्रु नाश, आयु, आरोग्य, बल और आत्मबल की प्राप्ति।
साधना में ध्यान रखने योग्य नियम
ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक आहार और पूर्ण पवित्रता।

मंत्र से जुड़े मुख्य प्रश्न व समाधान (FAQs)

श्रद्धालुओं द्वारा पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न

इस पावन मंत्र का जप ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त के पश्चात में रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से १०८ बार करना सबसे शुभ व फलदायी माना गया है।
हाँ, मानसिक जप (मानस जप) को शास्त्रों में वाचिक जप से भी अधिक प्रभावशाली और फलदायी माना गया है। इसे आप शांत चित्त होकर कभी भी कर सकते हैं।
नियमित जप से अकाल मृत्यु व नकारात्मकता का भय समाप्त होता है, मानसिक शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इष्टदेव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख वेदों, उपनिषदों एवं सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन हेतु तैयार किया गया है।

मंत्र जप के ५ स्वर्णिम नियम
शुद्धता: स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर पवित्र आसन पर बैठें।
दिशा: पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके जप करना सर्वोत्तम है।
माला का नियम: जप करते समय माला पर तर्जनी उंगली का स्पर्श न होने दें।
एकाग्रता: मंत्र के शब्दों के भावार्थ का हृदय में निरंतर ध्यान करें।
नियमितता: प्रतिदिन निश्चित समय और संख्या में जप करने से सिद्धि मिलती है।
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